Last Updated:
गुजरात में मौजूद स्तंभेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनोखी खासियत की वजह से दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यहां दिन में कुछ समय के लिए समुद्र खुद मंदिर को पानी में डुबो देता है, जिसे लोग भगवान शिव का प्राकृतिक जलाभिषेक मानते हैं. ज्वार और भाटा के साथ गायब और फिर दिखाई देने वाला यह मंदिर लोगों को हैरानी और आस्था दोनों का अनुभव कराता है.
स्तंभेश्वर महादेव मंदिर
गुजरात के भरूच जिले के कावी गांव के पास समुद्र किनारे स्थित स्तंभेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनोखी विशेषता की वजह से बेहद प्रसिद्ध है. यह मंदिर समुद्र से करीब 50 मीटर की दूरी पर बना हुआ है और यहां आने वाले श्रद्धालु समुद्र की ऊंची उठती लहरों का बेहद करीब से नजारा देख सकते हैं. इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि ज्वार आने पर पूरा शिवलिंग समुद्र के पानी में डूब जाता है और कुछ घंटों बाद जब पानी कम होता है, तो शिवलिंग फिर से दिखाई देने लगता है.
यह दृश्य लोगों को किसी चमत्कार जैसा महसूस होता है. मंदिर लगभग 152 साल से भी ज्यादा पुराना माना जाता है. यहां भगवान शिव का शिवलिंग स्थापित है, जिसके बारे में मान्यता है कि समुद्र की लहरें खुद आकर उनका जलाभिषेक करती हैं. जब ज्वार आता है, तो पूरा मंदिर समुद्र के पानी में समा जाता है और सिर्फ पानी ही दिखाई देता है. कुछ समय बाद जब भाटा आता है, तो मंदिर फिर से बाहर नजर आने लगता है.
मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता
स्तंभेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है. मान्यता है कि भगवान कार्तिकेय ने इसी स्थान पर असुर तारकासुर का वध किया था. कहा जाता है कि तारकासुर भगवान शिव का भक्त था, इसलिए उसके वध के बाद भगवान कार्तिकेय ने प्रायश्चित स्वरूप यहां शिवलिंग की स्थापना की और भगवान शिव की आराधना की. कथाओं के अनुसार उन्होंने वर्षों तक यहां तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था.
धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि स्तंभेश्वर महादेव मंदिर का उल्लेख महापुराण के कुमारिका खंड में मिलता है, जहां इस स्थान की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है. कई श्रद्धालु इसे भगवान केदारनाथ के बाद अत्यंत महत्वपूर्ण शिवस्थलों में से एक मानते हैं.
दिन में दो बार समुद्र में समा जाता है शिवलिंग
इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यही है कि यहां स्थित शिवलिंग दिन में दो बार समुद्र के पानी में पूरी तरह डूब जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार समुद्र देवता स्वयं आकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. लगभग 6 घंटे तक शिवलिंग पानी में रहता है और फिर अगले 6 घंटे बाद पानी हटने पर दोबारा दर्शन देता है. यही अद्भुत दृश्य इस मंदिर को बाकी शिव मंदिरों से अलग बनाता है.
महाशिवरात्रि और सावन में उमड़ती है भारी भीड़
स्तंभेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि और श्रावण मास के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. यहां महाशिवरात्रि के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है, जबकि पूरे सावन महीने में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है. सोमवार, अमावस्या और अन्य खास धार्मिक अवसरों पर भी हजारों लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं. यह मंदिर आस्था, प्रकृति और रहस्य का अनोखा संगम माना जाता है.
About the Author
विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें





