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व्हाइट हाउस ने बताया कि चीन अमेरिका के बीफ के लिए अपने बाजार को खोलने के लिए तैयार है. दोनों देशों ने टैरिफों में कटौती के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है. कई खेती किसानी सेक्टर को ट्रेड से बाहर रखा गया था. डेयरी सेक्टर, चावल, गेहूं और कुछ अन्य कृषि उत्पादों पर भारत ने अपनी सुरक्षा बनाए रखी.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीजिंग दौरे के बाद चीन अमेरिका से सोयाबीन, पोल्ट्री प्रोडक्ट और बीफ खरीदने के लिए तैयार हो गया है. दोनों देशों ने टैरिफों में कटौती के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है. अमेरिका भारत को लंबे समय तक अपने फार्म और डेयरी प्रोडक्ट बेचने की कोशिश में था. इसके लिए भारत पर अपना मार्केट खोलने के लिए दबाव बना रहा था. लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के सामने भारत नहीं झुका. इसलिए ट्रंप ने अब चीन के साथ इसे लेकर ट्रेड करने की तैयारी की है.
पोल्ट्री और खेती सेक्टर्स प्रोडक्ट पर घटेगा टैरिफ
व्हाइट हाउस ने रविवार को घोषणा की कि चीन ने अमेरिका से बीफ और पोल्ट्री का व्यापार बढ़ाने पर सहमति जता दी है. इसके तहत चीन साल 2026 में सालाना 17 अरब डॉलर के प्रोडक्ट खरीदेगा. इसे साल 2027 और 2028 में जारी रखेगा. यह घोषणा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीजिंग में हुई शिखर बैठक से लौटने के दो दिन बाद की गई.
व्हाइट हाउस ने बताया कि चीन अमेरिका के बीफ के लिए अपने बाजार को खोलने के लिए तैयार है. साथ ही उन अमेरिकी राज्यों से पोल्ट्री प्रोडक्ट इंपोर्ट करेगा, जिन्हें अमेरिकी कृषि विभाग ने ‘बर्ड फ्लू-मुक्त’ घोषित किया है.
अमेरिकी किसानों के आगे झुके ट्रंप
ये समझौते अमेरिकी किसानों के लिए कुछ उम्मीद जगाते हैं. ट्रेड वॉर के कारण इन किसानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ा था. ट्रेड वॉर के कारण सोयाबीन और अन्य उत्पादों के एक्सपोर्ट के लिए उनका बड़ा बाजार पूरी तरह से बंद हो गया था. इसके अलावा, किसान ट्रंप प्रशासन की नीतियों के कारण भी काफी नुकसान का सामना कर रहे हैं.
आंकड़े भी किसानों की यही कहानी बताते हैं. अमेरिकन एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2022 में चीन 38 बिलियन डॉलर के अमेरिकी कृषि उत्पाद इंपोर्ट करना था. लेकिन साल 2025 में गिरकर 8 बिलियन डॉलर रह गया. इन आंकड़ों में 2022 में सोयाबीन की लगभग 18 बिलियन डॉलर की खरीदा था, वहीं साल 2025 में ये 3 बिलियन डॉलर रह गया था.
अमेरिकी किसानों के लिए राहत की खबर जरूर है. लेकिन चीन अमेरिकी सोयाबीन किसानों से और कितना खरीदेगा ये अभी तक साफ नहीं है. चीन अमेरिकी सोयाबीन हमेशा से सबसे बड़ा विदेशी खरीदार रहा है. ट्रम्प द्वारा चीनी सामानों पर टैरिफ बढ़ाए जाने के बाद पिछले साल उनकी खरीद पूरी तरह से बंद कर चुका था.
भारत ने नहीं किया था समझौता
भारत ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील में कृषि क्षेत्र को पूरी तरह मुक्त नहीं किया था. कई खेती किसानी सेक्टर को ट्रेड से बाहर रखा गया था. डेयरी सेक्टर, चावल, गेहूं और कुछ अन्य कृषि उत्पादों पर भारत ने अपनी सुरक्षा बनाए रखी. सरकार का तर्क था कि यदि अमेरिकी कृषि उत्पादों को बिना प्रतिबंध भारत में आने दिया जाता, तो छोटे और मध्यम किसानों पर गंभीर असर पड़ेगा.
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