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गेंदा का फूल न केवल पूजा और सजावट के लिए है, बल्कि यह सेहत का किसी देसी सुपरस्टार से कम नहीं है. हर घर-आंगन में उगने वाला यह आकर्षक फूल त्वचा, बाल, पेट और अन्य कई बीमारियों में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. सदियों से परंपरागत रूप से इसका उपयोग होता आ रहा है. हालांकि, बलिया में इसकी खेती भी खूब होती है. आगे विस्तार से जानिए…
रूसी और बाल झड़ने की समस्या आजकल हर उम्र के लोगों में तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में गेंदा फूल को देसी इलाज का असरदार विकल्प माना जाता है. इसके फूल और पत्तियों का रस स्कैल्प पर लगाने से डैंड्रफ और फंगल इंफेक्शन की समस्या में राहत मिल सकती है. नियमित इस्तेमाल से बाल मजबूत और चमकदार बने रहने में मदद मिलती है. कई लोग गेंदा फूल को नारियल तेल में मिलाकर घरेलू हेयर ऑयल के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं. इसे बालों की देखभाल के लिए प्राकृतिक और बिना साइड इफेक्ट वाला उपाय माना जाता है.

गेंदे के फूल और पत्तियों में एंटीसेप्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा संबंधी समस्याओं में काफी लाभकारी माने जाते हैं. गांवों में आज भी इसके पत्तों को पीसकर फोड़े-फुंसी और छोटे घावों पर पारंपरिक तरीके से लगाया जाता है. इससे सूजन कम होने और घाव जल्दी भरने में मदद मिल सकती है. इसके फूलों का अर्क चेहरे पर लगाने से दाग-धब्बे, झुर्रियां और रूखी त्वचा की समस्या में राहत मिल सकती है. यही वजह है कि अब गेंदे का उपयोग कई ब्यूटी और स्किन केयर प्रोडक्ट्स में भी तेजी से किया जा रहा है.

गेंदे के सूखे फूलों से बनी चाय महिलाओं के लिए भी काफी लाभकारी मानी जाती है. एक्सपर्ट के अनुसार, इसका सेवन मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द और अनियमितताओं में राहत देने में सहायक हो सकता है. इसे पीने से शरीर को आराम और हल्की ऊर्जा की अनुभूति भी हो सकती है. कई महिलाएं चिकित्सक की सलाह के बाद इसे प्राकृतिक हर्बल ड्रिंक के रूप में भी इस्तेमाल करती हैं. बदलते समय में गेंदा फूल की उपयोगिता लगातार बढ़ती जा रही है.
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हालांकि, बलिया के कई इलाकों में गेंदा फूल की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. बरसात और गर्मी के मौसम में जब मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है, तब यह पौधा बचाव में मददगार माना जाता है. इसकी तेज गंध मच्छरों को दूर भगाने का काम करती है. यही वजह है कि कई लोग अपने घरों और बगीचों में गेंदा का पौधा लगाते हैं, ताकि मच्छर कम आएं. केमिकल वाले उत्पादों के बीच गेंदा फूल को एक सुरक्षित और देसी उपाय के रूप में सदियों से इस्तेमाल किया जाता रहा है.

गेंदे की पत्तियां केवल सजावट के लिए ही नहीं, बल्कि दर्द से राहत देने में भी लाभकारी मानी जाती हैं. कान दर्द होने पर इसकी हरी पत्तियों का रस हल्का गुनगुना करके इस्तेमाल करने से आराम मिल सकता है. वहीं इसकी पत्तियों को चबाने से मसूड़ों की सूजन और दांत दर्द में भी राहत मिलने की बात कही जाती है. आज भी कई घरों में दादी-नानी इसे घरेलू नुस्खे के रूप में इस्तेमाल करती हैं. आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर यह पौधा छोटे-मोटे संक्रमणों से बचाव में भी सहायक माना जाता है.

खासतौर पर बलिया में अब किसान गेंदा फूल की खेती को लेकर काफी जागरूक हो रहे हैं. सहरसपाली, मैरिटाड और रसड़ा समेत कई इलाकों में किसान गेंदा की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. शादी-विवाह, त्योहार, धार्मिक कार्यक्रमों और अन्य आयोजनों में इसकी मांग सबसे अधिक रहती है. इसके अलावा आयुर्वेदिक कंपनियां और ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियां भी बड़े पैमाने पर गेंदे का उपयोग कर रही हैं. यही कारण है कि इसकी खेती लगातार तेजी से बढ़ती जा रही है.

गेंदे के फूलों की हर्बल चाय बनाकर सेवन किया जाए, तो पाचन क्रिया बेहतर हो सकती है. राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, गेंदे की चाय पीने से पेट दर्द, गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है. गांवों में पुराने समय से लोग इसे घरेलू नुस्खे के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे हैं. यह शरीर को ठंडक पहुंचाने में भी सहायक माना जाता है.

गेंदा फूल केवल रंग और खुशबू का प्रतीक ही नहीं, बल्कि सेहत और प्राकृतिक उपचार का भरोसेमंद साथी भी माना जाता है. लगभग हर घर के आंगन में आसानी से उगने वाला यह फूल कई समस्याओं में लाभकारी और गुणकारी माना जाता है. दादी-नानी के पारंपरिक नुस्खों से लेकर आधुनिक हर्बल उत्पादों तक, गेंदा अपनी खास पहचान बना चुका है. प्राकृतिक गुणों से भरपूर यह फूल आने वाले समय में घरेलू उपचार और हर्बल चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है.





