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jowar Roti Cooling Effects: इस भीषण गर्मी का प्रकोप चारों तरफ से जोरों पर हैं. ऐसे में अगर शरीर अंदर से गर्म रहे तो मुश्किलें कई गुना ज्यादा हो जाती है. इन मुश्किलों का सामना करने के लिए जरूरी है कि शरीर का अंदर का तापमान ज्यादा न हो. इसके लिए हमें ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए जिसकी तासीर ठंडी हो. ज्वार इसमें सबसे पहले नंबर पर आता है. ज्वार की तासीर ठंडी होती है और इस लिहाज से ज्वार की रोटी शरीर को इस भीषण गर्मी में भी अंदर से ठंडा रखेगी.
ठंडी तासीर वाली रोटी.
jowar roti benefit : मोटे अनाजों में बाजरे की तासीर गर्म होती है, इसलिए बाजरे की रोटी खाने की सलाह सर्दी में दी जाती है लेकिन ज्वारा ऐसा मोटा अनाज है जिसकी तासीर ठंडी होती है और यह शरीर को अंदर से ठंडा रखता है. आयुर्वेद में इसकी तासीर ठंडी होती है. यही कारण है कि गर्मियों के मौसम में ज्वार की रोटी या इसका राबड़ी के रूप में सेवन करने की सलाह दी जाती है. यह शरीर की गर्मी को शांत करता है और पेट को ठंडक पहुंचाता है. आइए जानते हैं कि ज्वार की रोटी सर्दी में किस तरह ठंडक पहुंचाती है.
ज्वार में साइंटिफिक गुण
पहले यह जान लीजिए कि ज्वार में कौन-कौन से साइंटिफिक गुण पाए जाते हैं. जर्नल ऑफ न्यूट्रिशनल साइंस एंड विटामिनोलॉजी के मुताबिक देश और विदेश के शोधकर्ताओं के अध्ययनों में पाया गया कि साबुत ज्वार में मौजूद जटिल कार्बोहाइड्रेट और रेजिस्टेंस स्टार्च पाए जाते हैं जिसके कारण यह पेट में धीरे-धीरे पचता है. इससे इंसुलिन सेंसिटिविठी में सुधार आती है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में पोस्टप्रैंडियल ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है. ज्वार में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जिससे शरीर में इंफ्लामेशन कम होता है और इसकी वजह से कई क्रोनिक बीमारियों का खतरा भी कम होता है. जर्नल ऑफ एग्रीकल्चरल एंड फूड केमिस्ट्री के मुताबिक काली और लाल रंग की भूसी वाले ज्वार में एंथोसायनिन और टैनिन जैसे फिनोलिक यौगिकों की मात्रा कुछ फलों से भी अधिक पाई गई. ये एंटीऑक्सीडेंट फ्री-रेडिकल्स को नष्ट कर शरीर की कोशिकाओं को डैमेज होने से बचाते हैं. इससे कैंसर का खतरा भी कम हो जाता है.
कई बीमारियों का खतरा कम
जर्नल ऑफ द साइंस ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर के मुताबिक ज्वार में गेहूं की तरह ग्लूटेन प्रोटीन चेन नहीं होती. इसके अघुलनशील फाइबर आंतों के गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं और सीलिएक रोग से पीड़ित मरीजों के पेट की अंदरूनी परत को सुरक्षित रखते हैं. यह हार्ट के लिए भी फायदेमंद होता है. जानवरों और क्लिनिकल ट्रायल्स पर की गई रिसर्च से पता चला है कि ज्वार में मौजूद फाइटोस्टेरॉल्सनामक प्लांट कंपाउंड शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकते हैं, जिससे धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा कम होता है. इस तरह यह हार्ट को महफूज रखने में भी मदद करता है. इससे कई तरह की क्रोनिक बीमारियों का जोखिम भी कम होता है.
आयुर्वेद में ज्वार की शीतलता
आयुर्वेद में ज्वार को यवनाल कहा जाता है. ज्वार स्वभाव से मधुर, कसैला, रूखा (रुक्ष) और शीत वीर्य यानी ठंडी तासीर का होता है. यह मुख्य रूप से शरीर में बढ़े हुए पित्त और कफ दोष को शांत करता है. ठंडी तासीर होने के कारण यह गर्मी में शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाता है. शरीर में पित्त बढ़ने से छाती में जलन, खट्टी डकारें और पेट में गर्मी जैसी समस्याएं होती हैं. ज्वार अपनी शीत प्रकृति के कारण आमाशय की अतिरिक्त एसिडिटी को शांत करता है और अल्सर के खतरे को कम करता है. आयुर्वेद के अनुसार, रक्त विकार और त्वचा की अधिकांश समस्याएं शरीर की आंतरिक गर्मी और पित्त बिगड़ने से होती हैं. ज्वार का सेवन खून को साफ कर त्वचा को ठंडक और चमक देता है.
गर्मियों में लू से बचाव
गर्मी में ज्वार की रोटी या इसकी छाछ के साथ बनाई गई राबड़ी खाने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है. यह अत्यधिक पसीने, चक्कर आने और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की समस्या को रोकता है. ज्वार की रोटी खाने से शारीरिक बल बढ़ता है और पाचन मजबूत होता है. शीतल होने के साथ-साथ यह पचने में हल्का होता है, जिससे यह शरीर पर बिना भारीपन पैदा किए बल और ऊर्जा देता है.
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18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें





