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Relief for H-1B Visa Workers: अमेरिका में ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय H-1B वीजा धारकों के लिए राहत की खबर आई है. ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रीय हित और आर्थिक योगदान देने वाले विदेशी पेशेवरों को मौजूदा प्रक्रिया के तहत ग्रीन कार्ड आवेदन जारी रखने की अनुमति मिल सकती है. पहले प्रस्ताव था कि कई आवेदकों को अपने देश लौटकर प्रक्रिया पूरी करनी होगी. ऐसे में इस बदलाव से प्रवासी भारतीयों को राहत मिलेगी.
मार्को रूबियो के आते ही आई खुशखबरी.
Relief for Indian Workers in US: एक तरफ भारत में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो दौरे पर आए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका की ओर से ऐसी खुशखबरी आई है कि बहुत से भारतीयों के चेहरे पर खुशी चमक जाएगी. अमेरिका में ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे लाखों विदेशी कर्मचारियों, खासकर भारतीय पेशेवरों के लिए राहत की खबर सामने आई है. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में प्रस्तावित बदलावों को लेकर उठी चिंताओं के बीच कुछ नरमी के संकेत दिए हैं. H-1B वीजा लेकर काम करने वाले भारतीयों के लिए ये काफी राहत की खबर है.
दरअसल डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन एक नई नीति लाने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत कई लोगों को अमेरिका में रहकर ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पूरी करने के बजाय अपने देश लौटकर आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है. इस प्रस्ताव ने खासतौर पर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और H-1B वीजा धारकों की चिंता बढ़ा दी थी. अब अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा के प्रवक्ता जैक काहलर ने कहा है कि जिन लोगों की मौजूदगी अमेरिका के राष्ट्रीय हित या आर्थिक फायदे से जुड़ी है, उन्हें मौजूदा प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने की अनुमति मिल सकती है.
क्या है अमेरिका का नया प्रस्ताव?
- काहलर ने कहा कि जो आवेदक अमेरिका को आर्थिक लाभ पहुंचाते हैं या जिनका काम राष्ट्रीय हित से जुड़ा है, उनके मामलों पर सकारात्मक तरीके से विचार किया जाएगा. वहीं कुछ अन्य लोगों को व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर विदेश जाकर प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा जा सकता है.
- आपको बता दें कि अब तक अमेरिका में कई विदेशी कर्मचारी एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस प्रक्रिया के जरिए देश में रहते हुए ही ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते थे. इस दौरान उन्हें अमेरिका छोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती थी.
- प्रस्तावित बदलाव के तहत बड़ी संख्या में लोगों को अपने देश वापस जाकर अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है. अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग का कहना है कि यह कदम इमिग्रेशन सिस्टम को उसके बेसिक स्ट्रक्चर में वापस लाने और कथित खामियों को दूर करने के लिए उठाया जा रहा है.
भारतीयों पर होगा सबसे ज्यादा असर
अमेरिका की नीति में बदलाव का सबसे बड़ा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है. अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड बैकलॉग में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है. खासकर EB-2 और EB-3 श्रेणी में आवेदन करने वाले हजारों भारतीयों को पहले से ही 10 साल या उससे ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है. इमीग्रेशन वकीलों का कहना है कि अगर बड़ी संख्या में लोगों को विदेश जाकर प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी, तो अमेरिकी दूतावासों में भारी भीड़ और देरी हो सकती है. इससे कई लोग लंबे समय तक अपने परिवार और नौकरी से दूर फंस सकते हैं. आवेदकों को अब ये साबित करना पड़ सकता है कि ये मामला असाधारण और विशेष महत्व का है, यानि सिर्फ नियमों का पालन करना ही पर्याप्त नहीं होगा.
कानूनी चुनौती भी है विकल्प
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नई नीति को अदालत में चुनौती दी जा सकती है. कई सवाल अब भी बाकी हैं, जैसे यह नियम कब लागू होगा और किन लोगों पर इसका असर पड़ेगा. फिलहाल ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय हित से जुड़े कुशल विदेशी कर्मचारियों को राहत दी जा सकती है. इससे भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और H-1B वीजा धारकों को कुछ उम्मीद जरूर मिली है, लेकिन ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है.
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News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें





