शिंदे ने उद्धव ठाकरे को ही निष्कासित कर दिया
सिब्बल ने कहा, “निर्वाचन आयोग ने कहा कि हमें अनुशासन समिति के पास जाना चाहिए था। मैं शिंदे को किस चीज से निष्कासित करता? उन्होंने तो मुझे यानी पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे को ही निष्कासित कर दिया। जबकि शिवसेना पक्ष प्रमुख का चुनाव होता है। पार्टी की सर्वोच्च इकाई राष्ट्रीय कार्यकारिणी है। जिला प्रमुख, उप-जिला प्रमुख मनोनीत होते हैं और वे निर्वाचित व्यक्तियों के निर्णय लागू करते हैं।”
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ‘शिवसेना नेता’ अभिव्यक्ति थोड़ी अस्पष्ट है। क्या इसका मतलब विधायी पार्टी के नेता से है या संगठन के नेता से? सिब्बल ने कहा कि इसका मतलब संगठन में नेता से है। ईसीआई एक विशेष निष्कर्ष पर पहुंचना चाहता था, इसलिए उसने 2018 के संविधान को नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने पहले ही नतीजा तय कर लिया था।
सिब्बल ने यह भी कहा, “आयोग 13 वर्षों तक यह पता ही नहीं लगा पाया कि पार्टी का दूसरा संविधान भी है। आयोग तो सभी राजनीतिक दलों के गठन पर निगाह रखता है। फिर वे तर्क देते हैं कि यह संविधान रिकॉर्ड पर ही नहीं है। आयोग ने समाजवादी पार्टी वाले फैसले का हवाला दिया।” इस पर सीजेआई ने पूछा, “कौन जीता, पिता या बेटा?” सिब्बल ने हंसते हुए कहा, “बेटे की जीत हुई। मैंने बेटे की पैरवी की थी।”
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