ईरान पर ट्रंप का मूड क्‍या कह रहा है? एक्‍सपर्ट से समझ‍िए म‍िड‍िल ईस्‍ट का नया खेल


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डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान के बाद ईरान-अमेरिका सीजफायर पर फिर सवाल उठने लगे हैं. विदेश मामलों के जानकार रविंद्र सचदेव और पूर्व राजनयिक अशोक सजनार का कहना है कि हालात तनावपूर्ण जरूर हैं, लेकिन अभी सीजफायर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इस बीच अमेरिकी और ईरानी हमलों के दावों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 5 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है. भारत ने एक बार फिर बातचीत और कूटनीतिक समाधान का समर्थन किया है. जानिए पूरे घटनाक्रम और इसके असर की पूरी कहानी.

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अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप अब ईरान में अब क्‍या करने वाले हैं, इस बात को लेकर लेकर पूरी दुनिया की निगाह उन पर टिक गई है.

Iran America Ceasefire: अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने अपने बयानों से दुनिया को एकबार फिर हिला दिया है. उन्‍होंने एक बार फिर ईरान के साथ हुए युद्ध विराम को खारिज करते हुए युद्ध का ऐलान कर दिया है. वहीं, बीते समय में अमेरिकी राष्‍ट्रपति की तरह से किए गए ऐलान और उसके बाद बदले हुए सुर को देखते हुए पूरी दुनिया एक बार कंफ्यूजन से घिर गई है. सभी का सवाल यही है कि क्‍या उनके ताजा बयानों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए? क्या वाकई अमेरिका-ईरान के बीच हुबा सीजफायर पूरी तरह टूट चुका है? इस पूरे मसले को पूर्व राजनय‍िक अशोक सज्‍जनहार और व‍िदेशी मामलों के जानकार रोब‍िंदर सचदेव किस तरह से देखते हैं, आइए विस्‍तार से जानते हैं…

पूर्व राजनयिक रविंद्र सचदेव का इस मसले पर कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप जो भी बयान देते हैं, दुनिया उन्हें गंभीरता से लेती है. इसकी वजह साफ है कि वह अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और उनके फैसले कभी भी आधिकारिक कार्रवाई का रूप ले सकते हैं. हालांकि, ट्रंप की कार्यशैली को देखते हुए लोग यह भी सोचते हैं कि वह जो कह रहे हैं, क्या वास्तव में वैसा करेंगे या नहीं. अगर उनके हालिया बयानों और व्यवहार को देखें तो साफ लगता है कि वह काफी निराश और नाराज हैं. लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि सीजफायर या एमओयू पूरी तरह खत्म हो चुका है. बीती रात अमेरिकी सेना ने ईरान के कुछ ठिकानों पर कार्रवाई की है.

  1. पूर्व राजनयिक रविंद्र सचदेव अमेरिका की कार्रवाई के जवाब में ईरान ने भी बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमले करने का दावा किया है. अमेरिका का कहना है कि उसने करीब 80 ठिकानों पर हमला किया, जबकि ईरान दावा कर रहा है कि उसने 85 ठिकानों को निशाना बनाया गया.
  2. कुल मिलाकर स्थिति बेहद तनावपूर्ण जरूर है, लेकिन अभी यह नहीं कहा जा सकता है कि सीजफायर पूरी तरह समाप्त हो गया है. अब फिर से कतर सहित अन्‍य देशों के जरिए बातचीत शुरू हो सकती है, ताकि इस समझौते को दोबारा पटरी पर लाया जा सके. उन्‍होंने कहा कि शुरुआत से ही इस एमओयू के सामने कई बड़ी चुनौतियां रही हैं.
  3. इसकी पहली और सबसे अहम शर्त पर ही ईरान अब तक कायम है. उसका कहना है कि सबसे पहले लेबनान में स्थायी शांति होनी चाहिए. लेकिन वहां हालात सामान्य होते नहीं दिख रहे. इसके अलावा भी कई ऐसे मुद्दे हैं, जिनकी वजह से इस समझौते को लागू करना आसान नहीं है.
  4. इसके बावजूद हाल के दिनों में कुछ राहत की उम्मीद जरूर दिखाई दे रही थी. लेकिन ट्रंप के ताजा बयान से साफ लगता है कि वह बेहद नाराज और निराश हैं. उन्होंने ईरान के लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल भी किया है. इससे उनके गुस्से का अंदाजा लगाया जा सकता है.

बदले हालात पर भारत का क्‍या रहेगा रुख?
अमेरिका और ईरान के बीच बदले हालात पर चौतरफा इस बात की भी चर्चा शुरू हो गई कि इस पूरे मसले पर भारत का क्‍या रुख रहने वाला है. उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही भारत सरकार की ओर से भी कोई आधिकारिक बयान आएगा. प्रधानमंत्री इस समय ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न दौरे पर हैं, जबकि विदेश मंत्री चार देशों की यात्रा पर हैं. वह कतर और अन्य देशों का दौरा कर चुके हैं. साथ ही वह आगे कुवैत और ओमान जाने वाले हैं.

  1. विदेश मामलों के जानकार अशोक सजनार के अनुसार, शांति बहाली के बाद होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सामान्य हो चुकी थी. तेल और उर्वरक जैसी जरूरी वस्तुओं की सप्लाई जारी थी. यह केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के हित में था.
  2. उन्‍होंने कहा कि भारत यही चाहेगा कि किसी भी तरह युद्ध को जल्द से जल्द रोका जाए. चाहे यह अस्थायी सीजफायर रहा हो, नाजुक रहा हो या पूरी तरह स्थिर न रहा हो, लेकिन कम से कम संघर्ष रुका हुआ था और समुद्री व्यापार प्रभावित नहीं हो रहा था.
  3. जहां तक ट्रंप के बयान का सवाल है, तो न तो ईरान और न ही अमेरिका फिर से उसी स्थिति में लौटना चाहेंगे, जहां दोनों देश लगातार एक-दूसरे पर हमले कर रहे थे. इससे किसी का फायदा नहीं है.
  4. 17 तारीख को जो एमओयू हुआ, उससे ईरान को काफी आर्थिक राहत मिली. करीब 300 अरब डॉलर की परिसंपत्तियों को अनफ्रीज करने जैसे कई कदम उठाए गए. ऐसे में ईरान भी नहीं चाहेगा कि पूरा समझौता रद्द हो जाए और फिर से बड़े पैमाने पर बमबारी शुरू हो.

अगर भारत के रुख की बात करें तो हम लगातार यही कहते आए हैं कि हर विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए. भारत ने इस एमओयू और सीजफायर का स्वागत भी किया था, क्योंकि इससे मिडिल ईस्‍ट में फिर से शांति वापस आई थी. – अशोक सजनार, विदेश मामलों के जानकार

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें



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