इराक वॉर के समय खाड़ी में तैनात थे 4 एयरक्राफ्ट कैरियर, अब पूरी दुनिया में 3, सिर्फ कागज पर मजबूत US आर्मी?


अमेरिका के सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में शामिल यूएसएस अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती ने अमेरिकी नौसेना की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि जहाज पर तैनात जवानों को लंबे समय तक बेहद मुश्किल हालातों का सामना करना पड़ा. खराब खाने से लेकर पानी की समस्या, गंदे शावर और जरूरी सामान की कमी तक की शिकायतें सामने आईं.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि लिंकन करीब 260 दिन समुद्र में रहा, जिसमें लगभग 240 दिन लगातार बिना किसी बंदरगाह पर रुके गुजरे. इसी वजह से 6 अगस्त 2026 को सैन डिएगो के नॉर्थ आइलैंड नेवल एयर स्टेशन पर नौसेना के अधिकारियों और लिंकन पर तैनात जवानों के 200 से ज्यादा परिवारों के बीच बैठक हुई.

परिवारों का कहना था कि उनके अपने लोगों ने जहाज पर हालात बिगड़ने की जानकारी दी थी. यानी जिस युद्धपोत को अमेरिकी नौसेना की ताकत का प्रतीक माना जाता है, उसी पर लंबे समय तक तैनात जवानों की जिंदगी मुश्किल होती जा रही थी.

आखिर लिंकन को इतना लंबा मिशन क्यों करना पड़ा?

इसके पीछे सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है कि अमेरिका के पास ऑपरेशनल एयरक्राफ्ट कैरियर उपलब्ध नहीं हैं. दावा है कि अमेरिकी नौसेना के पास कागज पर 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी 11 एक साथ युद्ध के लिए तैयार रहते हैं. कुछ जहाजों की मरम्मत चलती रहती है, कुछ के क्रू को ट्रेनिंग की जरूरत होती है और कुछ दूसरे रखरखाव के कारण समुद्र में नहीं जा पाते.

नतीजा यह हुआ कि लिंकन को लंबे समय तक अपनी जगह पर तैनात रहना पड़ा, क्योंकि उसकी जगह लेने के लिए दूसरा तैयार कैरियर नहीं था.

एक एयरक्राफ्ट कैरियर पर कितने लोग रहते हैं?

यूएसएस अब्राहम लिंकन अकेला जहाज नहीं है. यह एक बड़े कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का हिस्सा है. लिंकन पर करीब 3200 नौसैनिक तैनात रहते हैं. इसके अलावा करीब 2480 लोग उसके लड़ाकू विमानों और दूसरे एयरक्राफ्ट की देखभाल से जुड़े होते हैं. इसके साथ कई गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और आमतौर पर एक या दो परमाणु पनडुब्बियां भी होती हैं.

पूरे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में आम तौर पर 6500 से 7500 अधिकारी और नौसैनिक हो सकते हैं. सबसे अहम बात है कैरियर के क्रू को बीच मिशन में आसानी से बदला नहीं जा सकता. यानी जहाज जितने लंबे समय तक समुद्र में रहेगा, वही लोग उतने लंबे समय तक ड्यूटी करते रहेंगे.

अमेरिका की नौसेना में जवानों की भी कमी

समस्या सिर्फ जहाजों की नहीं है. अमेरिकी नौसेना लंबे समय से ट्रेंड नौसैनिकों की कमी से भी जूझ रही है. हालिया रिपोर्टों में करीब 20 हजार कर्मियों की कमी का जिक्र किया गया है. भर्ती कम हो रही है और दूसरी तरफ कई अनुभवी लोग नौसेना छोड़ भी रहे हैं.

इसके अलावा ट्रेनिंग व्यवस्था पर भी दबाव है. ट्रेनर और ट्रेंड कर्मी उपलब्ध न होने के कारण नए जवानों को तैयार करना भी चुनौती बन गया है.

1991 में चार कैरियर एक साथ थे

अमेरिकी नौसेना की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए 1991 का उदाहरण काफी अहम है. गल्फ वॉर के दौरान एक समय चार अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर एक साथ फारस की खाड़ी में ऑपरेट कर रहे थे. आज पूरी अमेरिकी नौसेना के पास 11 कैरियर होने के बावजूद आज समुद्र में केवल तीन अमेरिकी कैरियर तैनात हैं. इनमें USS अब्राहम लिंकन, USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश और USS जॉर्ज वाशिंगटन.

22 अगस्त या उसके तुरंत बाद, लिंकन सैन डिएगो स्थित अपने होम पोर्ट पर लौटेगा जहाँ उसकी मरम्मत की जाएगी. वहीं जापान में तैनात USS जॉर्ज वाशिंगटन अब अब्राहम लिंकन की जगह लेने के लिए रवाना हो रहा है. इससे पूरे प्रशांत महासागर क्षेत्र में एक भी अमेरिकी कैरियर टास्क फोर्स नहीं बचेगी. इस समय उत्तरी या दक्षिणी अटलांटिक, कैरेबियन या भूमध्य सागर में भी कोई अमेरिकी कैरियर तैनात नहीं है. साफ शब्दों में कहें तो संख्या कागज पर बड़ी है, लेकिन असल समय में मौजूद ताकत काफी कम हो सकती है.

लिंकन अब वापस लौटेगा, लेकिन बढ़ी समस्या

22 अगस्त या उसके आसपास लिंकन के सैन डिएगो लौटने की उम्मीद है. इसके बाद उसे लंबे रखरखाव और मरम्मत से गुजरना पड़ सकता है. लंबी तैनाती के दौरान कैटापल्ट, फ्लाइट डेक, इंजन और दूसरे सिस्टम पर काफी दबाव पड़ता है. इसलिए इसकी मरम्मत में कई महीने लग सकते हैं. इस दौरान लिंकन अमेरिकी नौसेना की समुद्री ताकत का हिस्सा नहीं रहेगा.

उसकी जगह यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन को भेजा जा रहा है. इससे प्रशांत क्षेत्र में भी अमेरिकी कैरियर मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

अमेरिकी नौसेना के सामने बड़ा सवाल

अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्तियों में से एक है. उसके एयरक्राफ्ट कैरियर लंबे समय से उसकी वैश्विक सैन्य ताकत और डिटरेंस यानी दुश्मनों को हमला करने से रोकने की क्षमता का अहम हिस्सा रहे हैं. लेकिन लिंकन की कहानी एक बड़ी समस्या दिखाती है.

अगर 11 कैरियर होने के बावजूद सिर्फ दो-तीन को ही किसी समय प्रभावी रूप से ऑपरेशनल रखा जा सके, तो बड़े संकट या युद्ध की स्थिति में अमेरिका कितनी जल्दी अपनी ताकत तैनात कर पाएगा? लिंकन की परेशानी सिर्फ एक जहाज की कहानी नहीं है. यह नौसैनिकों की कमी, ट्रेनिंग की समस्या, जहाजों की लंबी मरम्मत और बढ़ते रखरखाव के बोझ की बड़ी तस्वीर दिखाती है.



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