गुरुवार के कारोबार के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में मामूली नरमी आई, लेकिन ये मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण 102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर बनी रहीं। वहीं, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी से उछाल आया, जिससे इक्विटी निवेशकों के बीच नई चिंताएं पैदा हुईं और जोखिम भरी संपत्तियों का सापेक्ष आकर्षण कम हो गया।
गुरुवार (24 सितंबर) को देश के शीर्ष स्टॉक एक्सचेंज ने बीएसई पर अपना डेब्यू किया, जो एक ऐतिहासिक दिन था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के शेयर लिस्टिंग के दौरान 1.79 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,817 रुपए पर बंद हुए, जो इसके आईपीओ प्राइस बैंड 1,785 रुपए से अधिक है।
एक मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच बाजार पर दबाव बना, जो ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक जोखिमों के बढ़ने का संकेत है।




