Harsh Tourism Point: राजस्थान का ‘केदारनाथ’ बनेगा नया टूरिज्म हब, 3100 फीट ऊंचे हर्ष पर्वत का होगा कायाकल्प


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Harsh Tourism Point: सीकर का 3100 फीट ऊंचा हर्ष पर्वत, जिसे राजस्थान का ‘केदारनाथ’ भी कहा जाता है, अब पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा. यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए ट्रैकिंग ट्रेल, प्रशिक्षित गाइड, कैंटीन और अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इस परियोजना का उद्देश्य धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ एडवेंचर और इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देना है. बेहतर सुविधाएं मिलने से देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. हर्ष पर्वत जल्द ही राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी नई पहचान बना सकता है.

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Harsh Tourism Point: सीकर जिले में 3100 फीट की ऊंचाई पर स्थित हर्ष पर्वत अब धार्मिक आस्था के साथ-साथ एडवेंचर और ईको-टूरिज्म का बड़ा केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है. जिला प्रशासन ने यहां पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की तैयारी शुरू कर दी है. डिस्ट्रिक्ट ईको टूरिज्म कमेटी की बैठक में हर्ष पर्वत पर ट्रैकिंग ट्रेल्स, टूरिस्ट गाइड, कैंटीन, पार्किंग, चेक पोस्ट और पुलिस चौकी जैसी सुविधाएं विकसित करने का मसौदा तैयार किया गया है. प्रस्ताव जल्द ही राजस्थान ईको टूरिज्म डेवलपमेंट सोसायटी को भेजा जाएगा. मंजूरी मिलने के बाद हर्ष पर्वत पर आने वाले पर्यटकों को पहले से कहीं बेहतर अनुभव मिलेगा.

हर्ष पर्वत पर पिछले कुछ वर्षों में ट्रैकिंग और नेचर टूरिज्म का ग्राफ तेजी से बढ़ा है. इसे देखते हुए प्रशासन सुरक्षित और व्यवस्थित ईको ट्रेल्स विकसित करेगा, ताकि प्रकृति प्रेमी, ट्रैकर्स और परिवार के साथ आने वाले पर्यटक आसानी से पहाड़ी की सुंदरता का आनंद ले सकें. सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रवेश बिंदुओं पर चेक पोस्ट, पार्किंग और पुलिस चौकी की भी योजना बनाई गई है.

स्थानीय युवाओं को टूरिस्ट गाइड का प्रशिक्षण दिया जाएगा
वन विभाग और स्थानीय वन सुरक्षा समितियां सफाई, निगरानी और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी संभालेंगी. इस परियोजना की सबसे खास बात स्थानीय युवाओं को पर्यटन से जोड़ने की योजना है. चयनित लोगों को प्रोफेशनल टूरिस्ट गाइड का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे पर्यटकों को हर्ष पर्वत के इतिहास, पुरातात्विक महत्व, धार्मिक मान्यताओं और प्राकृतिक संपदा की जानकारी दे सकें. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

जंगलों में हरियाली लौट आई
इधर, प्रकृति ने भी इस बार हर्ष पर्वत को नया रूप दे दिया है. जुलाई महीने में मानसून की बारिश के बाद पहाड़ पूरी तरह हरियाली से ढक गया है. चट्टानों के बीच मखमली घास उग आई है, जंगलों में हरियाली लौट आई है और तापमान भी सुहावना हो गया है. यही वजह है कि इस बार सामान्य से पहले ही बड़ी संख्या में पर्यटक हर्ष पर्वत पहुंचने लगे हैं. बारिश के बाद बादलों से घिरा पहाड़ी क्षेत्र, घुमावदार सड़कें और प्राकृतिक नजारे लोगों को खासा आकर्षित कर रहे हैं.

राजस्थान का केदारनाथ कहा जाता है
धार्मिक दृष्टि से भी हर्ष पर्वत का विशेष महत्व है. इसे राजस्थान का केदारनाथ कहा जाता है. इस जगह पर भगवान शिव का प्राचीन हर्षनाथ मंदिर स्थित है. मंदिर परिसर में हजारों वर्ष पुरानी दुर्लभ मूर्तियां, सफेद शिवलिंग, पंचमुखी शिवलिंग और भगवान गणेश के अर्द्धनारीश्वर स्वरूप की अनूठी प्रतिमा मौजूद है. इतिहासकारों के अनुसार औरंगजेब के समय मंदिर को क्षति पहुंचाई गई थी. जिसके अवशेष आज भी यहां देखे जा सकते हैं.

प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है
खाटूश्यामजी से महज 40 किलोमीटर दूर होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के बाद हर्ष पर्वत भी पहुंचते हैं. वन विभाग के डीएफओ दीपक कुमार के अनुसार ट्रैकिंग ट्रेल्स, कैंटीन, पार्किंग और गाइड जैसी सुविधाओं का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है. योजना लागू होने के बाद हर्ष पर्वत केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि राजस्थान के प्रमुख ईको-टूरिज्म और एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में नई पहचान हासिल कर सकता है.

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Jagriti Dubey

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