नोएडा. यूपी के नोएडा में अचानक थायरॉइड के मामले बढ़ने से लोग सकते में हैं. डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते अपनी लाइफ स्टाइल को नहीं सुधारा गया तो ये स्थिति बिगड़ सकती है. बदलती जीवनशैली, बढ़ते प्रदूषण और तनाव के बीच थायराइड अब एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है. देश में हर 9वें या 10वें व्यक्ति को किसी न किसी रूप में थायराइड है. खासकर दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरी इलाकों में इसके मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. लोकल 18 से नोएडा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भंगेल में कार्यरत डॉ. मीरा पाठक ने बताया कि थायराइड हार्मोन शरीर के कई जरूरी कार्यों को नियंत्रित करता है. थायराइड ग्रंथि से निकलने वाले टी-3 और टी-4 हार्मोन शरीर की ऊर्जा, हृदय गति, वजन, पाचन और मानसिक स्थिति को संतुलित बनाए रखते हैं.
दो स्थितियां, दोनों अलग
डॉ. मीरा बताती हैं कि जब शरीर में यह हार्मोन अधिक मात्रा में बनने लगता है तो उसे हाइपरथायरायडिज्म कहा जाता है, जबकि हार्मोन कम बनने पर हाइपोथायरायडिज्म की समस्या होती है. दोनों स्थितियों के लक्षण अलग-अलग होते हैं. हाइपोथायरायडिज्म में व्यक्ति को थकान, कब्ज, वजन बढ़ना, बाल झड़ना, याददाश्त कमजोर होना और अधिक ठंड लगने जैसी समस्याएं होती हैं. हाइपरथायरायडिज्म में धड़कन तेज होना, अधिक पसीना आना, हाथ कांपना, चिड़चिड़ापन, वजन घटना और नींद कम आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.
पीरियड से क्या कनेक्शन
डॉ. मीरा के मुताबिक, लोग अक्सर शुरुआती संकेतों को सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि समय पर जांच बेहद जरूरी है. अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक कमजोरी, थकान, कब्ज, हाथ कांपना, धड़कन तेज महसूस होना या शरीर के तापमान में असामान्य बदलाव महसूस हो रहा है तो तुरंत थायराइड की जांच करानी चाहिए. महिलाओं में इरेगुलर पीरियड्स, गर्भधारण में दिक्कत और हार्मोनल असंतुलन भी थायराइड का संकेत हो सकता है. गर्भावस्था के दौरान थायराइड की समस्या और ज्यादा गंभीर हो सकती है. अनियंत्रित थायराइड से एनीमिया, हाई बीपी और समय से पहले डिलीवरी जैसी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं.
स्क्रीन टाइम बढ़ा रहा दिक्कत
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते थायराइड मामलों की वजह डॉ. मीरा पाठक ने आधुनिक जीवनशैली को बताया. उन्होंने कहा कि बढ़ता वायु प्रदूषण, तनाव, नींद की कमी, जंक फूड, अधिक स्क्रीन टाइम और शारीरिक गतिविधियों में कमी लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रही है. पैकेज्ड फूड, अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट और मीठे पेय पदार्थ हार्मोनल असंतुलन को बढ़ावा दे रहे हैं. कॉर्पोरेट सेक्टर में लंबे समय तक काम करने वाले युवा और महिलाएं तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं. लगातार तनाव और अनियमित दिनचर्या शरीर के हार्मोन सिस्टम को प्रभावित कर रही है, जिससे थायराइड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं.
न करें ये काम
डॉ. मीरा के अनुसार, सही लाइफस्टाइल अपनाकर थायराइड को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. उन्होंने लोगों को फाइबर और प्रोटीन युक्त संतुलित भोजन लेने, नियमित व्यायाम करने, पर्याप्त नींद लेने और स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह दी. रोजाना सात से आठ घंटे की नींद और हेल्दी डाइट शरीर के हार्मोन को संतुलित रखने में मदद करती है. समय-समय पर जांच कराना भी जरूरी है, ताकि बीमारी को शुरुआती स्तर पर रोका जा सके.





