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रॉयटर्स की ओर से समीक्षा की गई सैटेलाइट तस्वीरों में दावा किया गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बाद UAE और ओमान के पास समुद्र में बड़े पैमाने पर जहाज से जहाज तेल ट्रांसफर किया जा रहा था. रिपोर्ट के मुताबिक, मई से अब तक 116 से ज्यादा जहाज इस ऑपरेशन में शामिल रहे हैं और करीब 9 करोड़ बैरल तेल भेजा गया है.
जहाज सेजहाज का तेल ट्रांसफर.
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने के बाद समुद्र में तेल पहुंचाने का एक नया रास्ता तैयार कर लिया गया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने कुछ सैटेलाइट तस्वीरों की समीक्षा की है. इन तस्वीरों में दिखता है कि ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के तट के पास समुद्र में बड़े पैमाने पर जहाज से जहाज (Ship-to-Ship) तेल ट्रांसफर किया जा रहा है. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी अमेरिकी सेना कर रही थी, हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस दावे से इनकार किया है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट कहती है कि 2 मई से 11 जून के बीच ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में फुजैराह (UAE) और ओमान के सोहर बंदरगाह के पास दर्जनों तेल टैंकर एक-दूसरे के साथ खड़े दिखाई दिए. इन जहाजों के बीच कई घंटों तक समुद्र में ही तेल ट्रांसफर किया गया. 9 जून को ली गई तस्वीरों में 12 जोड़ी टैंकर एक साथ ऑपरेशन करते दिखे, जबकि 11 जून को यह संख्या बढ़कर 17 जोड़ी जहाजों तक पहुंच गई. रिपोर्ट का दावा है कि मई की शुरुआत से अब तक इस नेटवर्क में 116 से ज्यादा जहाज शामिल हो चुके हैं.
कैसे हो रहा तेल ट्रांसफर?
रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे टैंकर पहले तय जगह पर पहुंचते हैं. इसके बाद वे ईरान के दावे वाले समुद्री क्षेत्र से आगे निकलकर बड़े वेरी लार्ज क्रूड कैरियर्स (VLCCs) के साथ जुड़ जाते हैं. एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल ट्रांसफर करने की प्रक्रिया 24 से 40 घंटे तक चलती है. इसके बाद बड़े टैंकर दुनिया के अलग-अलग देशों के लिए रवाना हो जाते हैं. रॉयटर्स ने सैटेलाइट तस्वीरों और शिपिंग डेटा के आधार पर अनुमान लगाया है कि मई की शुरुआत से अब तक इस नेटवर्क के जरिए करीब 9 करोड़ बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद भेजे जा चुके हैं. यह वही शटलिंग तकनीक है जिसका इस्तेमाल ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों से बचकर तेल निर्यात करने के लिए करता रहा है.
अमेरिकी सेना की भूमिका पर क्या दावा?
रिपोर्ट में चार सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि 9 जून को ईरान की ओर से मार गिराए गए अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर का संबंध भी इसी तरह के मिशन से जुड़ा था. दूसरी ओर, एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने Reuters से कहा कि US Central Command (CENTCOM) की कोई भी सेना इस समुद्री तेल ट्रांसफर ऑपरेशन में शामिल नहीं थी.
क्यों शुरू करना पड़ा यह ऑपरेशन?
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बाद ईरान ने प्रभावी रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया. इससे दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक बाधित हो गया. ऐसे में सामान्य समुद्री मार्ग प्रभावित होने के बाद यह वैकल्पिक शिप-टू-शिप ट्रांसफर नेटवर्क तैयार किया गया, ताकि खाड़ी देशों से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई पूरी तरह न रुके.
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Yogendra Mishra holds a degree in Journalism from the University of Allahabad. He has been actively associated with the media industry since 2017 and brings extensive experience across various domains of journa…और पढ़ें




