2 हजार साल पुरानी अजंता की गुफाएं आज भी करती हैं दुनिया को हैरान, कला और वास्तुकला का अद्भुत नमूना


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Ajanta Caves Architecture: हज़ारों साल पुरानी अजंता की गुफ़ाएं आज भी दुनिया को हैरान करती हैं, ये कला और वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना हैं. भारत अपनी प्राचीन सभ्यता, ऐतिहासिक विरासत और शानदार वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है…

Ajanta Caves Architecture: 2000 साल पुरानी अजंता की गुफाएं आज भी दुनिया को हैरान करती हैं और कला व वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण हैं. भारत अपनी प्राचीन सभ्यता, ऐतिहासिक धरोहरों और बेहतरीन वास्तुकला के लिए दुनिया भर में मशहूर है. इन्हीं अनमोल धरोहरों में से एक हैं महाराष्ट्र के औरंगाबाद इलाके के पास स्थित अजंता की गुफाएं. लगभग 2,000 साल पुरानी ये गुफाएं भारतीय कला, वास्तुकला और बौद्ध संस्कृति का अद्भुत उदाहरण मानी जाती हैं. चट्टानों को काटकर बनाई गई इन गुफाओं का निर्माण और इनकी दीवारों पर बनी पेंटिंग्स आज भी पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं…

अजंता की गुफाएं कब और कैसे बनीं?: अजंता की गुफाएं अलग-अलग समय में बनाई गई थीं. यहां की सबसे पुरानी बौद्ध गुफाएं दूसरी और पहली सदी ईसा पूर्व की मानी जाती हैं. इसके बाद, अलग-अलग समय पर खासकर वाकाटक काल के दौरान कई शानदार और नक्काशीदार गुफाएं बनाई गईं. इस तरह, अजंता की गुफाएं भारतीय इतिहास के अलग-अलग दौर की कला और संस्कृति को दिखाती हैं.

अजंता की गुफाएं अपनी बौद्ध धार्मिक कला के लिए मशहूर हैं. यहां भगवान बुद्ध के जीवन और जातक कथाओं के दृश्यों को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है. दीवारों और छतों पर बनी पेंटिंग उस समय के लोगों के जीवन, पहनावे, गहनों और सामाजिक हालात की झलक दिखाती हैं. इन पेंटिंग की खासियतें हैं इनके बारीक डिज़ाइन, भावनाओं का असरदार चित्रण और रंगों का शानदार इस्तेमाल. इसी वजह से, भारतीय पेंटिंग के इतिहास में अजंता की कला का बहुत अहम स्थान है.

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अजंता की गुफाएं सीधे पहाड़ की चट्टानों को काटकर बनाई गई थीं. इनमें चैत्य-गृह (प्रार्थना कक्ष) और विहार (मठ) जैसी संरचनाएं हैं. बड़े-बड़े खंभे, बुद्ध की मूर्तियां, प्रार्थना की जगहें और बारीक वास्तुकला उस समय के कारीगरों के अद्भुत हुनर ​​को दिखाती हैं.

ये गुफाएं सिर्फ़ धार्मिक रीति-रिवाजों के लिए ही नहीं, बल्कि बौद्ध भिक्षुओं के रहने, पढ़ाई करने और ध्यान लगाने की जगहों के तौर पर भी बनाई गई थीं. उस समय यह जगह बौद्ध समुदाय के धार्मिक और बौद्धिक जीवन का एक अहम केंद्र थी.

अजंता की गुफाओं को 1983 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया था. इनकी कलात्मक और ऐतिहासिक अहमियत ने न सिर्फ़ भारत में, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में कला के रूपों को प्रभावित किया है.

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