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छतरपुर जिले के जीतेंद्र कुमार जो शिलाजीत के पेड़े बनाकर कमजोर लोगों को जवान बना रहे हैं. जीतेंद्र के मुताबिक इनके क्षेत्र के जंगलों में शिलाजीत मिलता है जिससे ये पेड़े बनाते हैं. इनका जीतेंद्र का मानना है कि शिलाजीत युवाओं से लेकर बूढ़े तक को खानी चाहिए. इन्होंने शिलाजीत पेड़े बनाने का आइडिया आया. अब 800 रुपए किलो बेच रहे हैं.
आज हम आपको एक ऐसी मिठाई के बारे में बताने जा रहे हैं. जिसे देखकर आप भी खुद को खाने से रोक नहीं पाएंगे. छतरपुर जिले में शिलाजीत का पेड़ा बनाया जाता है. इस पेड़े को ताकत का पेड़ा भी कहा जाता है. अगर कोई इस एक पेड़े को एक गिलास दूध के साथ खा लेता है तो वह पूरे दिन थकान महसूस नहीं करता है.
छतरपुर जिले के जीतेंद्र कुमार जो शिलाजीत के पेड़े बनाकर कमजोर लोगों को जवान बना रहे हैं. जीतेंद्र के मुताबिक इनके क्षेत्र के जंगलों में शिलाजीत मिलता है जिससे ये पेड़े बनाते हैं. इनका जीतेंद्र का मानना है कि शिलाजीत युवाओं से लेकर बूढ़े तक को खानी चाहिए. इन्होंने शिलाजीत पेड़े बनाने का आइडिया आया. अब 800 रुपए किलो बेच रहे हैं.
1 लाख रुपए का ईनाम
जीतेंद्र बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति इस एक पेड़े को एक गिलास दूध के साथ खा लेता है तो उसे 24 घंटे थकान नहीं होती है. अगर वह थकान महसूस करता है. उसे हम 1 लाख रुपए का ईनाम देंगे. हमें विश्वास है. हमार बनाया हुआ प्रोडक्ट है. हमें पता है इसकी क्वालिटी इसलिए तो 1 लाख रुपए का ईनाम दे रहे हैं.
ऐसे बनाते हैं पेड़ा
जीतेंद्र बताते हैं कि जैसे घरों में मावा शक्कर का पेड़ा बनाया जाता है वैसे ही इस पेड़े को भी तैयार किया जाता है. 1 किग्रा में 2 ग्राम शुद्ध शिलाजीत मिलाकर इन पेड़ों को तैयार करते हैं. मावा के पेड़े ये भी हैं. शिलाजीत के साथ में इन्हें तैयार किया गया है. पूरी रेसिपी आपको नहीं बता सकते हैं यही हमारा फार्मूला है.जीतेंद्र बताते हैं कि शिलाजीत का पेड़ा शरीर की कोशिकाओं को फिर से नया करता है.किसी भी रोग में यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. जिससे शरीर बीमार नहीं पड़ता है.





