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झारखंड के पलामू जिले का कुंदरी स्थित ऐतिहासिक लाह बगान इन दिनों अपनी अद्भुत प्राकृतिक खूबसूरती के कारण लोगों को आकर्षित कर रहा है. करीब 421 एकड़ में फैले इस विशाल क्षेत्र में तीन लाख से अधिक पलाश के पेड़ वसंत ऋतु में लाल और नारंगी फूलों से लदकर ऐसा दृश्य पेश करते हैं, मानो पूरा जंगल आग की लपटों में चमक रहा हो, इसी वजह से इसे ‘फायर फॉरेस्ट’ कहा जाता है. यह नजारा न सिर्फ पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र है, बल्कि औषधीय गुणों और स्थानीय आजीविका के लिहाज से भी इस क्षेत्र की अहमियत लगातार बढ़ती जा रही है. रिपोर्ट- शशिकांत ओझा
झारखंड के पलामू जिले का कुंदरी स्थित ऐतिहासिक लाह बगान इन दिनों अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के कारण चर्चा में है. करीब 421 एकड़ में फैले इस विशाल क्षेत्र में तीन लाख से अधिक पलाश के पेड़ मौजूद हैं, जो वसंत ऋतु आते ही लाल और नारंगी फूलों से लद जाते हैं.

फरवरी से मार्च के बीच यहां का नजारा इतना आकर्षक हो जाता है कि इसे ‘फायर फॉरेस्ट’ यानी आग जैसा दिखने वाला जंगल कहा जाता है. यह नजारा बेहद खास होता है. पलामू का कुंदरी लाह बगान न सिर्फ झारखंड, बल्कि पूरे एशिया में अपनी तरह का सबसे बड़ा माना जाता है. दूर-दूर से लोग इस अद्भुत दृश्य को देखने पहुंचते हैं.

इस बगान में चारों ओर फैले पलाश के फूल मानो धरती पर लाल कालीन बिछा देते हैं, जो पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों को खासा आकर्षित करता है. हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में पलाश के पेड़ों की संख्या और भी बढ़ी है, जिससे इसकी सुंदरता और महत्व दोनों में इजाफा हुआ है. पलामू में बहुत संख्या में पलाश के पेड़ पाए जाते हैं.
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एक्सपर्ट डॉ० डी एस श्रीवास्तव ने लोकल 18 को बताया कि पलाश का पेड़ केवल सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है. वन विशेषज्ञ डॉ. डी.एस. श्रीवास्तव बताते हैं कि पलाश के फूल और अन्य हिस्सों में कई महत्वपूर्ण औषधीय तत्व पाए जाते हैं. खासकर इसके बीज और छाल से बनने वाली दवाएं पेट के कीड़ों को खत्म करने में कारगर मानी जाती हैं. इसमें पिपराजिन साइट्रेट जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो पेट से जुड़ी कई समस्याओं के उपचार में सहायक होते हैं.

उन्होंने कहा कि इसके अलावा पलाश के फूलों का उपयोग सजावटी सामग्री बनाने में भी किया जाता है. फूलों को सुखाकर रंगीन डेकोरेशन आइटम तैयार किए जाते हैं, जो बाजार में भी अच्छी कीमत पर बिकते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इन फूलों का उपयोग पारंपरिक रंग बनाने में भी करते हैं, खासकर होली के समय इसका महत्व बढ़ जाता है.

लाह बगान क्षेत्र पहले से ही लाह उत्पादन के लिए प्रसिद्ध रहा है, लेकिन अब पलाश के फूलों के कारण यह पर्यटन का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है. स्थानीय प्रशासन और वन विभाग अगर इसे और विकसित करें, तो यह क्षेत्र इको-टूरिज्म के रूप में नई पहचान बना सकता है.

उन्होंने कहा कि कुंदरी का यह लाह बगान प्रकृति की अनमोल धरोहर है, जहां हर साल वसंत ऋतु में ‘फायर फॉरेस्ट’ का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. यह न सिर्फ पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय का भी एक बड़ा स्रोत बन सकता है. अभी गर्मी के मौसम में सबसे खास तौर पर कुंदरी लाल बगान देखने लायक है.





