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देहरादून और मसूरी वैसे तो हर मौसम में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन मानसून में इनकी खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है. काली घटाएं, धुंध से ढकी पहाड़ियां, हरियाली और झरनों की आवाज यहां आने वालों को प्रकृति के बेहद करीब ले जाती है. बारिश के इस मौसम में देहरादून और मसूरी की कुछ खास जगहें घूमने का एक यादगार अनुभव देती हैं.
वैसे तो देहरादून की हसीन वादियां हर मौसम में खूबसूरत लगती हैं. लेकिन, मानसून में इसकी खूबसूरती की बात ही अलग है. काली घटाएं, चारों तरफ बिखरी घनी हरियाली और पहाड़ों से टकराती मानसून की बूंदें देहरादून और मसूरी के प्राकृतिक सौंदर्य में चार-चांद लगा देती हैं. बारिश के इस सुहावने मौसम में राजधानी और उसके आसपास की वादियां एक नया ही रूप धारण कर लेती हैं. जब आसमान में काले बादल घिरते हैं और रिमझिम बारिश शुरू होती है तो यहां की कुदरत मानो अपना विशेष श्रृंगार करती है. सोंधी मिट्टी की महक, पेड़ों से टपकती पानी की बूंदें और पहाड़ों पर छाई धुंध पूरे वातावरण को बहुत रोमांटिक बना देती है.
मानसून का यह मौसम शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर सुकून की तलाश कर रहे लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. इस मौसम में नदियां-नाले उफान पर होते हैं. झरने अपनी पूरी रफ्तार से बहते हैं और जंगल पहले से कहीं अधिक हरे-भरे और घने नजर आने लगते हैं. दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों के लिए यह समय प्रकृति के सबसे खूबसूरत रूपों को निहारने का सबसे सही मौका होता है. देहरादून की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां मानसून का असर बहुत ही मनमोहक दिखाई देता है.
मानसून के दस्तक देते ही मसूरी की मशहूर माल रोड एक जादुई दुनिया में तब्दील हो जाती है. इस मौसम में पूरी माल रोड बादलों की सफेद और घनी चादर से ढक जाती है. जिससे ऐसा महसूस होता है मानो आप बादलों के ऊपर ही चल रहे हों. पक्के और सुरक्षित रास्तों की वजह से हल्की धुंध और ठंडी हवाओं के बीच यहां टहलना पर्यटकों के लिए बेहद सुहाना और सुरक्षित अनुभव होता है.
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माल रोड की दुकानों से छनकर आती गुनगुनी लाइटें और चाय-कॉफी के गर्म घूंट इस सुहावने मौसम का मज़ा दोगुना कर देते हैं. बारिश की फुहारों के बीच जब धुंध गहरी होती है तो सामने की पहाड़ियां गायब हो जाती हैं और थोड़ी ही देर में जब बादल छटते हैं तो हरी-भरी वादियां एक नए निखार के साथ सामने आती हैं. यह उतार-चढ़ाव भरा नज़ारा पर्यटकों को घंटों तक मंत्रमुग्ध रखता है. माल रोड पर टहलते हुए बारिश का आनंद लेना हर उम्र के लोगों को पसंद आता है.
देहरादून में स्थित प्राचीन टपकेश्वर महादेव मंदिर में मानसून के दौरान एक अलौकिक और पवित्र आध्यात्मिक अहसास होता है. सावन का महीना चल रहा है, इसलिए यहां आकर दर्शन और मानसिक सुकून दोनों हो जाते हैं. तमसा नदी के किनारे स्थित यह प्राचीन मंदिर अपनी प्राकृतिक गुफा के लिए जाना जाता है. मानसून में जब गुफा के ऊपर स्थित चट्टानों से पानी छनकर सीधे शिवलिंग पर लगातार टपकता है तो वह दृश्य अत्यंत दिव्य और अद्भुत लगता है. बारिश के मौसम में आसपास की पहाड़ियां और घने पेड़ मंदिर परिसर को पूरी तरह से ढक लेते हैं जिससे यहां का वातावरण बहुत शांत, शीतल और मनभावन हो जाता है. तमसा नदी का बहता हुआ कलकल जल और बारिश की बूंदों की ध्वनि मिलकर एक प्राकृतिक संगीत की रचना करती है.
मानसून में एस्थेटिक फोटोग्राफी के लिए आप देहरादून के फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट में आ सकते हैं. प्रकृति और औपनिवेशिक वास्तुकला के बेजोड़ मेल का प्रतीक फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट मानसून में बेहद आकर्षक और भव्य नज़र आता है. ग्रीको-रोमन शैली में बनी इसकी ऐतिहासिक लाल ईंटों की इमारत बारिश के पानी से धुलकर और भी निखर जाती है. इमारत के चारों ओर फैले विशाल और खुले हरे-भरे मैदान जिनमें ऊंचे-ऊंचे पेड़ लगे हैं, मानसून की ताज़ी बूंदों से लहलहा उठते हैं. बारिश के दौरान यहां की घास पर चलना और ताज़ी हवा में सांस लेना मन को असीम शांति देता है. फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए मानसून में फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट का नज़ारा किसी स्वर्ग से कम नहीं होता है जहां धुंधले आसमान के नीचे लाल ऐतिहासिक इमारत और गहरी हरियाली का कंट्रास्ट बेहतरीन तस्वीरें देता है.
देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में स्थित लछीवाला नेचर पार्क मानसून में अपने पूरे निखार पर होता है. चारों तरफ से घने जंगलों से घिरा यह पार्क मानसून की ताज़ी बारिश के बाद और भी अधिक जीवंत हो जाता है. यहां के साफ-सुथरे रास्तों और लहराते पेड़ों के बीच टहलते हुए मानसून की ठंडी हवाओं का आनंद लेना बेहद सुखद होता है. पार्क के बीच से बहती प्राकृतिक सुसवा नदी बारिश के पानी से भरकर प्रवाहित होती है जो बच्चों और परिवारों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनती है. मानसून के मौसम में यहाँ का तापमान बहुत ही आरामदायक हो जाता है और चारों ओर केवल पक्षियों के चहकने और बहते पानी की आवाज सुनाई देती है.
मसूरी के अंतिम छोर पर स्थित क्लाउड्स एंड उन लोगों के लिए एक आदर्श स्थान है जो भीड़-भाड़ से दूर एकांत और शांति की तलाश में रहते हैं. मानसून के मौसम में यह जगह किसी जादुई सपने जैसी लगने लगती है. ओक और देवदार के विशाल और घने जंगलों के बीच से होकर जब बादल तैरते हुए गुजरते हैं तो वह दृश्य देखने लायक होता है. यहां खड़े होकर देखने पर ऐसा लगता है जैसे बादल आपके बिल्कुल करीब से होकर बह रहे हों. मानसून में यहां की ठंडी हवाएं और जंगलों की सोंधी खुशबू पूरे माहौल को तरोताज़ा कर देती है. यहां से दिखने वाला दूर-दूर तक फैली घाटियों का नज़ारा बादलों के खेल के साथ हर मिनट बदलता रहता है. मानसून के दौरान देहरादून और मसूरी की इन सभी जगहों की सुंदरता देखने के लिए आप आ सकते हैं लेकिन घूमने से पहले मौसम विभाग की अपडेट ज़रूर लीजिए.




