ऐसा देश जो हर 10 फीट पर बदल जाता है! 1 गलती से बन गया अजीबोगरीब नक्शा, जानते हैं कहां है यह?


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सोचिए, एक छोटा सा सुनसान द्वीप, जहां कोई रहता भी नहीं, फिर भी दो देशों के लिए बेहद खास है. समुद्र के बीच स्थित यह जगह न सिर्फ अपने अजीबोगरीब नक्शे के लिए जानी जाती है, बल्कि यहां की सीमा भी समय के साथ बदलती रहती है. लहरों और तूफानों के बीच बसा यह द्वीप दिखने में भले ही साधारण हो, लेकिन इसकी कहानी बेहद अनोखी और दिलचस्प है.

दुनिया के नक्शे पर कई सीमाएं युद्ध और समझौतों से तय हुई हैं, लेकिन कभी-कभी छोटी सी चीज भी बड़ा बदलाव ला देती है. समुद्र के बीच स्थित एक छोटा सा द्वीप ‘मार्केट आइलैंड’ इसका उदाहरण है. यहां एक लाइटहाउस गलत जगह बना दिया गया था, और उसे सही करने के लिए दोनों देशों के बीच जमीन का आदान-प्रदान हुआ, जिससे इस द्वीप का नक्शा बदल गया.

The Worlds Strangest Border in the Middle of the Sea How One Lighthouse Redrew the Map of Two Nations

यह छोटा सा द्वीप करीब 3.3 हेक्टेयर का है और Sweden और Finland की सीमा पर स्थित है. इसकी कहानी साल 1809 में हुई Treaty of Fredrikshamn से शुरू होती है. उस समय स्वीडन और रूसी साम्राज्य के बीच सीमा तय की गई थी, लेकिन नक्शा बनाते समय गलती से सीमा रेखा इस द्वीप के बीच से गुजार दी गई.

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साल 1885 में रूसी शासकों ने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए इस द्वीप पर एक बड़ा लाइटहाउस बनवाया. लेकिन बाद में पता चला कि यह गलती से स्वीडन की जमीन पर बन गया है. कई सालों तक यह गलती वैसे ही बनी रही, क्योंकि न स्वीडन और न ही फिनलैंड अपनी जमीन छोड़ने को तैयार थे.

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The Worlds Strangest Border in the Middle of the Sea How One Lighthouse Redrew the Map of Two Nations

साल 1981 में स्वीडन और फिनलैंड के अधिकारियों ने एक खास समझौता किया. उन्होंने तय किया कि लाइटहाउस वाला हिस्सा फिनलैंड के पास ही रहेगा, जबकि स्वीडन को द्वीप के दूसरी तरफ उतनी ही जमीन दे दी जाएगी. साथ ही यह भी तय हुआ कि समुद्र किनारे की रेखा में कोई बदलाव नहीं होगा और मछली पकड़ने के अधिकार भी पहले जैसे ही रहेंगे. इसी समझौते के बाद इस द्वीप की सीमा सीधी लाइन की जगह घुमावदार हो गई, जो उल्टे अंग्रेजी ‘S’ जैसी दिखती है.

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मार्केट आइलैंड का मौसम बहुत खराब रहता है. यहां लहरें और तूफान इतने तेज होते हैं कि सामान्य सीमा के खंभे या दीवारें टिक नहीं पातीं. इसलिए सीमा दिखाने के लिए चट्टानों में 10 गहरे गड्ढे बनाए गए हैं.

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समुद्र की लहरों की वजह से इस द्वीप का आकार समय-समय पर बदलता रहता है. इसलिए सीमा सही बनी रहे, इसके लिए दोनों देश हर 25 साल में मिलकर सर्वे करते हैं. अगर द्वीप में बड़ा बदलाव दिखता है, तो सीमा रेखा भी ठीक कर दी जाती है. साल 1979 से यहां का लाइटहाउस पूरी तरह ऑटोमैटिक हो गया है, इसलिए अब इस द्वीप पर कोई स्थायी रूप से नहीं रहता है.



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