अलग-थलग बीजेपी
साल 1996 के बाद पहली बार बीजेपी ने संकेत दिया है कि वह 2027 का विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। सभी 117 सीटों पर ताल ठोकने के फैसले को कुछ लोग 2017 में आप के चुनावी पदार्पण के बाद पंजाब का सबसे बड़ा राजनीतिक जुआ मान रहे हैं; वहीं, कुछ इसे औकात से बड़ी महत्वाकांक्षा बता रहे हैं। जो भी हो, पंजाब के सियासी बाजार में एक नई और शोरगुल भरी दुकान सज चुकी है।
बीजेपी की पूरी रणनीति अपराध, भ्रष्टाचार और ‘चिट्टा’ (ड्रग्स) पर टिकी है। उसकी ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ कंडी बेल्ट के पठानकोट से शुरू होकर फतेहगढ़ साहिब होते हुए मालवा के कपास और नशे के गलियारे तलवंडी साबो तक जाती है, जिसमें राजसी ठाठ-बाठ जोड़ने के लिए पटियाला को भी शामिल किया गया है। यह रूट बेहद चालाकी से चुना गया है। नशा अकेला मुद्दा है जिस पर जाट हो या दलित, सिख हो या हिन्दू, पंजाब का हर परिवार पूरी तरह सहमत दिखता है। हालांकि, यह यात्रा विवादों में है; फतेहगढ़ साहिब, समराला और दीनानगर में इसे काले झंडे दिखाए गए, जबकि बटाला में पूर्व केन्द्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू के काफिले पर पथराव तक हुआ।
बीजेपी पंजाब की सुस्त 6.1 प्रतिशत की विकास दर के मुकाबले हरियाणा के 9.5 प्रतिशत के विकास मॉडल को पेश कर रही है। उसकी मुफ्त रेवड़ियों का पिटारा ऐसा तैयार किया गया है जो आम आदमी पार्टी की सीधी नकल न लगे, मगर दिलकश दिखे: महिलाओं के लिए 2,100 रुपये की ‘लाडो लक्ष्मी’ योजना, मुफ्त डायलिसिस, जरूरतमंद परिवारों को 500 रुपये में एलपीजी सिलेंडर और फसलों के एक बड़े दायरे पर एमएसपी की कानूनी गारंटी। सीधा संदेश है: ‘आ के देखो, पड़ोसी हरियाणा कितना बढ़िया चल रहा है’।




