Greenland Oil Drilling: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर बड़े दावे कर रहे हैं. इसी बीच एक अमेरिकी ऑयल कंपनी ने ग्रीनलैंड में बड़ा खेल कर दिया है. टेक्सास की ग्रीनलैंड एनर्जी नाम की कंपनी ने यहां ऑयल ड्रिलिंग की तैयारी शुरू कर दी है. सबसे हैरानी की बात यह है कि कंपनी ने ग्रीनलैंड गवर्नमेंट से इसकी परमिशन तक नहीं ली है. इस कंपनी का सीधा कनेक्शन ट्रंप के करीबियों से बताया जा रहा है. कंपनी ने ग्रीनलैंड के जेम्सन लैंड में भारी ड्रिलिंग इक्विपमेंट उतार दिए हैं. इसके बाद ग्रीनलैंड गवर्नमेंट पूरी तरह एक्शन में आ गई है. सरकार ने अमेरिकी कंपनी को कड़ी चेतावनी जारी की है. यह पूरा विवाद एक ट्रिलियन डॉलर के क्रूड ऑयल से जुड़ा है. अगर ग्रीनलैंड इस प्रोजेक्ट को परमिशन नहीं देता है तो अमेरिका और उसके बीच भारी टेंशन बढ़ सकती है.
अमेरिकी कंपनी ने बिना परमिशन जेम्सन लैंड में उतारे कंटेनर
ग्रीनलैंड एनर्जी ने पूर्वी तट के दूरदराज इलाके जेम्सन लैंड में अपने उपकरण पहुंचा दिए हैं. कंपनी के प्रतिनिधि ने जून में एक कम्युनिटी मीटिंग में गलत दावा किया था. उसने कहा था कि कंपनी को ड्रिलिंग इक्विपमेंट उतारने की परमिशन मिल गई है. इसके बाद स्थानीय लोगों ने समुद्र के रास्ते एक जहाज आते देखा. इस जहाज से करीब एक दर्जन कंटेनर तट पर उतारे गए.
ग्रीनलैंड गवर्नमेंट ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई है. सरकार ने कहा है कि भविष्य में किसी भी लॉजिस्टिक काम के लिए परमिशन लेना जरूरी होगा. मिनरल रिसोर्स अथॉरिटी की मंजूरी के बिना कोई काम नहीं होगा. फिलहाल सरकार ने उतारे गए इक्विपमेंट हटाने का आदेश नहीं दिया है. कंपनी का परमिशन एप्लीकेशन अभी सरकार के पास पेंडिंग है. लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि बिना आदेश आगे काम नहीं होगा.
क्या ग्रीनलैंड ऑयल प्रोजेक्ट का डोनाल्ड ट्रंप से कोई कनेक्शन है?
इस मामले ने इसलिए तूल पकड़ लिया है क्योंकि कंपनी का संबंध ट्रंप के करीबियों से है. ग्रीनलैंड एनर्जी के कई लोग ट्रंप के राजनीतिक और रणनीतिक ग्रुप से जुड़े हैं. कंपनी ने एक डॉक्युमेंट्री सीरीज के लिए डॉ फिल को जोड़ा है. डॉ फिल को डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा समर्थक माना जाता है. इसके अलावा कंपनी का एक डायरेक्टर अमेरिकी नेवी का पूर्व अधिकारी है. यह अधिकारी ट्रंप प्रशासन के मिसाइल डिफेंस प्लान ‘गोल्डन डोम’ से भी जुड़ा रहा है.
हालांकि कंपनी के चेयरमैन लैरी स्वेट्स ने इन दावों को गलत बताया है. उन्होंने कहा, ‘इस ऑयल प्रोजेक्ट का अमेरिका के ग्रीनलैंड पर कंट्रोल करने से कोई संबंध नहीं है’. स्वेट्स के मुताबिक यह पूरी तरह से एक बिजनेस और एनर्जी सेक्टर का प्रोजेक्ट है. लेकिन ट्रंप के लगातार बयानों ने इस पूरे विवाद को और ज्यादा भड़का दिया है.
एक ट्रिलियन डॉलर का क्रूड ऑयल पाने के लिए कंपनी का क्या है मास्टरप्लान?
जेम्सन लैंड के नीचे क्रूड ऑयल का बहुत बड़ा खजाना छिपा होने की उम्मीद है. कंपनी का दावा है कि यहां करीब एक ट्रिलियन डॉलर का क्रूड ऑयल हो सकता है. इस खजाने को निकालने के लिए कंपनी ने बड़ा प्लान बनाया है. शुरुआत में कंपनी दो कुओं की ड्रिलिंग पर 6 करोड़ डॉलर खर्च करने वाली थी. लेकिन अब कंपनी ने तय किया है कि पहले सिर्फ एक कुएं की ड्रिलिंग की जाएगी.
ग्रीनलैंड ने पर्यावरण की रक्षा के लिए 2021 से नए ऑयल लाइसेंस देना बंद कर रखा है. हालांकि ब्रिटेन की एक कंपनी 80 माइल के पास पहले से खोज के अधिकार मौजूद हैं. अब अमेरिकी कंपनी इस प्रोजेक्ट में अपनी बड़ी हिस्सेदारी खरीदने की कोशिश कर रही है.
ग्रीनलैंड एनर्जी इस पूरे एक्सप्लोरेशन अभियान के लिए फाइनेंस भी उपलब्ध कराएगी. प्लान के मुताबिक 12 सितंबर को 300 कंटेनर लेकर एक जहाज कनाडा से निकलेगा. अक्टूबर में कुएं की ड्रिलिंग शुरू करने का टारगेट सेट किया गया है.
ऑयल रिजर्व के लालच में ग्रीनलैंड का पर्यावरण खतरे में पड़ जाएगा!
इस पूरे प्रोजेक्ट के सामने पर्यावरण सुरक्षा एक बहुत बड़ा मुद्दा बन गया है. कंपनी जहां ड्रिलिंग करना चाहती है वह इलाका एक कंजर्वेशन जोन में आता है. इस इलाके को रामसर कन्वेंशन के तहत वेटलैंड प्रोटेक्शन का दर्जा मिला हुआ है. ऐसे में ग्रीनलैंड की लोकल लीडरशिप के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. एक तरफ क्रूड ऑयल से होने वाला भारी भरकम आर्थिक फायदा है. वहीं दूसरी तरफ आर्कटिक के बेहद संवेदनशील पर्यावरण को बचाने की जिम्मेदारी है.
ग्रीनलैंड असल में डेनमार्क का एक ऑटोनॉमस इलाका है. यहां के प्राकृतिक संसाधनों पर फैसले लेने का अधिकार लोकल गवर्नमेंट के पास ही है. अब ऑयल ड्रिलिंग पर फैसला सिर्फ एक बिजनेस डील नहीं रह गया है. यह ग्रीनलैंड की एनवायरमेंट पॉलिसी और लोकल कंट्रोल का बड़ा टेस्ट बन गया है. अगर परमिशन नहीं मिलती है तो अमेरिका और ग्रीनलैंड में राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है.




