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Health Tips : केला ऐसा फल है, जो हर घर में आसानी से मिल जाता है. लेकिन अक्सर लोग एक बात को लेकर परेशान रहते हैं कि केला काटने के कुछ देर बाद काला क्यों पड़ जाता है और क्या इसे खाना सुरक्षित होता है? कई बार केले के ऊपर काले धब्बे दिखते ही लोग उसे खराब समझकर फेंक देते हैं, जबकि हर बार ऐसा करना जरूरी नहीं होता. प्रयागराज के हेल्थ एक्सपर्ट डॉ संजीव कुमार ने कुछ जरूरी बातें बताई है.
केला काटने के बाद हवा के संपर्क में आते ही उसमें ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. इसी वजह से उसका रंग धीरे-धीरे भूरा या काला होने लगता है. गर्मियों में यह प्रक्रिया और तेज हो जाती है, क्योंकि ज्यादा तापमान और नमी केले को जल्दी पकाने का काम करते हैं.

जानकारों के अनुसार, केले पर हल्के काले धब्बे दिखना आम बात है. यह इस बात का संकेत होता है कि केला पूरी तरह पक चुका है और अंदर से ज्यादा मीठा हो गया है. ऐसे केले खाने में नुकसानदायक नहीं माने जाते. कई लोग इन्हीं पके केले का इस्तेमाल शेक, स्मूदी और बनाना ब्रेड बनाने में करते हैं.

हालांकि हर काला केला खाना सही नहीं होता. अगर केले से सड़ी हुई गंध आने लगे, उसमें फफूंदी दिखाई दे या अंदर का हिस्सा पूरी तरह काला और चिपचिपा हो जाए, तो उसे तुरंत फेंक देना चाहिए. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे केले में बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं.
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केले को ज्यादा देर तक ताजा रखने के लिए उसे ठंडी और हवादार जगह पर रखना बेहतर माना जाता है. कई लोग केले के डंठल को फॉयल या प्लास्टिक से कवर कर देते हैं, जिससे वह जल्दी नहीं पकता. वहीं कटे हुए केले पर थोड़ा नींबू रस लगाने से उसका रंग जल्दी काला नहीं पड़ता.

आजकल सोशल मीडिया पर केले के काले धब्बों को लेकर कई तरह की अफवाहें भी फैलती रहती हैं, लेकिन विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि सामान्य काले धब्बे पकने की प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं. इसलिए अगली बार केला थोड़ा काला दिखे, तो उसे तुरंत खराब समझने की गलती न करें.





