Health Tips: भीषण गर्मी के इस मौसम में फूड पॉइज़निंग के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं. तापमान बढ़ने के साथ ही खाना और पानी जल्दी खराब हो जाता है, जिससे बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी तेजी से पनपते हैं. यही वजह है कि गर्मियों में थोड़ी सी लापरवाही भी पेट से जुड़ी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है. खासकर बाहर का खुला खाना, सड़क किनारे मिलने वाले जूस या कटे फल और लंबे समय तक रखा हुआ बासी भोजन सबसे ज्यादा खतरा पैदा करते हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए सबसे जरूरी है साफ-सफाई और सही खानपान की आदतें. गर्मियों में किसी भी पके हुए भोजन को कमरे के तापमान पर दो घंटे से ज्यादा नहीं छोड़ना चाहिए. बचा हुआ खाना तुरंत फ्रिज में रखना जरूरी है, ताकि उसमें बैक्टीरिया न पनपें. इसके अलावा फल और कच्ची सब्जियों को इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धोना चाहिए और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाकर रखना चाहिए
क्या-क्या रखें सावधानी?
पानी के मामले में भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया गया पानी ही पीना चाहिए, क्योंकि दूषित पानी फूड पॉइज़निंग का सबसे बड़ा कारण होता है. इसके साथ ही खाना बनाने और खाने से पहले कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी तरह के संक्रमण से बचा जा सके. डॉक्टर अनिल पटेल बताते हैं कि फूड पॉइज़निंग होने पर शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है, जिससे कमजोरी और डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ सकती है. ऐसे में मरीज को लगातार हाइड्रेटेड रखना बहुत जरूरी है. इसके लिए ओआरएस का घोल, नारियल पानी या सादा पानी थोड़ी-थोड़ी देर में पीते रहना चाहिए. जब उल्टी-दस्त कम होने लगें, तो हल्का और सुपाच्य भोजन जैसे खिचड़ी, दलिया, केला या उबले आलू का सेवन करना फायदेमंद होता है.
डॉक्टर की खास सलाह
डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि इस दौरान मसालेदार, तला-भुना खाना, चाय-कॉफी और दूध से बनी चीजों से परहेज करना चाहिए, क्योंकि ये पेट की समस्या को और बढ़ा सकते हैं. आमतौर पर फूड पॉइज़निंग 24 से 48 घंटे में ठीक हो जाती है, लेकिन अगर लक्षण गंभीर हो जाएं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. फूड पॉइज़निंग के सामान्य लक्षणों में पेट दर्द, ऐंठन, दस्त, उल्टी, मतली, हल्का बुखार, सिर दर्द और कमजोरी शामिल हैं. वहीं, गंभीर स्थिति में लगातार तीन दिन से ज्यादा दस्त होना, तेज बुखार, नजर धुंधली होना, निगलने में दिक्कत, पेशाब कम आना और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिख सकते हैं. ऐसे संकेत मिलने पर देरी करना खतरनाक साबित हो सकता है.
दरअसल, फूड पॉइजनिंग बैक्टीरिया, वायरस और परजीवियों के कारण होती है, जो दूषित भोजन और पानी के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं. साल्मोनेला, ई.कोली, लिस्टेरिया जैसे बैक्टीरिया, नोरोवायरस जैसे वायरस और गियार्डिया जैसे परजीवी इसके प्रमुख कारण हैं. कई बार अधपका खाना, गंदे हाथों से बना भोजन या सही तरीके से स्टोर न किया गया खाना भी संक्रमण का कारण बन जाता है. इसलिए जरूरी है कि खाना बनाते, खाते और स्टोर करते समय पूरी साफ-सफाई और हाइजीन का ध्यान रखा जाए. कच्चा या अधपका भोजन न खाएं, बचे हुए खाने को ढककर रखें और समय पर फ्रिज में स्टोर करें. इसके अलावा फफूंद लगा या खराब हो चुका भोजन तुरंत फेंक देना चाहिए.
गर्मियों में थोड़ी सी सावधानी और सही आदतें अपनाकर फूड पॉइज़निंग से आसानी से बचा जा सकता है. अगर खानपान में स्वच्छता और सतर्कता बरती जाए, तो इस आम लेकिन खतरनाक समस्या से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखा जा सकता है.





