पीएम मोदी के ताशकंद दौरे ने इस ऐतिहासिक शहर को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है. उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद सिर्फ भारत के इतिहास से जुड़े एक अहम अध्याय के लिए ही खास नहीं है, बल्कि अपनी खूबसूरत मस्जिदों, रंगीन बाजारों, शानदार वास्तुकला, हरियाली और मध्य एशियाई संस्कृति के लिए भी पर्यटकों को आकर्षित करता है. खास बात यह है कि यहीं 1966 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का निधन हुआ था, जिससे ताशकंद का भारत के साथ एक गहरा ऐतिहासिक रिश्ता भी जुड़ा हुआ है.
मध्य एशिया का खूबसूरत देश उज्बेकिस्तान अपनी ऐतिहासिक विरासत, शानदार वास्तुकला और समृद्ध संस्कृति के लिए दुनियाभर में जाना जाता है. इसकी राजधानी ताशकंद आधुनिकता और इतिहास का ऐसा मेल है, जहां चौड़ी सड़कों और खूबसूरत इमारतों के साथ सदियों पुराने स्मारक भी देखने को मिलते हैं.
ताशकंद का नाम भारत के इतिहास में खास तौर पर ताशकंद समझौते के कारण दर्ज है. वर्ष 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के बाद 10 जनवरी 1966 को तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने यहां समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसके ठीक अगले दिन 11 जनवरी 1966 को शास्त्री जी का निधन ताशकंद में हुआ था. आज भी शहर में उनसे जुड़ी जगहें भारतीय पर्यटकों के लिए खास आकर्षण रखती हैं.
ताशकंद घूमने के लिए क्यों है खास?
ताशकंद में आपको एक तरफ सोवियत दौर की वास्तुकला दिखाई देती है, तो दूसरी तरफ इस्लामी स्थापत्य और मध्य एशियाई संस्कृति की खूबसूरत झलक मिलती है. शहर को देखने के लिए कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जगहें हैं. यहां की चौड़ी सड़कें, हरे-भरे पार्क और खूबसूरत मेट्रो स्टेशन भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं.
चोरसू बाजार में दिखेगा असली रंग
अगर आप ताशकंद की स्थानीय संस्कृति को करीब से देखना चाहते हैं तो चोरसू बाजार जरूर जाएं. यहां रंग-बिरंगे मसाले, सूखे मेवे, फल, सब्जियां, पारंपरिक मिठाइयां और स्थानीय सामान मिलते हैं. बाजार की खास गुंबदनुमा इमारत इसे और आकर्षक बनाती है. यहां घूमते हुए आपको उज्बेकिस्तान के खान-पान और रोजमर्रा की जिंदगी की झलक मिल सकती है.
हजरती इमाम कॉम्प्लेक्स भी करें एक्सप्लोर
इतिहास और वास्तुकला पसंद करने वालों के लिए हजरती इमाम कॉम्प्लेक्स बेहद खास है. यहां मस्जिदों, मदरसों और धार्मिक इमारतों का खूबसूरत समूह है. यह जगह ताशकंद की इस्लामी विरासत को समझने का मौका देती है. यहां मौजूद प्राचीन कुरान की पांडुलिपि भी इस परिसर को खास बनाती है.
ताशकंद मेट्रो भी है देखने लायक
ताशकंद की मेट्रो सिर्फ परिवहन का साधन नहीं, बल्कि शहर की खूबसूरत वास्तुकला का हिस्सा भी है. इसके कई स्टेशन अलग-अलग थीम और डिजाइन के लिए प्रसिद्ध हैं. झूमर, नक्काशी और सजावटी छतें इन्हें सामान्य मेट्रो स्टेशनों से बिल्कुल अलग बनाती हैं.
अमीर तैमूर स्क्वायर और पार्क
शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अमीर तैमूर स्क्वायर भी शामिल है. इसके आसपास हरियाली, स्मारक और महत्वपूर्ण इमारतें हैं. शाम के समय यहां घूमना और शहर की आधुनिक जिंदगी को देखना एक अलग अनुभव देता है.
भारतीयों के लिए खास अनुभव
ताशकंद की यात्रा उन लोगों के लिए खास हो सकती है, जिन्हें इतिहास, संस्कृति और वास्तुकला में दिलचस्पी है. लाल बहादुर शास्त्री से जुड़ी यादें इस शहर को भारतीय पर्यटकों के लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व देती हैं. इसके अलावा यहां के बाजार, खूबसूरत पार्क, म्यूजियम और शानदार वास्तुकला यात्रा को यादगार बना सकते हैं. यानी अगर आप मध्य एशिया की यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो ताशकंद को अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है.




