अमेरिका ने ईरान के सभी बंदरगाहों का गला घोंटते हुए वहां जाने वाले हर जहाज की सख्त नौसैनिक नाकेबंदी कर रखी है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना ने अब तक 67 कमर्शियल जहाजों का रास्ता जबरन बदलवाया है और बीच समंदर ईरान के 4 सैन्य जहाजों को नेस्तनाबूद कर दिया है.
2. ईरान का पलटवार: बच्चों को बना दिया ‘मानव बम’, हाथों में थमाई AK-47
दूसरी तरफ, अमेरिकी हमलों से बुरी तरह घायल ईरान इस वक्त अपने सैनिकों की भारी कमी से छटपटा रहा है. सैनिकों की कमी को पूरा करने के लिए उसने अपने ही देश के मासूमों को दांव पर लगा दिया है. ईरान के इस खौफनाक कदम ने पूरी दुनिया के रोंगटे खड़े कर दिए हैं.
‘होमलैंड-डिफेंडिंग’ की आड़ में बच्चों का सौदा: ईरान ने ‘होमलैंड-डिफेंडिंग कॉम्बेटेंट्स फॉर ईरान’ नाम से एक जबरन भर्ती मुहिम छेड़ रखी है. इसके तहत महज 12 साल और उससे ऊपर के मासूम बच्चों को वॉलेंटिर के नाम पर घरों से खींचकर मस्जिदों और बसीज सैन्य अड्डों पर बारूद की गंध सूंघने और बंदूकें चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है. वैश्विक मानवाधिकार संगठन Amnesty International ने तेहरान, मशहद और कर्मानशाह की सड़कों और मिलिट्री चेकपोस्टों से आई तस्वीरों और वीडियो का कड़ा विश्लेषण करने के बाद सच पर मुहर लगाई है. रिपोर्ट के मुताबिक, जिन बच्चों के हाथों में स्कूल बैग होने चाहिए थे, वे नन्हे बच्चे इस वक्त हाथों में भारी-भरकम AK-47 असॉल्ट राइफलें थामे मिलिट्री चेकपोस्टों पर मौत का पहरा दे रहे हैं.
ट्रम्प ने कहा ‘कूड़ा’ और वेंटिलेटर पर पहुंची बातचीत
युद्ध रोकने की सबसे ताजा कोशिश इसी महीने मई 2026 में की गई, लेकिन ये नाकाम रही. अमेरिका ने ईरान की रीढ़ तोड़ने के लिए एक ’14-पॉइंट मेमो’ भेजा था. वॉशिंगटन की शर्त बिल्कुल साफ और सख्त थी. ईरान अगले 12 साल के लिए यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह फ्रीज करे, अपना 440 किलो हाई-एनरिच्ड यूरेनियम किसी तीसरे देश के हवाले करे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को अपने ठिकानों की जांच करने दे. इसके बदले में अमेरिका उसका जब्त किया हुआ अरबों डॉलर का फंड रिलीज करने का लालच दे रहा था.
लेकिन ईरान ने इस अमेरिकी अल्टीमेटम के आगे घुटने टेकने के बजाय अपनी पुरानी मांगें मेज पर पटक दीं. उसने शर्त रखी कि पहले अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटे, जंग में हुए नुकसान का पाई-पाई हर्जाना मिले और लेबनान समेत सभी मोर्चों पर अमेरिकी-इजरायली हमले हमेशा के लिए बंद हों. इस बेबाक जवाब पर भड़कते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरानी प्रस्ताव को सीधे ‘कूड़ा’ करार दिया और ऑन-कैमरा बोले, “मैंने तो इस बकवास को पूरा पढ़ा भी नहीं.” इसके ठीक बाद 11 मई को ट्रम्प ने दुनिया के सामने कबूला कि यह सीजफायर फिलहाल ‘लाइफ सपोर्ट’ पर है.
ईरानी तेल टैंकर पर अटैक
कैसे शुरू हुई थी यह 40 दिनों की खूनी जंग?
अब वो खौफनाक कहानी पढ़ें, जिसने पूरे मिडिल ईस्ट को बारूद के मुहाने पर ला खड़ा किया. इस विनाशकारी युद्ध की स्क्रिप्ट 28 फरवरी 2026 की रात को लिखी गई थी. अमेरिका और इजरायल ने महाविनाशक कसम खाकर ईरान पर एक साथ सैकड़ों आसमानी हमले किए. मुख्य टारगेट ईरान के परमाणु ठिकाने थे. इसी भीषण बमबारी के बीच ईरान के सबसे बड़े नेता और सर्वोच्च कमांडर अली खामेनेई की मौत हो गई, जिसके बाद पूरे मिडिल ईस्ट की धरती किश्तों में सुलगने के बजाय एक साथ धधक उठी.
ईरान का पलटवार: सर्वोच्च नेता की मौत से बौखलाए ईरान ने भी अपनी पूरी मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन शक्ति झोंक दी. उसने इजरायल, अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी के अमीर मुल्कों पर मिसाइलों की ऐसी बारिश की जिससे आसमान काला पड़ गया. 40 दिनों तक चले इस खूनी तांडव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को आईसीयू में धकेल दिया. ईरान ने दुनिया की दुखती रग पर हाथ रखते हुए तुरंत ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को पूरी तरह चोक कर दिया, जहां से दुनिया का 20% कच्चा तेल गुजरता है. नतीजा यह हुआ कि वैश्विक बाजार में कच्चा तेल 72 डॉलर से छलांग लगाकर सीधे 108 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया और दुनिया भर में हाहाकार मच गया. आखिरकार, दोनों तरफ से भयंकर तबाही और हजारों मौतों के बाद 8 अप्रैल 2026 को दूसरे देशों की मदद से अस्थाई सीजफायर हुआ, जो आज दोनों तरफ की खींचतान और धमकियों के बीच अपने 40वें दिन पर आ पहुंचा है.
आखिर पेंच फंस कहां रहा है?
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषकों और PBS NewsHour की ग्राउंड रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बारूदी गतिरोध के पीछे तीन बिल्कुल सीधे और तीखे कारण हैं.
1: अमेरिका का वन-पॉइंट एजेंडा है कि ईरान की परमाणु रीढ़ को हमेशा के लिए तोड़ दिया जाए. उपराष्ट्रपति जेडी वेन्स ने दो टूक कह दिया है कि परमाणु सरेंडर के बिना किसी समझौते पर दस्तखत नहीं होंगे. दूसरी तरफ, ईरान इसे अपने देश की अस्मत और संप्रभुता का सवाल मानकर इंच भर भी पीछे हटने को तैयार नहीं है.
2. ईरान ने साफ कह दिया है कि वह हॉर्मुज का समुद्री रास्ता तभी खोलेगा जब अमेरिका उसके बंदरगाहों से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा और उसका जब्त पैसा रिलीज करेगा. लेकिन अमेरिका ने ईरान की इस शर्त को ‘नाकाफी और ब्लैकमेलिंग’ बताकर रिजेक्ट कर दिया.
3. Al Jazeera की तेहरान से आई एक ग्राउंड रिपोर्ट इस कड़वी हकीकत को पूरी तरह बयां करती है. ईरानी अधिकारियों का सीधा और तीखा तर्क है, ‘हम पहले भी दो बार अमेरिका के भरोसे बातचीत की मेज पर बैठे और दोनों ही बार हमारे देश पर पीठ पीछे हवाई हमले कर दिए गए. अब हम दोबारा इस अमेरिकी चूहेदान में अपनी गर्दन फंसाने क्यों जाएं?’ यही वह भयंकर अविश्वास है जो सीजफायर की मियाद पूरी होने के बाद मिडिल ईस्ट को दोबारा युद्ध की भट्टी में झोंकने के लिए आमादा है.





