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Warning Sign of Arthritis: वैसे तो गठिया की बीमारी बुढ़ापे में ज्यादा कॉमन होती है, लेकिन खानपान और जीवनशैली की खराब आदतों के कारण कम उम्र में भी लोग को ये बीमारी हो रही है. यदि आपको भी इसके लक्षणों को नहीं जानते हैं, तो यहां एक्सपर्ट से इसके शुरुआती संकेत और इलाज के बारे में जान सकते हैं.
बहुत से लोग महीनों या सालों तक जोड़ों में दर्द, अकड़न और थकान महसूस करते हैं, लेकिन इसे बढ़ती उम्र, काम का दबाव या सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. यदि आप भी ऐसा कर रहे हैं, तो ये लेख आपके लिए एक चेतावनी है. क्योंकि कई बार ये आर्थराइटिस यानी गठिया के शुरुआती संकेत हो सकते हैं.
नई दिल्ली स्थित बी एल के मैक्स हॉस्पिटल में जॉइंट रिप्लेसमेंट प्रोग्राम के सीनियर डायरेक्टर डॉ ईश्वर बोहरा ने बताया कि आर्थराइटिस कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि जोड़ों में सूजन और नुकसान से जुड़ी कई समस्याओं का समूह है. ये दो प्रकार के होते हैं- ऑस्टियोआर्थराइटिस, जो जोड़ों के घिसने से होता है, और रूमेटॉइड आर्थराइटिस, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही जोड़ों पर हमला करने लगती है. इसका इलाज लक्षणों की गंभीरता के आधार पर किया जाता है, इसलिए शुरुआती संकेतों को समझना बहुत जरूरी होता है.
गठिया के शुरुआती लक्षण
इस बीमारी का एक शुरुआती संकेत सुबह के समय जोड़ों में अकड़न होना है. अगर उठने के बाद आधे घंटे तक हाथ, घुटने या उंगलियां ठीक से न चलें, तो यह सिर्फ थकान नहीं बल्कि सूजन वाले आर्थराइटिस का लक्षण हो सकता है. कई लोगों को मुट्ठी बंद करने या सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होने लगती है.
लगातार रहने वाली थकान भी गठिया का संकेत हो सकती है. सामान्य थकान आराम करने से ठीक हो जाती है, लेकिन आर्थराइटिस से जुड़ी थकान लंबे समय तक बनी रहती है. अच्छी नींद के बाद भी व्यक्ति थका हुआ महसूस कर सकता है. ऐसा शरीर में लगातार बनी रहने वाली सूजन के कारण होता है, जो ऊर्जा के स्तर को प्रभावित करती है. कभी-कभी हल्का बुखार, बदन दर्द या जोड़ों में गर्माहट भी महसूस हो सकती है.
कुछ लोगों को जोड़ों के आसपास झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होता है. वे इसे विटामिन की कमी या गलत बैठने का असर समझते हैं, लेकिन असल में सूजन नसों पर दबाव डाल सकती है. रूमेटॉइड आर्थराइटिस में कलाई की सूजन से कार्पल टनल सिंड्रोम जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं.
रात में हल्का लेकिन लगातार दर्द होना और नींद बार-बार टूटना भी गठिया का संकेत हो सकता है. समय के साथ नींद की कमी और दर्द दोनों बढ़ते जाते हैं.
क्या है इलाज?
डॉक्टर बताते हैं कि अगर बीमारी का इलाज शुरुआती महीनों में शुरू हो जाए, तो जोड़ों को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है. देर होने पर जोड़ों में टेढ़ापन और स्थायी विकलांगता का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन, अकड़न या बिना वजह थकान को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉक्टर की सलाह लेकर ब्लड टेस्ट और जांच करवाना जरूरी है. सही इलाज, व्यायाम, फिजियोथेरेपी और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आर्थराइटिस को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.
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शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.





