kausani tea garden visit | kausani tourist place


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Kausani Tea Garden: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित कौसानी के खूबसूरत चाय बागान इन दिनों देश भर के पर्यटकों की पहली पसंद बने हुए हैं. करीब 208 हेक्टेयर में फैले इन हरे-भरे बागानों से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों का नजारा साफ दिखाई देता है, जिसे देखकर खुद महात्मा गांधी ने कौसानी को ‘भारत का मिनी स्विट्जरलैंड’ कहा था. यहां आने वाले सैलानी न सिर्फ ऑर्गेनिक चाय बनने की पूरी प्रक्रिया को करीब से देख सकते हैं, बल्कि इस शांत माहौल में सुकून के पल भी बिता सकते हैं.

बागेश्वर: उत्तराखंड के बागेश्वर में कौसानी के प्रसिद्ध चाय बागान देशभर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. करीब 208 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले ये हरे-भरे चाय बागान प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों के अद्भुत दृश्यों के लिए जाने जाते हैं. यहां पहुंचने वाले पर्यटक न केवल ऑर्गेनिक चाय का स्वाद लेते हैं, बल्कि प्रकृति के बीच सुकून के कुछ पल भी बिताते हैं.

कौसानी को महात्मा गांधी ने भारत का मिनी स्विट्जरलैंड कहा था. यह स्थान नंदा देवी, त्रिशूल और पंचाचूली जैसी हिमालयी चोटियों के मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है. सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का नजारा बेहद आकर्षक दिखाई देता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. कौसानी चाय बागान के संचालक पवन परिहार बताते हैं कि गर्मियों और शरद ऋतु के दौरान दिल्ली, मुंबई, गुजरात समेत कई राज्यों से पर्यटक यहां घूमने आते हैं. कौसानी के चाय बागानों में तैयार होने वाली ऑर्गेनिक चाय देश और विदेश तक पहुंचती है. पर्यटक यहां चाय की पत्तियों की खेती और प्रसंस्करण की प्रक्रिया को भी करीब से देख सकते हैं.

दिल्ली से ऐसे पहुंचें कौसानी 
से कौसानी की दूरी लगभग 415 किलोमीटर है. दिल्ली से आने वाले यात्री ट्रेन के माध्यम से काठगोदाम पहुंच सकते हैं. इसके बाद टैक्सी या बस के जरिए करीब 140 किलोमीटर का सफर तय कर कौसानी पहुंचा जा सकता है. वहीं मुंबई और गुजरात से आने वाले पर्यटक पहले दिल्ली या बरेली तक हवाई यात्रा करते हैं और वहां से सड़क मार्ग द्वारा कौसानी पहुंचते हैं.
कौसानी में रहने के लिए बजट होटल से लेकर शानदार रिसॉर्ट तक उपलब्ध हैं. सामान्य तौर पर 3 से 4 दिन की यात्रा में एक व्यक्ति का खर्च 8 से 12 हजार रुपये तक आ सकता है. यदि पर्यटक बेहतर होटल, निजी टैक्सी और अन्य सुविधाएं लेते हैं, तो यह खर्च 15 से 25 हजार रुपये तक पहुंच सकता है.

कौसानी घूमने का सही समय
मार्च से जून और सितंबर से नवंबर के बीच का समय कौसानी घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और हिमालय की चोटियां भी साफ दिखाई देती हैं. बरसात के मौसम में यहां हरियाली तो बढ़ जाती है, लेकिन यात्रा के दौरान मौसम की अनिश्चितता बनी रहती है. प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण, हिमालयी दृश्य और ऑर्गेनिक चाय की खुशबू के कारण कौसानी के चाय बागान आज उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी खास पहचान बना चुके हैं.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें



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