Gaya ANMMCH super specialty cath lab shut patients helpless and referred


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Magadh Medical College Gaya News: गया के मगध मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशियलिटी विभाग शुरू होने के डेढ़ साल बाद भी कैथलैब की सुविधा नहीं मिल रही है. रोजाना आने वाले 20-25 हृदय रोगियों में से आधे मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है. इस लोकल 18 ने अस्पताल के अधीक्षक से बात की. जानिए कब शुरू होगी यह सुविधा.

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गया: दक्षिण बिहार के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल की चमक-धमक वाली सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग आज सफेद हाथी साबित हो रही है. साल 2024 में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने इसका उद्घाटन किया था. साथ ही उन्होंने वादा किया था कि गया के लोगों को अब दिल्ली जैसा इलाज मिलेगा. लेकिन हकीकत यह है कि डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी यहां हृदय रोगियों के लिए जीवन रक्षक कैथलैब की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है.

रोजाना 20-25 मरीज, आधे हो रहे रेफर
अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग में दिल की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का तांता लगा रहता है. आंकड़ों के मुताबिक प्रतिदिन औसतन 20 से 25 हृदय रोगी यहां पहुंच रहे हैं. इनमें से 10-12 गंभीर मरीज रेफर कर दिया जाता है. इन मरीजों को हार्ट अटैक के बाद तत्काल सर्जरी या एंजियोग्राफी की जरूरत होती है. लेकिन कैथलैब की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के अभाव में पटना या अन्य निजी अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है. डॉक्टर तो मौजूद हैं पर आधुनिक उपकरणों और कैथलैब के बिना उनके हाथ बंधे हुए हैं.

मशीन आई पर इंस्टॉलेशन का पेच
अस्पताल के अधीक्षक डॉ.के.के. सिन्हा का कहना है कि कैथलैब की मशीन अस्पताल पहुंच चुकी है. लेकिन इसे चालू होने में अभी कुछ महीनों का वक्त और लगेगा. फिलहाल सुपर स्पेशियलिटी यूनिट में केवल ओपीडी संचालित है. हालांकि अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि इंटीरियर का काम शुरू कर दिया गया है. इसके पूरा होते ही मशीन इंस्टॉल कर दी जाएगी. कैथलैब शुरू होने के बाद ही यहां पेसमेकर और एंजियोग्राफी जैसी सुविधाएं मिल पाएंगी.

सिर्फ ईसीजी के भरोसे मरीज
वर्तमान में यहां हृदय रोगियों को केवल ईसीजी, सामान्य इको और ट्रांसएसोफेजियल इको की सुविधा मिल रही है. लेकिन इमरजेंसी की स्थिति में बिना कैथलैब के मरीजों की जान बचाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. गया जी की जनता अब सवाल पूछ रही है कि जब मशीन आ चुकी है और भवन तैयार है तो दिल्ली जैसी सुविधा देने का वादा इंस्टॉलेशन की फाइल में क्यों दबा है?

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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