रिवाइज्ड रिटर्न से क्या-क्या सुधार सकते हैं?
अगर किसी करदाता ने अपनी मूल रिटर्न समय पर या विलंबित रिटर्न के रूप में दाखिल की है और बाद में कोई त्रुटि सामने आती है, तो वह संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकता है। इसके जरिए छूटी हुई आय को जोड़ा जा सकता है, गलत आय विवरण को सुधारा जा सकता है, डिडक्शन में संशोधन किया जा सकता है, टैक्स गणना की त्रुटियां ठीक की जा सकती हैं और जरूरत पड़ने पर गलत चुने गए आईटीआर फॉर्म को भी बदला जा सकता है। संशोधित रिटर्न दाखिल होने के बाद वही अंतिम और वैध रिटर्न मानी जाती है तथा पहले दाखिल रिटर्न स्वतः निरस्त हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करते समय समयसीमा का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। करदाता केवल निर्धारित अवधि के भीतर ही अपनी रिटर्न में बदलाव कर सकते हैं। यदि आयकर विभाग संबंधित मामले का असेसमेंट पूरा कर देता है, तो संशोधित रिटर्न दाखिल करने का विकल्प समाप्त हो जाता है। ऐसे मामलों में बाद में केवल अपडेटेड रिटर्न यानी आईटीआर-यू दाखिल करने का रास्ता बचता है, जिसमें अतिरिक्त टैक्स और ब्याज का भुगतान करना पड़ सकता है।




