इस सप्ताह हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के तहत अप्रैल में घोषित युद्धविराम को 60 दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया है, ताकि दोनों पक्ष स्थायी शांति समझौते पर बातचीत कर सकें।
समझौते के अनुसार, अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगाया गया अपना प्रतिबंध हटाएगा, जबकि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों और अन्य समुद्री यातायात को गुजरने की अनुमति देगा। अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को हमले शुरू किए जाने के बाद से ईरान ने इस मार्ग को प्रभावी रूप से बाधित कर रखा था।
इस बीच भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ। बुधवार को घरेलू मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 31 पैसे की बढ़त के साथ 94.29 पर कारोबार कर रही थी, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.56 पर बंद हुई थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक और सकारात्मक संकेत विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी में कमी आना है। उनका मानना है कि यह रुझान आगे भी जारी रह सकता है, क्योंकि रुपया लगातार मजबूत हो रहा है और इसमें आगे और मजबूती आने की संभावना है।
विशेषज्ञों ने कहा, “ब्रेंट क्रूड में तेज गिरावट के बाद इसका भाव 79 डॉलर के आसपास आ गया है। साथ ही एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट योजना के जरिए भारत में बड़े पैमाने पर पूंजी प्रवाह की उम्मीद है। इससे रुपए में और मजबूती आ सकती है, जो एफआईआई को बिकवाली से और हतोत्साहित करेगी।”
उन्होंने आगे कहा कि रुपए में और मजबूती की संभावना को देखते हुए एफआईआई फिर से खरीदारी शुरू कर सकते हैं। इससे भारतीय शेयर बाजार को मजबूती मिलने और बाजार में स्थिरता बने रहने की संभावना है।




