वैश्विक तनाव से लाल निशान पर बंद हुआ शेयर बाजार, त्योहारी सीजन से पहले मारुति ने बढ़ाईं कीमतें


मध्य पूर्व में नए सिरे से उत्पन्न भू-राजनीतिक तनावों के बीच हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान आईटी, मेटल, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और मीडिया कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट के चलते घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों में 0.50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 382.62 अंक यानी 0.50 प्रतिशत गिरकर 76,132.81 पर आ गया, तो वहीं निफ्टी 50 118.55 अंक यानी 0.50 प्रतिशत गिरकर 23,779.15 पर पहुंच गया।

दिन के दौरान, सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,515.43 से मामूली 69 अंक गिरकर 76,446.05 पर खुला। हालांकि, दिन के कारोबारी सत्र में यह 0.71 प्रतिशत यानी 545 अंक फिसलकर 75,970.52 के दिन के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया।

वहीं निफ्टी 50 दिन के दौरान अपने पिछले बंद 23,897.70 से मामूली 14.54 अंक फिसलकर 23,883.15 पर खुला और दिन के दौरान यह 159.8 अंक या 0.66 प्रतिशत गिरकर 23,737.90 के इंट्रा-डे लो पर पहुंच गया।

व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप में 0.46 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में 0.02 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई।

सेक्टरवार देखें तो निफ्टी आईटी, निफ्टी मेटल, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मीडिया का प्रदर्शन कमजोर रहा, जबकि निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर का प्रदर्शन बेहतर रहा।

निफ्टी50 इंडेक्स में इंफोसिस, एसबीआई लाइफ, एचडीएफसी लाइफ, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, टेक महिंद्रा और विप्रो के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जबकि इसके विपरीत अपोलो हॉस्पिटल, एलएंडटी, कोल इंडिया, भारती एयरटेल, मैक्स हेल्थ और सिप्ला के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त देकने को मिली। इसके साथ ही, आयशर मोटर्स, मारुति सुजुकी इंडिया, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, इंडिगो, अदाणी इंटरप्राइजेज, आईसीआईसीआई बैंक और पावरग्रिड के शेयरों में भी तेजी देखने को मिली।

मार्केट एक्सपर्ट सुनील शाह ने बात करते हुए कहा, “सप्ताह का पहला दिन है और उम्मीद के मुताबिक बाजार गिरावट के साथ खुले हैं। अभी जब मैं आपसे बात कर रहा हूं, सेंसेक्स 180 अंक नीचे है, और निकट भविष्य में हमें जिस एकमात्र आंकड़े पर बारीकी से नजर रखनी है, वह है कच्चे तेल की कीमतें। कच्चे तेल की कीमत 97 डॉलर तक पहुंच गई है। हालात सुधर नहीं रहे हैं, और ऊर्जा की इन ऊंची कीमतों का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। हमारी अर्थव्यवस्था पर भी दबाव आ सकता है, खासकर हमारे भुगतान संतुलन और अमेरिकी डॉलर-रुपए की विनिमय दर पर।” उन्होंने आगे कहा कि जैसे कच्चे तेल की कीमतें कम होंगी बाजार पर दबाव कम होगा और फिर से तेजी का रुख देखने को मिलेगा।\



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