अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक ही दिन में तीन अलग-अलग देशों के नेताओं से बात की है. उन्होंने पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की, फिर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बैठक की और इसके बाद लेबनान के बातचीत की. इन बैठकों ने रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान और मध्य पूर्व की राजनीति को चर्चा हुई. इन्हे सिलसिलेवार से समझते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने आखिर किससे क्या कहा?
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात की. करीब एक घंटे तक चली इस बैठक को लेकर जेलेंस्की ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन की सुरक्षा, पैट्रियट मिसाइलों को बनाने और रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों पर चर्चा हुई.
पैट्रियट मिसाइल रही सबसे बड़ा मुद्दा
जेलेंस्की ने बताया कि बैठक में पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों को बनाने के लिए लाइसेंस और यूक्रेन की हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने पर बात हुई. उन्होंने कहा कि रूस लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है. ऐसे में यूक्रेन के लिए सबसे बड़ी जरूरत मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम है, ताकि शहरों और अहम ठिकानों को सुरक्षित रखा जा सके.
युद्ध खत्म करने के लिए तेज होगी कूटनीति
बैठक में सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशों पर भी चर्चा हुई. जेलेंस्की ने कहा कि दोनों देशों की टीमें आगे भी लगातार बातचीत करेंगी. जल्द ही अगले कदमों को लेकर रणनीति तय करेंगे.
अमेरिका से क्या चाहता है यूक्रेन?
बैठक से पहले यूक्रेन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया था कि कीव की सबसे बड़ी प्राथमिकता अमेरिका से पैट्रियट एयर डिफेंस मिसाइलों का नया पैकेज खरीदने की मंजूरी हासिल करना है. यूक्रेन लंबे समय से अपने पश्चिमी सहयोगियों से अतिरिक्त पैट्रियट सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलों की मांग करता रहा है. रूस ने हाल के महीनों में बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं.
नेतन्याहू-ट्रंप के बीच कैसी रही बात?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में अहम मुलाकात की. फरवरी में ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की बैठक थी. करीब 90 मिनट तक चली इस बैठक को व्हाइट हाउस ने अहम बताया.
इजरायल लंबे समय से ईरान के गुप्त परमाणु ठिकानों पर सख्त कार्रवाई की मांग करता आया है. बताया जा रहा है कि नेतन्याहू इस बैठक में ईरान के अंडरग्राउंड ठिकानों और उसकी बढ़ती गतिविधियों को लेकर नए खुफिया इनपुट ट्रंप के सामने रख रहे हैं. इजरायल चाहता है कि अमेरिका ईरान पर सैन्य दबाव पूरी तरह बनाए रखे. इससे भविष्य में कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा.
ट्रंप ने कहा कि उन्हें पिकएक्स माउंटेन में ईरान की गतिविधियों की पूरी जानकारी है. यह माना जा रहा है यहां ईरान के परमाणु ठिकाने हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि ईरान वहां जो भी कर रहा है, वह फिलहाल कोई बड़ा खतरा नहीं है. ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि नेतन्याहू चाहते हैं कि अमेरिका इस मामले में लगातार एक्टिव बना रहे.
घरेलू राजनीति का भी दबाव
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब दोनों नेता अपने-अपने देशों में राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे हैं. इजराइल में नेतन्याहू को जल्द चुनाव का सामना करना है और विपक्ष लगातार उनकी आलोचना कर रहा है. वहीं अमेरिका में ट्रंप पर भी ईरान से जुड़े युद्ध को खत्म करने का दबाव बढ़ रहा है. आलोचकों का कहना है कि लंबे संघर्ष का असर अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ रहा है, जबकि नवंबर में मध्यावधि चुनाव भी होने हैं.
लेबनान के राष्ट्रपति जेसेफ औन भी व्हाइट हाउस पहुंचे. वहां उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप से हिजबुल्लाह और इजरायल की गतिविधियों पर चर्चा की. अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बातचीत शुरू होने से पहले ही माहौल काफी सकारात्मक है. दोनों पक्षों के बीच आगे बढ़ने की अच्छी संभावना दिखाई दे रही है.
ट्रंप-आउन मुलाकात के बाद बढ़ा भरोसा
अधिकारी के ने बताया कि लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया मुलाकात के बाद लेबनान-इजरायल के बीच शांति प्रक्रिया को नई गति मिली है. इसके अलावा दक्षिणी लेबनान में शुरू किए गए पहले पायलट जोन को भी अच्छी शुरुआत माना जा रहा है.
किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच शांति वार्ता का अगला दौर 4 से 6 अगस्त के बीच इटली की राजधानी रोम में होगा. रोम में होने वाली बैठक में दोनों देशों की तकनीकी टीमें कई अहम मुद्दों पर काम करेंगी. इनमें दक्षिणी लेबनान में पायलट ज़ोन का विस्तार करना अहम है.
इसके अलावा इजरायल और लेबनान के बीच सीमा विवादों का समाधान करना और अमेरिका-इजरायल-लेबनान समझौते को पूरी तरह लागू करना शामिल है. वहीं भविष्य के लिए स्थायी शांति और सुरक्षा समझौते की दिशा में आगे बढ़ना और आतंकवादी संगठनों को निरस्त्र करने पर जोर दिया गया.




