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दिल्ली से कुछ घंटे की दूरी पर बसा उत्तराखंड का कनाताल मानसून में किसी जन्नत से कम नहीं लगता. बारिश के बाद हरी-भरी पहाड़ियां, घने देवदार के जंगल और बादलों से घिरा आसमान इस जगह की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देते हैं.
कनाताल दिल्ली से करीब 300-320 किलोमीटर दूर है.
अगर आप दिल्ली-NCR की गर्मी और भागदौड़ से दूर इस मानसून किसी शांत पहाड़ी जगह पर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो उत्तराखंड का कनाताल आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है. टिहरी गढ़वाल में बसा यह छोटा सा हिल स्टेशन घने जंगलों, हरी-भरी पहाड़ियों और ठंडे मौसम के लिए जाना जाता है. बारिश के दौरान यहां का प्राकृतिक नजारा और भी खूबसूरत हो जाता है.
मानसून के दौरान कनाताल की पहाड़ियां हरियाली से ढक जाती हैं. आसमान में तैरते बादल, देवदार और चीड़ के पेड़ों से घिरे रास्ते और पहाड़ों पर बहता पानी सफर को खास बना देता है. अगर आपको भीड़भाड़ वाली जगहों के बजाय शांत वातावरण पसंद है, तो कनाताल एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. हालांकि, बारिश के मौसम में पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करते समय सावधानी जरूरी है. भारी बारिश की स्थिति में सड़कें प्रभावित हो सकती हैं, इसलिए निकलने से पहले मौसम और स्थानीय सड़क की स्थिति जरूर जांच लें.
कहां-कहां घूम सकते हैं?
कनाताल में प्रकृति का आनंद लेने के साथ आसपास की कई जगहों को भी एक्सप्लोर किया जा सकता है. यहां से सुरकंडा देवी मंदिर जाना एक लोकप्रिय विकल्प है. यह मंदिर कद्दूखाल क्षेत्र के पास स्थित है और यहां से पहाड़ों के सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं.
इसके अलावा आसपास के जंगलों में वॉक, ट्रेकिंग और कैंपिंग का अनुभव भी लिया जा सकता है. बारिश के बाद जंगलों और पहाड़ियों की हरियाली फोटोग्राफी के लिए भी शानदार बैकग्राउंड देती है.
एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए भी खास
कनाताल सिर्फ सुकून के लिए ही नहीं, बल्कि एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए भी अच्छा डेस्टिनेशन है. मौसम अनुकूल होने पर यहां ट्रेकिंग, कैंपिंग और नेचर वॉक जैसी एक्टिविटीज की जा सकती हैं. मानसून में किसी भी एडवेंचर एक्टिविटी से पहले स्थानीय मौसम और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी लेना जरूरी है.
दिल्ली से कितनी दूर है कनाताल?
कनाताल दिल्ली से करीब 300-320 किलोमीटर दूर है. सड़क मार्ग से यहां पहुंचने में ट्रैफिक और मौसम के आधार पर लगभग 8-10 घंटे लग सकते हैं. दिल्ली से देहरादून या ऋषिकेश तक ट्रेन या बस से पहुंचने के बाद टैक्सी या अन्य स्थानीय वाहन से कनाताल जाया जा सकता है.
कब जाएं?
कनाताल घूमने के लिए अलग-अलग मौसमों में अलग अनुभव मिलता है. मानसून में यहां हरियाली और बादलों का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है, लेकिन भारी बारिश के दौरान यात्रा चुनौतीपूर्ण हो सकती है. अगर आप मानसून में जाने की योजना बना रहे हैं, तो मौसम का पूर्वानुमान और स्थानीय प्रशासन की सलाह जरूर देख लें.
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विविधा सिंह हिंदी डिजिटल पत्रकारिता का उभरता हुआ नाम हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में साढ़े चार साल का अनुभव है. वर्तमान में वह News18 हिंदी में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह लाइफस्टाइल वर्टि…
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