650km, 3 दिन… दोस्तों ने कार न होने का उड़ाया मजाक, तो सुमित E-Rickshaw से पहुंचा स्पीति वैली


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Inspirational Story : सपने देखने के लिए महंगी कार नहीं, बस हौसला चाहिए. मुजफ्फरनगर के सुमित कुमार ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया. दोस्तों ने कार न होने पर उनका मजाक बनाया, लेकिन उसने हार नहीं मानी. परिवार का खर्च चलाने वाले उसने अपनी E-Rickshaw को ही सफर का साथी बनाया और स्पीति तक पहुंच गया.

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ई-रिक्शा से सुमित कुमार स्पीति वैली पहुंचे.

मुजफ्फरनगर : सुमित ने अपने दोस्तों से पूछा- स्पीति घूमने चलें ? दोस्तों ने पूछा किससे, कार है तेरे पास? बस यह लाइन ही सुनकर युवक मायूस हो गया. उसे हर हाल में स्पीति वैली घूमने जाना था. वैसे स्पीति का नाम सुनते ही खतरनाक रोड, पहाड़, दूर-दूर तक सन्नाटा और सुंदर नजारे याद आने लगते हैं. रोड इतनी खतरनाक होती हैं कि कई बार यहां बड़ी-बड़ी कार भी खराब हो जाती हैं. अगर मैकेनिक की बात की जाए तो पूरे स्पीति में एक दो लोग हैं जो आपका वाहन सही कर सकते हैं, लेकिन उनका भी समय आपको मिल जाए तो बड़ी बात है. मगर, सुमित ने हार नहीं मानी और ठान लिया कि अब तो मैं स्पीति जाकर ही रहूंगा… चाहे ई-रिक्शा से ही सही.

कार से कम है क्या ट्रीरी? 

यह पूरी कहानी मुजफ्फरनगर के रहने वाले सुमित कुमार की है. उसने साबित कर दिया कि बड़े सपनों के लिए हमेशा बड़ी गाड़ी की जरूरत नहीं होती. जरूरत होती है तो सिर्फ हिम्मत, जुनून और अपने सपने को पूरा करने के जज्बे की. सुमित स्पीति वैली घूमना चाहते थे. दोस्तों के साथ घूमने की बात हुई तो उनकी कार न होने पर दोस्तों ने मजाक कर दिया. शायद दोस्तों को अंदाजा भी नहीं था कि यही मजाक सुमित के लिए एक चुनौती बन जाएगा.

3 दिन में सफर पूरा

सुमित ने महंगी कार का इंतजार नहीं किया. उन्होंने अपना ई-रिक्शा उठाया और करीब 650 किलोमीटर लंबे सफर पर निकल पड़े. करीब तीन दिनों की यात्रा के बाद वह ई-रिक्शा से स्पीति वैली पहुंच गए और दोस्तों के साथ अपने स्पीति वैली घूमने का सपना पूरा किया. खास बात यह है कि युवक कोई बड़ा कारोबारी या लग्जरी कार का मालिक नहीं है. वह ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का खर्च चलाता है. रोजमर्रा की जिंदगी में जिस ई-रिक्शा से उसका परिवार चलता है, उसी को उसने अपने सपनों की सवारी बना दिया.

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साधनों की कमी सपने को नहीं रोक सकती

यह कहानी सिर्फ 650 किलोमीटर की दूरी तय करने की नहीं है. यह उस सोच की कहानी है, जो कहती है कि सपनों की कीमत आपकी गाड़ी से नहीं, आपके हौसले से तय होती है. जिस ई-रिक्शा को लोग सिर्फ रोजी-रोटी कमाने का साधन समझते हैं, वही सुमित के लिए पहाड़ों तक पहुंचने का जरिया बन गया. शायद यही वजह है कि उनका यह सफर सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि उन तमाम लोगों के लिए एक संदेश बन गया है जो साधनों की कमी के कारण अपने सपनों को रोक देते हैं.

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काव्‍या मिश्राSenior Sub Editor

Kavya Mishra is a Senior Sub Editor at News18 Hindi with over seven years of experience in digital and print journalism. She is part of the regional editorial team, covering Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana …

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