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पाकिस्तान से अफगानी प्रवासियों को निकालने का सिलसिला जारी, एक दिन में 4,200 से ज्यादा लोगों को वापस भेजा

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव अब भी जारी है। दोनों देशों के बीच झड़प के बाद पाकिस्तान से अफगानिस्तान के नागरिकों को जबरन निकाला जा रहा है।

स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान के रिफ्यूजी कमीशन ने सोमवार को बताया कि पाकिस्तान ने रविवार को 4,237 अफगान प्रवासियों को डिपोर्ट किया है। अफगानी लोगों को डिपोर्ट करने का सिलसिला पाकिस्तान के साथ-साथ ईरान से भी किया जा रहा है।

इससे पहले, गुरुवार को तोरखम क्रॉसिंग के जरिए 4,590 अफगानों को डिपोर्ट किया गया था। वहीं फिर शुक्रवार को 4,398 और शनिवार को 4,142 लोगों को डिपोर्ट किया गया।

तालिबान के रिफ्यूजी कमीशन के मुताबिक, रविवार को डिपोर्ट किए गए माइग्रेंट्स दक्षिणी कंधार प्रांत में स्पिन बोल्डक बॉर्डर क्रॉसिंग के जरिए अफगानिस्तान में आए थे। कमीशन ने कहा कि उसी दिन ईरान से भी 355 लोगों को डिपोर्ट किया गया।

बताया गया कि ज्यादातर लोग अपनी मर्जी से वापस आए हैं। इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (आईओएम) ने इस महीने की शुरुआत में बताया था कि 26 अप्रैल से 9 मई के बीच ईरान और पाकिस्तान से करीब 1,14,321 लोग अफगानिस्तान लौटे हैं।

आईओएम ने बताया कि लौटने वालों में डिपोर्टेड और अपनी मर्जी से लौटने वाले दोनों तरह के लोग शामिल हैं, इनमें 14,778 परिवार शामिल हैं, जिनमें से कई महिलाएं और बच्चे हैं।

आईओएम के मुताबिक, 1 जनवरी से 9 मई के बीच 3.5 मिलियन से ज्यादा लोग अफगानिस्तान लौटे हैं, जिनमें करीब 4,87,000 परिवार शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, “वापसी में यह बढ़ोतरी तब हुई है, जब पाकिस्तान बिना डॉक्यूमेंट वाले विदेशियों पर कार्रवाई जारी रखे हुए है, इस नीति का अफगानों पर बहुत ज्यादा असर पड़ा है। मानवाधिकार समूहों और यूएन एजेंसियों ने जबरदस्ती वापसी को लेकर चिंता जताई है और चेतावनी दी है कि कई डिपोर्टेड लोगों को आने पर आर्थिक तंगी और घर, नौकरी और पब्लिक सर्विस तक सीमित पहुंच का सामना करना पड़ता है।”

एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकारियों की मौजूदा छापेमारी, अफगानों की गिरफ्तारी और जबरदस्ती निकालना हाल के सालों में सबसे आक्रामक एनफोर्समेंट फेज में से एक दिखाता है।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस महीने की शुरुआत में कई रिफ्यूजी कैंपों में करीब 1500 अफगान रिफ्यूजी को हिरासत में लिया गया था, खासकर पेशावर और आसपास के जिलों में ऑपरेशन किए गए।



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