US vs Russia Oil : Marco Rubio Exclusive – भारत में रूस की जगह लेगा अमेरिका? ट्रंप के खास मंत्री ने तेल पर दिया बंपर ऑफर!


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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अपने भारत दौरे पर न्यूज 18 से एक्सक्लूसिव बातचीत की है. इस दौरान उन्होंने भारत और अमेरिका के रिश्तों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं. पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत आए रूबियो के सुर रूसी तेल खरीद के मुद्दे पर पूरी तरह बदले नजर आए; उन्होंने साफ किया कि अमेरिका की नाराजगी कभी भारत से नहीं बल्कि रूस से थी और भारत अपनी जरूरतों के लिए कदम उठाने को आजाद है. इतना ही नहीं, भारत और रूस की तेल दोस्ती के बीच अमेरिका ने एक बड़ा कूटनीतिक दांव खेलते हुए भारत को एक बंपर ऑफर दे डाला है.

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मार्को रूबियो ने तेल सप्लाई पर दिया ऑफर

वॉशिंगटन: ट्रंप ने अपने भरोसेमंद मंत्री मार्को रूबियो को भारत दौरे पर भेजा है. ये दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब पश्चिम एशिया में जंग की वजह से पूरी दुनिया तेल सप्लाई के संकट से जूझ रही है, भारत भी इससे अछूता नही है. इस बीच US के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने न्यूज 18 से एक्सक्लूसिव बातचीत में भारत को एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़ा एक बंपर ऑफर दे डाला है. रूस से सस्ता तेल खरीदने को लेकर अमेरिका कई बार भारत पर उंगली उठा चुका है लेकिन इस बार रूबियो के सुर पूरी तरह बदले हुए दिखे. रूसी तेल के मुद्दे पर सवाल पूछे जाने पर रूबियो ‘हमारा वो मतलब नहीं था’ मोड में जवाब देते दिखे.

रूसी तेल पर भारत के पीछे पड़ा अमेरिका

अमेरिका की दिली ख्वाहिश है कि भारत, रूस से तेल खरीदना बंद कर दे लेकिन भारत सरकार ने बार-बार ये साफ किया है कि वो तेल से जुड़े सारे फैसले देश के हितों को ध्यान में रखते हुए लेगा. भारत को रूसी तेल भारी डिस्काउंट पर मिलता है और पश्चिम एशिया संकट में रूस एक भरोसेमंद पार्टनर बनकर उभरा है. भारत ने तमाम प्रेशर के बाद भी रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया था तो अमेरिका ने भारी टैरिफ के जरिए भारत-रूस की दोस्ती में दरार डालने की कोशिश की. हालांकि, ईरान जंग के बीच में अमेरिका को अपना ये फैसला भी वापस लेना पड़ा. अमेरिका की इन चालों की वजह से भारत के साथ रिश्तो मों कड़वाहट आ गई थी.

रूबियो ने तेल सप्लाई पर दिया क्या ऑफर?

इसी मुद्दे पर जब न्यूज 18 ने रूबियो से सीधे शब्दों में पूछा गया कि ‘क्या रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच के मतभेद के लिए खत्म हो चुके हैं’… तो उन्होंने चौंकाने वाला जवाब दिया. रूबियो ने साफ किया कि अमेरिका की नाराजगी कभी भी भारत से थी ही नहीं. उनका असली निशाना तो रूस था, जो यूक्रेन पर हमला कर रहा था. भारत बस रूस का एक बड़ा ग्राहक होने के नाते इस विवाद के बीच में आ गया था. अमेरिकी विदेश मंत्री ने माना कि भारत की अपनी जरूरतें हैं और अब दोनों देश इस कड़वाहट को पीछे छोड़ आगे बढ़ चुके हैं.

इस बातचीत में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब रूबियो ने भारत के सामने तेल सप्लाई को लेकर एक नया विकल्प पेश कर दिया. उन्होंने कहा कि ‘भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहना चाहता और अपने सप्लाई चेन को बढ़ा रहा है. ऐसे में अमेरिका खुद भारत का एक बड़ा और मजबूत पार्टनर बनने के लिए तैयार है’.

रूबियो ने केवल अमेरिकी तेल की ही बात नहीं की, बल्कि उन्होंने वेनेजुएला जैसे देशों से भी भारत को तेल दिलाने का एक बड़ा संकेत दे दिया है. इस ऑफर को सीधे तौर पर भारतीय बाजार से रूस के दबदबे को कम करने की अमेरिकी कूटनीति के रूप में देखा जा रहा है.

भारत-अमेरिका ट्रेड-सिक्योरिटी पर भी महामंथन

मार्को रूबियो की इस यात्रा में सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि व्यापार और सुरक्षा के मोर्चे पर भी बड़ी रणनीतियां बनी हैं. उन्होंने खुलासा किया कि भारत और अमेरिका बहुत जल्द एक बड़े व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने वाले हैं, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को तगड़ा बूस्ट मिलेगा. इसके अलावा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की दादागिरी को रोकने के लिए भारत में ही क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की अगली बड़ी बैठक होने जा रही है.

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Utkarsha Srivastava

Utkarsha Srivastava is seasoned digital journalist specializing in geo-politics issues, currently writing for World section of News18 Hindi. With over a decade of extensive experience in hindi digital media, sh…और पढ़ें





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