ट्रंप के व‍िमान एयर फोर्स वन पर खुलासे, और हाथ धोकर बड़े-बड़े पत्रकारों के पीछे पड़ गई सरकार


अमेरिका में ट्रंप प्रशासन और वहां की मीडिया के बीच एक बार फिर से आर-पार की जंग छिड़ गई है. इस बार विवाद डोनाल्ड ट्रंप के सबसे सुरक्षित विमान एयर फोर्स वन की सुरक्षा से जुड़ा है. न्यू यॉर्क टाइम्स ने दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन ने उसके कई पत्रकारों को कोर्ट का समन भेजा है और उन्‍हें पेश होने का आदेश द‍िया है. तो एयर फोर्स वन को लेकर न्यू यॉर्क टाइम्स ने क्या खुलासे किए थे, जो सरकार हाथ धोकर पीछे पड़ गई.

न्यू यॉर्क टाइम्स ने राष्ट्रपति ट्रंप के नए एयर फोर्स वन विमान की सुरक्षा में कमियों को लेकर दो बड़ी रिपोर्ट छापीं. यह नया विमान कोई साधारण विमान नहीं है, बल्कि कतर द्वारा उपहार में दिया गया एक बोइंग विमान है, जिसे पिछले हफ्ते ही राष्ट्रपति की सेवा में शामिल किया गया था.

अखबार की रिपोर्ट सामने आते ही ट्रंप प्रशासन भड़क गया. शुक्रवार को फेडरल एजेंटों ने सीधे न्यू यॉर्क टाइम्स के पत्रकारों के घरों पर जाकर उन्हें समन थमा दिए. प्रशासन चाहता है कि ये पत्रकार आने वाले बुधवार को मैनहट्टन की फेडरल ग्रैंड जूरी के सामने पेश हों. जांच एजेंसी असल में यह पता लगाना चाहती है कि इन पत्रकारों को एयर फोर्स वन की सुरक्षा कमियों से जुड़ी गुप्त जानकारियां देने वाले वे अनाम सूत्र कौन हैं, जो सरकार या सेना के भीतर बैठे हैं. जिन पत्रकारों को समन भेजा गया है, उनमें जूलियन ई. बार्न्स, एरिक लिप्टन, टायलर पेजर और एरिक श्मिट जैसे बड़े नाम शामिल हैं.

न्यू यॉर्क टाइम्स की दो रिपोर्ट, जिन्होंने मचाई खलबली

सीक्रेट सर्विस की चेतावनी: पहली रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस जो राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, उसने ईरान के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए राष्ट्रपति ट्रंप को इस नए विमान का इस्तेमाल अस्थायी रूप से बंद करने की सलाह दी थी.

स‍िक्‍योर‍िटी स‍िस्‍टम की कमी: दूसरी रिपोर्ट और भी गंभीर थी. इसमें कहा गया कि कतर से मिले इस नए विमान में वे हाईटेक स‍िक्‍योर‍िटी और एंटी-मिसाइल स‍िस्‍टम नहीं लगी हैं, जो पुराने एयर फोर्स वन बेड़े में मौजूद थीं. यानी यह विमान मिसाइल हमलों से निपटने में पूरी तरह सक्षम नहीं है.

आखिर यह शक पैदा कहां से हुआ?

दरअसल, इसी हफ्ते राष्ट्रपति ट्रंप इस नए एयर फोर्स वन विमान से तुर्की में हुए नाटो सम्मेलन में हिस्सा लेने गए थे. लेकिन जब वे तुर्की से इंग्लैंड के मिल्डेनहॉल एयर बेस के लिए रवाना होने वाले थे, तो अचानक एक अजीब फैसला लिया गया. ट्रंप ने नए विमान को छोड़कर अचानक अपने पुराने प्रेसिडेंशियल विमान का रुख किया. दोनों विमान उड़कर ब्रिटेन पहुंचे और फिर वाशिंगटन वापस आते समय ट्रंप दोबारा नए विमान में सवार हुए.

यह रहस्यमयी अदला-बदली ठीक उसी समय हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा एक नाजुक सीजफायर टूट गया था. अमेर‍िका ने ईरान पर नए हवाई हमले शुरू कर दिए थे और तेहरान की तरफ से भी खाड़ी देशों को निशाना बनाकर जवाबी हमले किए जा रहे थे. इस समय विमानों की इस अदला-बदली ने इन अफवाहों को हवा दे दी कि लगभग 40 करोड़ डॉलर से तैयार किए गए इस नए विमान में शायद अभी वो सारे सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं, जो एक युद्ध जैसी स्थिति में राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए जरूरी होते हैं.

ट्रंप और व्हाइट हाउस की सफाई

एक तरफ जहां मीडिया में सुरक्षा में चूक की बातें चल रही हैं, वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन खबरों को पूरी तरह से बकवास और खारिज कर दिया है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा कि वे इंग्लैंड में सिर्फ इसलिए रुके थे ताकि वहां तैनात अमेरिकी सैनिकों को यह नया और शानदार विमान दिखाया जा सके. जब पत्रकारों ने ट्रंप से सीधे पूछा कि क्या ईरान से उनके विमान को कोई खतरा था, तो उन्होंने मजाक में उड़ाते हुए कहा, मुझे तो हमेशा ही खतरा रहता है. मैं उनकी लिस्ट में नंबर वन पर हूं.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्टीवन चेउंग ने भी कहा कि नया एयर फोर्स वन पूरी तरह से आधुनिक और हाई स‍िक्‍योर‍िटी प्रोटोकॉल से लैस है. उन्होंने एक बेहद दिलचस्प बात कही कि राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए प्रशासन कई बार ध्यान भटकाने और गुमराह करने जैसी रणनीतियों का भी इस्तेमाल करता है, और विमानों की अदला-बदली उसी का हिस्सा थी.



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