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Places to Visit Near Nainital: नैनीताल की भीड़भाड़ और शोर से दूर अगर आप पहाड़ों में किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहां चारों तरफ घने जंगल, पक्षियों की आवाज और सुकून भरा माहौल हो, तो महेशखान आपको पसंद आ सकता है. नैनीताल से करीब 21 किलोमीटर दूर यह जगह अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, पुराने ऐतिहासिक भवन और समृद्ध जैव विविधता के लिए खास पहचान रखती है. यहां पहुंचकर आपको पहाड़ों का एक ऐसा शांत रूप देखने को मिलता है, जो आम पर्यटन स्थलों से काफी अलग है. जानिए इस शांत और खूबसूरत जगह में ऐसा क्या है, जो इसे प्रकृति प्रेमियों के लिए खास बनाता है.
नैनीताल की भीड़भाड़ और शोर से अलग अगर आप प्रकृति के बीच सुकून तलाश रहे हैं, तो महेशखान एक शानदार ठिकाना है. नैनीताल से करीब 21 किलोमीटर दूर और भवाली के पास घने जंगलों के बीच बसा यह इलाका शांत वातावरण, खूबसूरत पहाड़ों और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है. यहां पहुंचते ही शहर की भागदौड़ पीछे छूट जाती है और चारों तरफ सिर्फ जंगल, पक्षियों की आवाज और पहाड़ी सुकून महसूस होता है.
समुद्र तल से करीब 2085 मीटर की ऊंचाई पर स्थित महेशखान भवाली-रामगढ़ रोड से लगभग पांच किलोमीटर अंदर घने वन क्षेत्र में मौजूद है. नैनीताल से करीब 21 और हल्द्वानी से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी इसे आसानी से पहुंचने वाला, लेकिन भीड़ से दूर पर्यटन स्थल बनाती है. यहां का शांत वातावरण उन लोगों को खास पसंद आता है, जो पहाड़ों में प्रकृति के करीब कुछ समय बिताना चाहते हैं.
महेशखान का सबसे बड़ा आकर्षण यहां मौजूद ब्रिटिश काल का पुराना फॉरेस्ट रेस्ट हाउस यानी डाक बंगला है. करीब 1911 के आसपास बना यह भवन आज भी अपने पुराने स्वरूप की झलक दिखाता है. घने जंगल के बीच खड़ा यह ऐतिहासिक भवन महेशखान के बीते दौर की कहानी सुनाता नजर आता है. छिटपुट मरम्मत के बावजूद इसकी वास्तुकला और वातावरण आज भी पर्यटकों को आकर्षित करता है.
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महेशखान का संबंध महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर से भी जोड़ा जाता है. यहां मौजूद टैगोर प्वाइंट पर्यटकों के लिए खास आकर्षण है. माना जाता है कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने यहां प्रवास के दौरान अपनी रचनाओं पर काम किया था. इसी साहित्यिक विरासत के कारण महेशखान बंगाली पर्यटकों के बीच भी खास लोकप्रिय रहा है. जंगल की शांति और साहित्य का यह मेल इस जगह को और खास बनाता है.
महेशखान को पक्षी प्रेमियों के लिए बेहद समृद्ध क्षेत्र माना जाता है. यहां पहाड़ी बुलबुल, घुघुती, फ्लाईकैचर, ओरियल और कठफोड़वा समेत कई प्रजातियों के पक्षी देखने को मिलते हैं. जंगल में पक्षियों की चहचहाहट यहां आने वाले पर्यटकों के अनुभव को खास बना देती है. यही वजह है कि बर्ड वॉचिंग और प्रकृति अध्ययन के लिए महेशखान को उत्तराखंड के महत्वपूर्ण ईको-टूरिज्म क्षेत्रों में शामिल किया गया है.
महेशखान की खूबसूरती यहां के घने जंगलों में छिपी है. रास्ते में बांज, बुरांश, अंयार, तिलौंज, खरसू, काफल, चीड़ और देवदार के पेड़ दिखाई देते हैं. जंगली फर्न की कई किस्में भी यहां की जैव विविधता को समृद्ध बनाती हैं. मानसून में जंगल की हरियाली देखते ही बनती है, पेड़ों से टपकती बारिश की बूंदें और धुंध से ढकी पहाड़ियां इस जगह को और भी ज्यादा खूबसूरत बनाती है.
महेशखान सिर्फ हरियाली और पक्षियों के लिए ही खास नहीं है, बल्कि यहां जंगल में कई वन्यजीवों की मौजूदगी भी देखने को मिलती है. गुलदार, तेंदुआ, भालू और जंगली सुअर जैसे वन्यजीव इस क्षेत्र के जंगलों में पाए जाते हैं. वहीं सांभर, घुरल, कांकड़ और साही जैसे जीव भी यहां की जैव विविधता का हिस्सा हैं. हालांकि वन क्षेत्र में घूमते समय सुरक्षा और वन विभाग के नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है.
अगर आपको प्रकृति के बीच पैदल घूमना पसंद है तो महेशखान बेहतरीन विकल्प हो सकता है. घने जंगलों के बीच नेचर वॉक और ट्रैकिंग के दौरान पेड़-पौधों, पक्षियों और पहाड़ी वातावरण को करीब से महसूस किया जा सकता है. यहां आधुनिक पर्यटन की चकाचौंध बेहद कम है, इसलिए यह जगह शांतिपूर्ण अनुभव देती है. परिवार और दोस्तों के साथ प्रकृति के बीच समय बिताने के लिए भी महेशखान यादगार जगह बन सकता है.
महेशखान में पुराने डाक बंगले के अलावा बांस से बने कॉटेज भी पर्यटकों को अलग अनुभव देते हैं. यहां आधुनिक सुविधाओं की भरमार नहीं है और रात के समय सौर ऊर्जा से सीमित रोशनी की व्यवस्था के बीच प्रकृति के साथ रहने का अनुभव मिलता है. यही सादगी महेशखान को आम पर्यटन स्थलों से अलग बनाती है. यहां ठहरना शहर की सुविधाओं से दूर रहकर पहाड़ी जंगलों की शांति महसूस करने जैसा अनुभव देता है.




