हाथ या पैर कट जाए तो…. पहाड़ों वाले तुरंत इस्तेमाल करते हैं यह औषधि, वजह जानकर चौंक जाएंगे, जानिए तरीका


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पिथौरागढ़ और अन्य पहाड़ी इलाकों में काला गन्या एक भरोसेमंद पारंपरिक औषधि के रूप में इस्तेमाल होती है. हाथ या पैर कटने पर इसकी ताजी पत्तियों को मसलकर घाव पर लगाने से खून जल्दी रुकता है, दर्द और जलन कम होती है और घाव जल्दी भरता है. यह अनुभवजन्य ज्ञान पीढ़ियों से पहाड़ों में प्रचलित है और आज भी प्राथमिक उपचार में काम आता है.

पहाड़ों की जिंदगी हमेशा से प्रकृति के साथ जुड़ी रही है. यहां के लोग जंगल, पेड़-पौधों और जड़ी-बूटियों को सिर्फ प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का सहारा मानते हैं. आज भी कई दूर-दराज के गांवों में छोटी-मोटी चोट या बीमारी के लिए लोग अस्पताल जाने से पहले घरेलू और पारंपरिक नुस्खों का ही इस्तेमाल करते हैं. ऐसी ही एक खास और भरोसेमंद पहाड़ी औषधी है काला गन्या, जो खासतौर पर हाथ या पैर कटने पर इस्तेमाल की जाती है.

what is kala ganya

काला गन्या एक जंगली पौधा है, जो पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक रूप से उगता है. यह किसी खेत में उगाई जाने वाली फसल नहीं, बल्कि जंगलों और आसपास के खुले इलाकों में आसानी से मिल जाता है. इसकी पहचान स्थानीय लोगों को अच्छी तरह होती है, क्योंकि यह पीढ़ियों से उनके जीवन का हिस्सा रहा है. इस पौधे की पत्तियां औषधीय गुणों से भरपूर मानी जाती हैं. पहाड़ों में रहने वाले लोग इसके गुणों को अपने अनुभव से जानते हैं, भले ही इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण उन्हें न पता हो. उनके लिए यह एक आजमाया हुआ और भरोसेमंद उपाय है.

why it is used

पहाड़ों में जीवन आसान नहीं होता. यहां की महिलाएं और पुरुष रोजाना खेतों और जंगलों में काम करते हैं. घास काटना, लकड़ी लाना, खेती करना, इन सब कामों में दरांती, कुल्हाड़ी और तेज औजारों का इस्तेमाल होता है. ऐसे में कई बार हाथ या पैर कट जाना आम बात है. पहाड़ी इलाकों में हर जगह तुरंत डॉक्टर या अस्पताल मिलना संभव नहीं होता. ऐसे समय में लोग तुरंत राहत के लिए काला गन्या का उपयोग करते हैं.

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how to use

जब किसी का हाथ या पैर कट जाता है, तो सबसे पहले काला गन्या की ताजी पत्तियां तोड़ी जाती हैं. इन पत्तियों को साफ किया जाता है ताकि मिट्टी या गंदगी हट जाएं. इसके बाद पत्तियों को हल्का सा मसलकर या पीसकर एक तरह का लेप बना लिया जाता है. फिर इस लेप को सीधे घाव पर लगाया जाता है. कुछ लोग पत्तियों को बिना पीसे ही मसलकर घाव पर रख देते हैं और कपड़े या पट्टी से बांध देते हैं. यह प्रक्रिया बहुत आसान होती है और तुरंत की जा सकती है.

benefits

काला गन्या को पहाड़ों में कई कारणों से बेहद उपयोगी माना जाता है. इसे लगाने से खून जल्दी रुकने लगता है, यह घाव को भरने की प्रक्रिया को तेज करता है, इसे लगाने के बाद जलन और दर्द में कमी महसूस होती है और यह घाव को खराब होने से बचाने में मदद करता है. इन्हीं गुणों के कारण यह पहाड़ी लोगों के लिए “पहला इलाज” बन गया है.

traditional belief

काला गन्या का उपयोग कोई नई बात नहीं है. यह एक ऐसा पारंपरिक ज्ञान है, जो दादी-नानी के समय से चला आ रहा है. पहले के समय में जब दवाइयां और अस्पताल इतनी आसानी से उपलब्ध नहीं थे, तब लोग पूरी तरह ऐसे ही प्राकृतिक उपायों पर निर्भर रहते थे. यह ज्ञान किताबों से नहीं, बल्कि अनुभव से सीखा गया है और पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया गया है. आज भी कई गांवों में लोग इसे आधुनिक दवाइयों के साथ-साथ इस्तेमाल करते हैं.

byte of old lady

एक बुजुर्ग पहाड़ी महिला पार्वती देवी बताती हैं, “हम जब भी जंगल या खेत में काम करते हैं, तो काला गन्या हमारे आसपास ही मिल जाता है. अगर हाथ कट जाए, तो तुरंत इसे लगा लेते हैं. इससे खून भी रुक जाता है और जल्दी आराम मिल जाता है. उनका कहना है कि पहले के जमाने में यही हमारी दवा थी. डॉक्टर बहुत दूर होते थे, तब हम इसी पर भरोसा करते थे. आज भी छोटे घाव के लिए काला गन्या बहुत काम आता है.”



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