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जहां वेस्ट विंग में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस लगातार अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं. नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड के इस्तीफे को जेडी वेंस के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वे बंद कमरों में ईरान युद्ध के खिलाफ वेंस की सबसे मजबूत वैचारिक साथी थीं. दूसरी तरफ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो की आक्रामक विदेश नीति पर ट्रंप का भरोसा लगातार बढ़ रहा है और व्हाइट हाउस में उनका दबदबा हावी हो चुका है.
अमेरिका मे रूबियो वर्सेस वेंस
वॉशिंगटन : ईरान-अमेरिका जंग में ट्रंप की गिरती एप्रूवल रेटिंग ने रिपब्लिकन पार्टी के अंदर भूचाल मचा दिया है. इस पार्टी की पॉलिसी पर अमेरिकी लोगों का भरोसा टूटता नजर आ रहा है. वहीं, पार्टी में एक और महाभारत शुरू हो गई है. खबर है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे करीबी और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस समय अपने ही घर यानी वेस्ट विंग में अकेले पड़ते जा रहे हैं. कयास तो यहां तक लगाए जा रहे हैं कि साल 2028 की राष्ट्रपति चुनाव की रेस मार्को रूबियो जीत सकते हैं.
क्या है पूरा मामला? तुलसी गबार्ड का जाना बना बड़ा झटका
रूबियो वर्सेस वेंस की कहानी में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड का इस्तीफा बना है. तुलसी ने अपने पति को एक दुर्लभ कैंसर होने की वजह से पद छोड़ने का फैसला किया. इस एक फैसले ने जेडी वेंस को हिलाकर रख दिया. असल में, तुलसी गबार्ड को व्हाइट हाउस के भीतर जेडी वेंस की सबसे मजबूत और बड़ी वैचारिक साथी माना जाता था.
वेंस और तुलसी दोनों ही अमेरिकी प्रशासन के उन चुनिंदा चेहरों में से थे जो दूसरे देशों के मामलों में अमेरिकी सेना के दखल के खिलाफ थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान युद्ध को लेकर जेडी वेंस और तुलसी गबार्ड ने बंद कमरों के पीछे अपनी गंभीर चिंताएं और असहमति जताई थी. अब तुलसी के जाते ही वेंस कैबिनेट में इस विचारधारा पर पूरी तरह अकेले पड़ गए हैं.
मार्को रुबियो का जलवा: ‘प्रेसिडेंट सिर्फ उनकी सुनते हैं’
एक तरफ जेडी वेंस कमजोर पड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सितारा तेजी से बुलंद हो रहे हैं. व्हाइट हाउस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों जेडी वेंस से ज्यादा मार्को रुबियो की आक्रामक विदेश नीति पर भरोसा कर रहे हैं. रुबियो का दबदबा इस कदर बढ़ गया है कि प्रशासन में अब ‘क्यूबा पर आक्रमण’ जैसी आक्रामक रणनीतियों पर चर्चाएं हावी होने लगी हैं.
ब्रिटिश अखबार ‘द डेली मेल’ को व्हाइट हाउस के एक अंदरूनी सूत्र ने बेहद दोटूक शब्दों में बताया, ‘इस समय मार्को रुबियो का जलवा जेडी वेंस से कहीं ज्यादा है. राष्ट्रपति सिर्फ रुबियो की सुनते हैं. वेंस इस समय ट्रंप की कोर टीम की सोच से काफी पीछे छूट चुके हैं और यह स्थिति काफी समय से बनी हुई है’.
क्या 2028 की रेस से बाहर होंगे जेडी वेंस?
इस अंदरूनी खींचतान का सीधा असर अब 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की तैयारियों पर पड़ता दिख रहा है. कई सूत्रों का दावा है कि वेंस अब 2028 में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी ठोकने का विचार छोड़ सकते हैं. वेंस के करीबियों का मानना है कि पिछले कुछ सालों में प्रशासन के भीतर जो कुछ भी विवाद हुए हैं, उसका ठीकरा वेंस अपने सिर नहीं फोड़ना चाहते. उनके मददगारों का सुझाव है कि वेंस को इस बार शांत बैठकर सही वक्त का इंतजार करना चाहिए.
सट्टा बाजार में भी यह साफ दिख रहा है. सट्टेबाज़ी की मशहूर साइट ‘कल्शी’ (Kalshi) पर जेडी वेंस के 2028 रिपब्लिकन उम्मीदवार बनने की संभावना 50% से घटकर 46.7% पर आ गई है. वहीं दूसरी तरफ, जनवरी से लेकर अब तक मार्को रुबियो की रेटिंग 11% से छलांग लगाकर सीधे 18% पर पहुंच चुकी है.
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Utkarsha Srivastava is seasoned digital journalist specializing in geo-politics issues, currently writing for World section of News18 Hindi. With over a decade of extensive experience in hindi digital media, sh…और पढ़ें





