वॉशिंगटन: जिस देश में आपने सालों पसीना बहाया, टैक्स दिया और अपना घर बसाया, वही देश अचानक एक रात आपसे कह दे कि ‘अपना बोरिया-बिस्तर समेटो और दफा हो जाओ’? अमेरिका में नौकरी कर रहे सैकड़ों भारतीय प्रोफेशनल्स के साथ कुछ ऐसा ही होने वाला था. अमेरिकी इमिग्रेशन डिपार्टमेंट (USCIS) ऐसा कांड कर दिया था कि लग रहा था कि लाखों भारतीय आईटी एक्सपर्ट्स की किस्मत पर हमेशा के लिए ताला लग जाएगा. हालांकि, फिर कुछ ऐसा हुआ जो इतना सख्त सरकारी नियम अचानक पलट गया. अमेरिकी प्रशासन को घुटनों पर आना पड़ा है और उसने इस नियम में दो ऐसे बड़े बदलाव कर दिए हैं, जिसने रातों-रात प्रवासियों को संजीवनी मिल गई है.
क्या था USCIS का तगड़ा पॉलिसी मेमो?
दरअसल, हाल ही में USCIS ने एक नया कड़ा पॉलिसी मेमो जारी किया था, जिसने रातों-रात प्रवासियों के बीच हड़कंप मचा दिया था. इसके तहत अमेरिका में अस्थाई वीजा जैसे H-1B, स्टूडेंट या टूरिस्ट वीजा पर रह रहे लोगों को देश के भीतर रहते हुए अपना स्टेटस अपग्रेड कराने यानी सीधे ग्रीन कार्ड पाने पर लगभग पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई थी.
इस नए फरमान में साफ कहा गया था कि वीजा खत्म होते ही हर किसी को अपने देश वापस लौटना होगा और भारत जैसे अपने होम कंट्री के अमेरिकी दूतावास के जरिए ही नए सिरे से ग्रीन कार्ड की लाइन में लगना पड़ेगा. इस नियम से उन भारतीयों के पैरों तले जमीन खिसक गई थी जो सालों से अमेरिका में नौकरी कर रहे हैं और ग्रीन कार्ड की कतार में हैं लेकिन अब मचे बवाल के बाद इस नियम को नर्म कर दिया गया है.
बवाल के बाद झुका USCIS, किए 2 बड़े बदलाव
इस फैसले के बाद अमेरिका के टेक सेक्टर और विदेशी प्रोफेशनल्स के बीच हाहाकार मच गया था, जिसके बाद खुद वाशिंगटन के अधिकारियों को तुरंत सफाई और राहत का रास्ता निकालना पड़ा. एजेंसी के प्रवक्ता जैक केहलर ने एक बयान जारी कर दो नए अपवादों की घोषणा की है.
इकोनॉमिक बेनिफिट (आर्थिक लाभ): अगर किसी विदेशी नागरिक की अमेरिका में मौजूदगी से वहां की अर्थव्यवस्था को फायदा हो रहा है तो उसे देश छोड़ने की जरूरत नहीं होगी.
नेशनल इंटरेस्ट (राष्ट्रीय हित): यदि किसी प्रोफेशनल का काम अमेरिकी राष्ट्र के हित या वहां की सुरक्षा से जुड़ा है, तो उसे भी इस कड़े नियम से पूरी छूट मिलेगी.
H-1B वीजा वाले भारतीयों के लिए क्यों है बहुत बड़ी राहत?
ये ढील सबसे ज्यादा भारतीय प्रोफेशनल्स, खासकर H-1B वीजा धारकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.
10 से 15 साल का लंबा इंतजार: अमेरिका में EB-2 और EB-3 कैटेगरी के तहत ग्रीन कार्ड पाने के लिए भारतीयों को पहले से ही 10 से 15 साल की लंबी वेटिंग लिस्ट का सामना करना पड़ता है.
देश छोड़ने का सता रहा था डर: पुराने नियम के बाद ये डर बैठ गया था कि सालों से अमेरिका में टैक्स भर रहे और वहां घर बसा चुके लोगों को अचानक भारत लौटना पड़ेगा और पूरी प्रोसेसिंग भारत से करानी होगी.
अब क्या होगा सीधा फायदा: इस नए सुधार के बाद उम्मीद जगी है कि भारत के स्किल्ड आईटी वर्कर्स, रिसर्चर्स, टेक प्रोफेशनल्स और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोग अब अमेरिका में ही रहकर अपनी नौकरी जारी रख सकेंगे और उनका ‘एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस’ पहले की तरह आराम से चलता रहेगा.





