अमेरिका में एक साधारण-सा क्रिसमस गिफ्ट दो परिवारों की जिंदगी बदल देगा, किसी ने सोचा भी नहीं था. एक डीएनए टेस्ट किट ने ऐसा राज खोल दिया, जो करीब 38 साल तक छिपा रहा. पता चला कि अस्पताल की एक बड़ी गलती की वजह से जन्म के बाद दो नवजात बच्चों की अदला-बदली हो गई थी और दोनों पूरी जिंदगी अपने असली माता-पिता की बजाय दूसरे परिवारों के साथ बड़े हुए.
एक ही दिन हुआ था दोनों का जन्म
यह कहानी शुरू होती है 26 जनवरी 1988 से, जब नॉर्थ डकोटा के यूनिटी मेडिकल सेंटर में दो बच्चों काइल बायलिन और जेरेमी मॉरिसन का जन्म हुआ. उस पूरे दिन अस्पताल में सिर्फ यही दो बच्चे पैदा हुए थे. लेकिन अस्पताल के स्टाफ से एक भारी चूक हो गई. दोनों बच्चों को एक-दूसरे के माता-पिता के साथ घर भेज दिया गया. करीब 38 सालों तक दोनों परिवार इस बात से बिल्कुल अनजान रहे कि वे जिस बच्चे को पाल रहे हैं, वह उनका अपना नहीं है.
क्रिसमस गिफ्ट ने खोला 38 साल पुराना राज
इस गहरे राज से पर्दा तब उठा, जब काइल बायलिन को क्रिसमस पर किसी ने तोहफे में घर पर ही किए जाने वाला डीएनए टेस्ट किट दिया. काइल ने जब टेस्ट किया, तो उसकी रिपोर्ट एक वंशावली वेबसाइट पर उसकी एक महिला से मैच हो गई, जिन्हें वह जानता तक नहीं था.
इसके बाद शक होने पर जेरेमी मॉरिसन ने भी अपना डीएनए टेस्ट कराया. जब दोनों के नतीजों को मिलाया गया, तो सब सन्न रह गए. रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि दोनों ही गलत परिवारों में पले-बढ़े हैं. जेरेमी को तो तब पूरा यकीन हो गया जब उन्होंने काइल के भाई की तस्वीर देखी, जिसकी शक्ल जेरेमी से हूबहू मिलती थी.
क्या बोले दोनों परिवार
इस खुलासे ने दोनों परिवारों को भावुक कर दिया है. काइल को पालने वाली मां एवलिन न्यूटन ने कहा कि काइल हमेशा मेरा बेटा रहेगा, यह सच कभी नहीं बदलेगा. लेकिन मुझे इस बात का दुख है कि मुझसे मेरे सगे बच्चे के पहले कदम, उसकी पढ़ाई, ड्राइविंग सीखने और उसकी शादी के वो हसीन पल हमेशा के लिए छिन गए.
वहीं दूसरी तरफ जेरेमी का कहना है कि इस टेस्ट से उनके दिल में अपने माता-पिता के लिए प्यार कम नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि मुझे बहुत प्यार मिला, मैंने खेल-कूद में हिस्सा लिया और अच्छी पढ़ाई की. 38 साल की यादों को कोई डीएनए टेस्ट नहीं मिटा सकता.
अस्पताल का क्या कहना है?
अस्पताल ने माना है कि इस खुलासे से परिवारों को गहरा सदमा लगा है. लेकिन उन्होंने अपनी गलती मानने से इनकार कर दिया है. अस्पताल का कहना है कि चूंकि इस बात को लगभग 4 दशक बीत चुके हैं, इसलिए उस समय के न तो मेडिकल रिकॉर्ड मौजूद हैं और न ही वह स्टाफ आज यहां काम करता है. हालांकि, काइल के पास आज भी जन्म के समय अस्पताल से मिला वो हाथ का बैंड मौजूद है, जिस पर गलत नाम लिखा हुआ था.
अब दोनों पुरुषों ने अपने-अपने असली माता-पिता से मुलाकात की है. उन्होंने इस मुलाकात को बेहद भावुक और थोड़ा अजीब बताया, क्योंकि 38 साल बाद नए सिरे से रिश्ते की शुरुआत करना आसान नहीं है. दोनों ने फोन पर तो बात की है, लेकिन वे अब तक आमने-सामने नहीं मिले हैं. अदालत में दायर मुकदमे में कहा गया है कि अस्पताल की इस एक गलती ने दो जिंदगियों और चार परिवारों का रास्ता हमेशा के लिए बदल दिया.




