Agency:एजेंसियां
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57 वर्षीय टोनी कैरुथर्स को 1994 में हुए ट्रिपल मर्डर और किडनैपिंग केस में दोषी ठहराया गया था. गुरुवार को उसे मौत की सजा दी जानी थी, लेकिन इंजेक्शन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी दिक्कत आने से पूरा ऑपरेशन रोकना पड़ा. टेनेसी जेल विभाग के मुताबिक मेडिकल टीम ने प्राथमिक IV लाइन तो लगा दी थी, लेकिन बैकअप लाइन के लिए दूसरी नस नहीं मिल सकी. नियमों के अनुसार लीथल इंजेक्शन प्रक्रिया में बैकअप लाइन अनिवार्य होती है.
57 वर्षीय टोनी कैरुथर्स को 1994 में हुए ट्रिपल मर्डर और किडनैपिंग केस में दोषी ठहराया गया था.
अमेरिका के टेनेस्सी प्रांत में एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां मौत की सजा पाए एक कैदी की सजा ऐन वक्त पर टाल दी गई. यहां अधिकारियों को जहरीला इंजेक्शन देने के लिए उसकी दूसरी नस ही नहीं मिल पाई, जिस कारण तय प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और आखिरकार सजा रोकनी पड़ी.
57 वर्षीय टोनी कैरुथर्स को 1994 में हुए ट्रिपल मर्डर और किडनैपिंग केस में दोषी ठहराया गया था. गुरुवार को उसे मौत की सजा दी जानी थी, लेकिन इंजेक्शन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी दिक्कत आने से पूरा ऑपरेशन रोकना पड़ा. टेनेसी जेल विभाग के मुताबिक मेडिकल टीम ने प्राथमिक IV लाइन तो लगा दी थी, लेकिन बैकअप लाइन के लिए दूसरी नस नहीं मिल सकी. नियमों के अनुसार लीथल इंजेक्शन प्रक्रिया में बैकअप लाइन अनिवार्य होती है.
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, विभाग ने बयान में कहा कि प्रोटोकॉल के तहत ‘सेंट्रल लाइन’ डालने की कोशिश भी की गई, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई. इसके बाद अधिकारियों ने फांसी की प्रक्रिया रोकने का फैसला लिया. इस घटना के तुरंत बाद कैरुथर्स के वकीलों ने अदालत में आपात याचिका दाखिल कर फांसी टालने की मांग की. इसके बाद बिल ली ने हस्तक्षेप करते हुए एक साल की राहत दे दी. अब अगले एक साल तक कैरुथर्स को फांसी नहीं दी जाएगी.
राहत की खबर मिलते ही कैरुथर्स की वकील मारिया डेलिबेराटो भावुक हो गईं. मीडिया से बात करते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए. उन्होंने कहा, ‘यह अविश्वसनीय है… मैं बेहद आभारी हूं.’
इस घटना के बाद अमेरिका में मौत की सजा और लीथल इंजेक्शन प्रक्रिया को लेकर बहस फिर तेज हो गई है. मृत्युदंड विरोधी संगठन Tennesseans for Alternatives to the Death Penalty की निदेशक स्टेसी रेक्टर ने कहा कि यह घटना ‘डरावनी जरूर है, लेकिन हैरान करने वाली नहीं.’ उन्होंने दावा किया कि लंबे समय से लीथल इंजेक्शन प्रणाली में गंभीर खामियों की ओर ध्यान दिलाया जा रहा था.
कैरुथर्स को 1994 में मार्सेलस एंडरसन, उनकी मां डेलॉयस एंडरसन और फ्रेड्रिक टकर की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था. हालांकि उनके वकीलों का दावा है कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया और मामले में डीएनए सबूतों की दोबारा जांच होनी चाहिए.
इस केस ने हाल के दिनों में तब और सुर्खियां बटोरीं, जब अमेरिकी मीडिया हस्ती किम कर्दाशियां ने भी कैरुथर्स के समर्थन में आवाज उठाई. उन्होंने सोशल मीडिया पर लोगों से अपील की थी कि डीएनए जांच पूरी होने तक फांसी रोकी जाए.
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साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें





