अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड डील होते-होते अचानक टूट गई. खास बात यह है कि अमेरिका ने कनाडा को स्टील, एल्युमिनियम और कारों पर भारी टैरिफ में कटौती का ऑफर दिया था. कनाडा की लकड़ी पर लगा एक टैरिफ हटाने की भी पेशकश की गई थी.
अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर ने कहा कि अगर यह समझौता हो जाता तो कनाडा को अमेरिका के किसी भी दूसरे ट्रेड पार्टनर से ज्यादा फायदे मिलते. लेकिन फिर भी बातचीत शुक्रवार देर रात टूट गई.
आखिर डील टूटी कैसे?
एक हफ्ते तक चली बातचीत में ऐसा लग रहा था कि दोनों देश किसी डील के काफी करीब पहुंच चुके हैं. लेकिन आखिरी दौर में कई मुद्दे एक साथ बड़े विवाद में बदल गए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जुलाई में कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी. अमेरिका चाहता था कि कनाडा ट्रेड से जुड़ी कुछ ऐसी नीतियों में बदलाव करे, जिन्हें अमेरिका चाहता है.
ये टैरिफ 19 अगस्त से लागू होने थे. लेकिन ट्रंप ने समय सीमा बढ़ाकर 22 अगस्त कर दी. उस समय उन्होंने कहा था कि दोनों देश एक डील पर पहुंच गए हैं. सिर्फ कागजी कार्रवाई पूरी होना बाकी है. लेकिन कुछ ही दिनों में यह समझ बनी नहीं रह सकी.
स्टील और एल्युमिनियम पर बड़ी राहत का ऑफर
अमेरिका ने कनाडा को स्टील पर लगने वाले 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 25 प्रतिशत करने का ऑफर दिया था. हालांकि इसके साथ एक शर्त थी. कम टैरिफ का फायदा सिर्फ तय मात्रा में अमेरिका भेजे जाने वाले कनाडाई स्टील को मिलता. इसे टैरिफ-रेट कोटा कहा जाता है.
एल्युमिनियम के मामले में अमेरिका 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 25 प्रतिशत करने को तैयार था. यहां कोई कोटा नहीं रखा जाना था. इसके अलावा स्टील और एल्युमिनियम से बने सामान, जैसे गोल्फ क्लब और बीयर के कैन पर भी टैरिफ में 10 से 25 प्रतिशत तक की कटौती का ऑफर था.
कनाडाई कारों पर भी कम हो सकता था टैरिफ
कनाडा से अमेरिका जाने वाली कारों पर अभी 25 प्रतिशत टैरिफ था. अमेरिके ऑफर के मुताबिक इसमें भी कटौती की जा सकती थी. अगर कार में कुछ मात्रा में अमेरिकी सामान का इस्तेमाल होता, तो कनाडाई कारों पर टैरिफ घटकर करीब 7 प्रतिशत तक आ सकता था.
अमेरिका ने कनाडाई सॉफ्टवुड लंबर यानी लकड़ी पर पिछले साल लगाए गए 10 प्रतिशत टैरिफ को हटाने का भी प्रस्ताव रखा था. इसके अलावा कनाडा के डेयरी उत्पादों, वाइन, हॉकी स्टिक और कुछ दूसरे सामान पर लगाए गए नए 50 प्रतिशत टैरिफ को भी रोकने की पेशकश की गई थी.
फिर कनाडा ने क्यों ठुकरा दिया ऑफर?
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी प्रस्ताव को खराब डील बताया. उन्होंने कहा कि कनाडा अमेरिका की कुछ मांगें मानने को तैयार था, लेकिन बदले में अमेरिका से राहत नहीं मिल रही थी. कनाडा ने अमेरिका से अपने जवाबी टैरिफ हटाने की दिशा में कदम उठाए थे. प्रांतों को अमेरिकी शराब की बिक्री दोबारा शुरू करने के लिए मनाने पर भी सहमति जताई गई थी.
लेकिन ट्रकों के मामले में दोनों देशों के बीच बात नहीं बनी. कनाडा भारी ट्रकों, खासकर पिकअप और सेमी-ट्रकों के लिए ज्यादा राहत चाहता था. कनाडा कारों में अमेरिकी और कनाडाई दोनों देशों की सामग्री के इस्तेमाल पर अतिरिक्त टैरिफ छूट भी चाहता था.
विवाद सिर्फ टैरिफ तक सीमित नहीं रहा
बातचीत के आखिरी दौर में व्यापार के अलावा दूसरे मुद्दे भी सामने आ गए. कार्नी के मुताबिक, अमेरिका ने कनाडा के कल्चर और फ्रेंच भाषा की सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी कुछ रियायतें मांगीं. अमेरिका चाहता था कि कनाडा दूसरे गैर-अमेरिकी देशों से आने वाले कुछ सामान पर लगे टैरिफ भी हटा दे. कनाडा का मानना था कि इसके बदले उसे फायदा नहीं मिल रहा था.
कार्नी ने साफ कहा, “उन्होंने बहुत ज्यादा मांगा और बदले में बहुत कम दिया.” हालांकि अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर ने इस दावे को खारिज किया. उनका कहना था कि अमेरिकी प्रस्ताव कनाडा की मौजूदा बाजार पहुंच को बनाए रखने के साथ उसे और बेहतर बनाता.
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार समझौते की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है. दोनों देश एक-दूसरे के बड़े व्यापारिक साझेदार हैं, इसलिए टैरिफ को लेकर लंबा विवाद दोनों अर्थव्यवस्थाओं पर असर डाल सकता है.




