राजस्थान का ‘केदारनाथ’ बना टूरिस्ट हॉटस्पॉट, मई में दिख रही जुलाई जैसी हरियाली, खींचे चले आ रहे पर्यटक


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Sikar Best Tourist Spot: सीकर जिले का हर्ष पर्वत इस बार मई में हुई बारिश के बाद हरियाली से ढक गया है. पिछले साल जून तक सूखे रहने वाली यह पहाड़ी अब जुलाई जैसा नजारा पेश कर रही है. 3100 फीट ऊंचाई पर स्थित हर्षनाथ मंदिर, ठंडी हवाएं, बादलों से घिरी वादियां और विशाल पवन चक्कियां पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं. खाटूश्याम जी और जीण माता के पास होने से यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. बारिश के बाद मौसम सुहावना होने से हर्ष पर्वत अब लोगों के लिए पसंदीदा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन गया है.

इस बार मई में हुई बारिश के कारण शेखावाटी के सबसे ऊंचे हर्ष पर्वत पर नजारा बिल्कुल उलट है. इसी पहाड़ पर पिछले साल जून के अंत तक सूखा और सन्नाटा पसरा था. वहां इस बार शुरुआत में ही जुलाई जैसी हरियाली हो गई है. हर्ष की पहाड़ी पर आने वाले पर्यटकों के लिए यहां का मौसम सुकून देने वाला हो गया है. यहां पर्यटकों की संख्या भी बढ़ने लगी है. खाटूश्याम जी और जीण माता के पास होने के कारण यहां सालभर पर्यटक आते हैं.

हर्ष पर्वत

हर्ष पर्वत की ऊपर विशालकाय पवन चक्कियां हैं दूर से इन्हें देखने पर यह बहुत सुंदर नजर आती है. जैसे-जैसे इनके पास जाते हैं वैसे-वैसे नजारा और भी अधिक सुंदर होता जाता है. प्रकृति की गोद में मौजूद हर्षनाथ का मंदिर बहुत शानदार जगह है. 3100 फीट ऊंचाई से सूरज को उगते और डूबते देखना अपने आप में बेहद शानदार अनुभव है, जो पूरी जिंदगी भर याद रहता है. लहरदार सड़कों से लॉन्ग ड्राइव के लिए यह जगह बहुत एकदम परफेक्ट डेस्टिनेशन प्वाइंट है. बरसात के दिनों में यहां का नजारा और भी अधिक सुंदर रहता है.

हर्ष पर्वत

आपको बता दें कि सीकर जिले में स्थित हर्ष पर्वत को राजस्थान का केदारनाथ कहा जाता है. यहां पर भगवान शिव की हजारों साल प्राचीन मूर्ति स्थापित है. चारों और पहाड़ों के बीच 3100 फीट को ऊंचाई पर बने इस मंदिर की यात्रा बहुत खास रहती है. पहाड़ की खड़ी चढ़ाई, गहरी घाटियां और ऊंचाई पर भगवान शिव का चमत्कारी मंदिर भक्तों को केदारनाथ जैसा अनुभव देता है. पूजा के अलावा घूमने के मकसद से भी पर्यटक यहां पर भारी संख्या में आते हैं. बारिश के समय चारों ओर बादलों से पर्वत पर्यटकों के लिए पहली पसंद है बन जाता है.

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हर्ष पर्वत

पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती दबाव के कारण हुई बारिश ने अपना असर से पहाड़ियों की दरारों और पत्थरों के बीच अब मखमली घास उग आई है. प्री-मानसून के साथ बारिश के मौसम यानी जुलाई में जो फूटान पेड़ों पर दिखती है, वह इस बार कड़कड़ाती धूप वाले मई महीने में ही नजर आने लगी है. मई की बारिश का सबसे बड़ा फायदा हर्ष सेंचुरी क्षेत्र के वन्यजीवों को हुआ है. वहीं पहाड़ी क्षेत्र में बारिश के साथ हरियाली बढ़ने से तापमान भी संतुलित हुआ है.

हर्ष पर्वत

सावन के मौसम में इस मंदिर में भक्तों की संख्या बढ़ जाती है. चारों तरफ हरियाली और बीच में एक चमत्कारी मंदिर को देखने के लिए लोग दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हरियाणा सहित दूर से आते हैं. यह जगह राजस्थान की बेस्ट टूरिस्ट प्वाइंट में से एक है. हजारों साल पुराने कई मंदिर, विशालकाय पवन चकिया, गहरी घाटियां, सूर्य उदय और सूर्य अस्त का दृश्य और और यहां की ड्राइविंग अपने आप पर एक उम्दा अनुभव है. इसी अनुभव का एहसास के लिए हजारों लोग यहां पर पहुंचते हैं.

हर्ष पर्वत

हर्ष पर्वत खाटूश्याम जी से मात्र 40 किलोमीटर दूरी पर स्थित है. इसलिए खाटूश्याम जी के दर्शन करने के बाद भक्त आसानी से यहां पर जा सकते हैं. यह एक हिस्टोरिकल टूरिस्ट पॉइंट है. इस पर्वत पर मौजूद शिव मंदिर को औरंगज़ेब की सेना ने तहस-नहस कर दिया था. इसके प्रमाण आज भी इस जगह पर जाकर देखा जा सकता है. इसी हर्ष पर भगवान गणेश की विश्व की एकमात्र अर्द्धनारीश्वर भगवान गणेश की मूर्ति है जिसे गणेशी अवतार भी कहा गया है. इसके अलावा यहां भगवान शंकर का सफेद शिवलिंग और पंचमुखी शिवलिंग मौजूद है. यहां पर दर्जनों मूर्तियां है जो 1048 साल पुरानी है.

हर्ष पर्वत

आपको बता दें कि सीकर और आस-पास के जिलों से हर्ष पहाड़ी पर पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए ये सुखद है. हर्ष भ्रमण के लिए आ रहे पर्यटकों का कहना है कि मई में हुई बारिश के बाद पहाड़ी का क्लाइमेट सुकून देने वाला हो गया है. खास बात ये है कि बारिश के बाद मौसम अनुकूल रहने से हर्ष भ्रमण के लिए आने वाले लोगों की संख्या में भी इजाफा हुआ है. यहां रोज मई के महीने में भी बड़ी संख्या में विभिन्न स्थानों के पर्यटक पहुंचने लगे हैं.

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