ईरान के साथ युद्ध और यूक्रेन में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका अब अपने मिसाइल भंडार को तेजी से भरने में जुट गया है. अमेरिकी रक्षा विभाग ने मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर खर्च करने का फैसला किया है. अमेरिका की चिंता इसलिए बढ़ी है क्योंकि एक तरफ ईरान के खिलाफ अभियान में बड़ी संख्या में मिसाइलें इस्तेमाल हो रही हैं. वहीं दूसरी तरफ यूक्रेन को भी अमेरिकी एयर डिफेंस मिसाइलों की जरूरत है.
टॉमहॉक मिसाइलों के लिए 22.9 अरब डॉलर
अमेरिका ने टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों के लिए करीब 22.9 अरब डॉलर का बड़ा फंड खर्च करने जा रहा है. टॉमहॉक अमेरिका की लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों में से एक है. इसे समुद्र में मौजूद युद्धपोतों और पनडुब्बियों से लॉन्च किया जा सकता है. ईरान के खिलाफ चल रहे अभियान में इन मिसाइलों के इस्तेमाल से अमेरिकी भंडार पर दबाव बढ़ा है. अब अमेरिका नए टॉमहॉक बनाकर अपने स्टॉक को फिर से मजबूत करना चाहता है.
PAC-3 और SM-3 मिसाइलों का उत्पादन भी बढ़ेगा
सिर्फ हमला करने वाली मिसाइलें ही नहीं, अमेरिका एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलों का उत्पादन भी तेज कर रहा है. इनमें खास तौर पर PAC-3 MSE इंटरसेप्टर और SM-3 इंटरसेप्टर शामिल हैं. PAC-3 मिसाइल दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही रोकने के लिए इस्तेमाल होती है. वहीं SM-3 भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम का अहम हिस्सा है.
यूक्रेन और ईरान ने बढ़ाया दबाव
अमेरिका पहले से यूक्रेन को एयर डिफेंस सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलें उपलब्ध करा रहा है. यूक्रेन में रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों के खिलाफ इन हथियारों की भारी मांग है. अब मिडिल में ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इजरायली अभियानों के कारण इन मिसाइलों की जरूरत और बढ़ गई है. यानी अमेरिकी मिसाइल उद्योग पर दो मोर्चों से दबाव पड़ रहा है, यूरोप में यूक्रेन और मिडिल में ईरान.
अमेरिका का मिसाइल स्टॉक क्यों घट रहा है?
आधुनिक युद्ध में मिसाइलों की खपत बहुत तेजी से होती है. एक बड़े सैन्य अभियान में हजारों मिसाइलें और इंटरसेप्टर कुछ ही समय में इस्तेमाल हो सकते हैं. समस्या यह है कि अपडेटेड मिसाइलों को रातोंरात नहीं बनाया जा सकता. इनके बनाने के लिए खास कारखाने, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, इंजन, सेंसर और ट्रेंड कर्मचारियों की जरूरत होती है.
इसीलिए अमेरिका अब सिर्फ मौजूदा युद्ध की जरूरत पूरी करने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि भविष्य के लंबे युद्ध के लिए भी अपना हथियार भंडार बढ़ाना चाहता है.
सबसे बड़ी चुनौती
अमेरिका के सामने असली चुनौती सिर्फ पैसा नहीं है. सवाल यह है कि क्या अमेरिकी रक्षा उद्योग इतनी तेजी से मिसाइलें बना सकता है कि इस्तेमाल होने वाली मिसाइलों की जगह नई मिसाइलें लगातार आती रहें? यूक्रेन युद्ध ने पहले ही दिखा दिया है कि आधुनिक युद्ध में हथियारों की खपत कितनी तेज हो सकती है. अब ईरान के साथ संघर्ष ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है.
अमेरिका क्यों डरा हुआ है?
अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्तियों में से एक है, लेकिन लंबे समय तक चलने वाले बड़े युद्ध में हथियारों का भंडार भी सीमित हो सकता है. अगर एक साथ कई मोर्चों पर मिसाइलों की जरूरत पड़ जाए तो स्थिति और मुश्किल हो सकती है. इसीलिए अमेरिका अब अपनी आर्सेनल ऑफ फ्रीडम यानी हथियारों की ताकत को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है.




