How Donald Trump Steal Iran Oil : ट्रंप ने ईरान से कैसे की तेल चोरी? ओमान-UAE को घसीटा, US Apache यूं ही शहीद नहीं हुआ!


वॉशिंगटन: ईरान के साथ भले ही ट्रंप ने जंग खत्म करने की शुरुआत कर दी है लेकिन उनके बस में जितना डैमेज था, वो ईरान में कर चुके हैं. मिसाइलें-ड्रोन की तबाही तो दुनिया ने देखी लेकिन ट्रंप ने ईरानी तेल को भी नहीं छोड़ा. ट्रंप ने होर्मुज नाकेबंदी की आड़ में छुपकर ईरानी तेल चोरी किया है. ये बात उन्होंने कुछ दिन पहले ही कबूली है लेकिन अब सामने आया है कि ट्रंप ने इस चोरी को अंजाम आखिरी कैसे दिया है? ट्रंप की इसी चालबाजी की नतीजा है कि उनका अपाचे हेलीपॉप्टर शहीद हो गया. ट्रंप ने इस तेल चोरी को अंजाम देने के लिए ईरान की ही पुरानी और शातिर ‘स्मगलिंग तकनीक’ का इस्तेमाल किया, जिससे ईरान सालों तक अमेरिकी प्रतिबंधों को ठेंगा दिखाता आया था.

ओमान और UAE के समंदर में अमेरिका का ‘डार्क फ्लीट’ ऑपरेशन

रॉयटर्स के मुताबिक अमेरिकी सेना मई 2026 की शुरुआत से ही खाड़ी के समंदर में एक बेहद सीक्रेट ‘शिप-टू-शिप’ तेल ट्रांसफर ऑपरेशन चला रही है. इसके लिए अमेरिका ने ओमान और UAE को भी इस खेल में घसीट लिया है. सैटेलाइट तस्वीरों और खुफिया सूत्रों के मुताबिक, दो बेहद खास ठिकानों पर ये पूरा सीक्रेट खेल रचा जा रहा है.

  1. पहला ठिकाना: संयुक्त अरब अमीरात में फुजैराह का समुद्री तट.
  2. दूसरा ठिकाना: ओमान का बेहद महत्वपूर्ण ‘सोहार’ बंदरगाह.

होर्मुज स्ट्रेट के मुहाने पर ईरान ने ‘परशियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ नाम की एक नई संस्था बनाकर पूरे इलाके को अपने कब्जे में ले रखा है. वहां बात न मानने वाले जहाजों पर ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) सीधे ड्रोन और मिसाइलों से हमला कर देती है. इस खौफ से बचने के लिए अमेरिका ने यूएई की सरकारी तेल कंपनी ADNOC और कुवैत ऑयल टैंकर कंपनी के जहाजों को ओमान और फुजैराह के तटों पर बुलाकर गुपचुप तरीके से तेल का खेल शुरू किया.

तो इसलिए शहीद हुआ था अमेरिकी Apache हेलीकॉप्टर!

बीते 9 जून 2026 को ईरान ने अमेरिका के एक बेहद आधुनिक Apache हेलीकॉप्टर को मार गिराया था, जिसके बदले में अमेरिका ने ईरान पर जवाबी बमबारी भी की थी. तब दुनिया को असली वजह नहीं पता थी. अब चार बड़े रक्षा सूत्रों और एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने यराज खोला है कि वो अपाचे हेलीकॉप्टर कोई मामूली गश्त पर नहीं था, बल्कि ये इसी सीक्रेट तेल चोरी और ट्रांसफर मिशन की सुरक्षा में तैनात था.

जिस दिन ईरान ने अमेरिकी अपाचे को मार गिराया, ठीक उसी दिन सैटेलाइट इमेज में ओमान के सोहार बंदरगाह के पास 6 जोड़ी विशालकाय तेल टैंकर आपस में चिपके हुए दिखाई दिए थे. हालांकि अमेरिकी डिफेंस ऑफिशियल इस बात को कैमरे पर कबूल करने से भाग रहे हैं और कह रहे हैं कि उनकी सेंटकॉम फोर्स ऐसे किसी सीधे काम में शामिल नहीं है, लेकिन सच यही है कि समंदर के ऊपर उड़ रहे हवाई ड्रोन, वॉटर ड्रोन और यही अपाचे हेलीकॉप्टर उन गुप्त काफिलों को रास्ता दिखा रहे थे. गनीमत ये रही कि अपाचे के दोनों क्रू मेंबर्स को एक अमेरिकी ड्रोन बोट ने वक्त रहते बचा लिया था.

बत्तियां बुझाकर, ट्रांसपोंडर बंद… समंदर में आधी रात का खौफनाक खेल

ये ऑपरेशन इतना खतरनाक और खुफिया था कि इसे पूरी तरह से अमेरिकी मिलिट्री कंट्रोल कर रही थी. इस खेल को खेलने के लिए बकायदा एक डरावना और शातिर तरीका अपनाया जाता था.

  • लाइट्स ऑफ और ट्रांसपोंडर बंद: जो भी तेल टैंकर होर्मुज की तरफ बढ़ते हैं, वे अपनी सारी बत्तियां बुझा देते हैं और जहाजों की लोकेशन बताने वाले ‘ट्रांसपोंडर’ को पूरी तरह बंद कर देते हैं ताकि ईरान के राडार उन्हें पकड़ न सकें.
  • दूरी और टाइमिंग: ये जहाज एक निश्चित मीटिंग पॉइंट पर पहुंचने के बाद एक-दूसरे से ठीक 3,000 से 4,000 मीटर की दूरी बनाकर चलते हैं.
  • 30 से 40 घंटे का डेंजर जोन: जैसे ही ये जहाज ईरान के कंट्रोल वाले इलाके से ठीक बाहर निकलते हैं, वहां पहले से खड़े दुनिया के सबसे बड़े तेल टैंकरों VLCCs के बिल्कुल बगल में आकर चिपक जाते हैं. इसके बाद 24 से 40 घंटों तक समंदर की लहरों के बीच एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल पलटा जाता है.

ट्रंप ने ईरान से कितना तेल चुरा लिया?

रॉयटर्स की जांच के मुताबिक, 11 जून तक करीब 17 जोड़ी जहाज एक साथ इस खतरनाक काम में लगे हुए थे और मई से अब तक कम से कम 92 जहाज इस सीक्रेट नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं. इस चोर रास्ते से अमेरिका अब तक 9 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल निकाल चुका है. हालांकि युद्ध से पहले रोजाना गुजरने वाले 2 करोड़ बैरल के मुकाबले ये आंकड़ा छोटा है, लेकिन ट्रंप प्रशासन इसके जरिए दुनिया में तेल की सप्लाई बनाए रखने और महंगाई को रोकने की पूरी कोशिश कर रहा है.

अमेरिका ने लिया बहुत बड़ा रिस्क

समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ये कोई स्थायी समाधान नहीं है बल्कि युद्ध के बीच निकाला गया एक बेहद जोखिम भरा जुगाड़ है. बिना लाइट और बिना राडार के रात के अंधेरे में तैरते इन विशालकाय जहाजों के आपस में टकराने का भारी खतरा बना रहता है. ट्रंप प्रशासन के लिए इस समय नियम-कायदों से ज्यादा जरूरी खाड़ी के तेल पर अपना दबदबा बनाए रखना है, भले ही इसके लिए उन्हें ईरान की ही तरह ‘समुद्री डकैतों’ वाला पैंतरा क्यों न अपनाना पड़े.



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