बारिश में जा रहे पहाड़ घूमने? न करना ये 8 गलतियां, जानिए फंस जाने पर कैसे निकलें


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Bageshwar News : मानसून के दौरान उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. हरे-भरे पहाड़, झरने और बादलों से ढकी वादियां हर किसी का मन मोह लेती हैं, लेकिन यही मौसम सबसे ज्यादा जोखिम भरा भी माना जाता है. बारिश के मौसम में पहाड़ी क्षेत्रों में रात के समय सफर करना जोखिम भरा हो सकता है. अंधेरे में सड़क पर गिरे पत्थर, भूस्खलन, पानी का बहाव या खराब सड़क आसानी से दिखाई नहीं देती है. अगर रास्ते में लैंडस्लाइड जोन का बोर्ड लगा हो, तो वहां अनावश्यक रूप से वाहन रोककर फोटो या वीडियो बनाने से बचें. सही जानकारी लेकर निकलने से समय, पैसा और जोखिम तीनों कम हो जाते हैं.

मानसून में पहाड़ों का मौसम कुछ ही मिनटों में बदल सकता है, इसलिए घर से निकलने से पहले मौसम विभाग की ताजा जानकारी जरूर देखें. साथ ही जिस मार्ग से यात्रा करनी है, वहां सड़क खुली है या नहीं, इसकी जानकारी प्रशासन या संबंधित विभाग से प्राप्त करें. कई बार भारी बारिश के कारण सड़कें घंटों या कई दिनों तक बंद रहती हैं. बिना जानकारी के निकलने पर बीच रास्ते में फंसने की संभावना बढ़ जाती है. मौसम खराब होने की चेतावनी मिलने पर यात्रा टालना ही सबसे सुरक्षित विकल्प होता है. सही जानकारी लेकर निकलने से समय, पैसा और जोखिम तीनों कम हो जाते हैं.

मानसून के दौरान जिला प्रशासन और मौसम विभाग समय-समय पर एडवाइजरी जारी करते हैं. इनका उद्देश्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है, यदि किसी क्षेत्र में रेड, ऑरेंज या येलो अलर्ट जारी किया गया हो तो उसे हल्के में बिल्कुल न लें. प्रशासन जिन रास्तों पर जाने से मना करे, वहां जाने की कोशिश न करें. कई बार पर्यटक रोमांच के लिए चेतावनी को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे दुर्घटनाएं हो जाती हैं. सुरक्षित यात्रा के लिए सरकारी निर्देशों का पालन करना सबसे जरूरी कदम है. प्रशासन की सलाह आपकी सुरक्षा के लिए होती है, इसलिए उसे प्राथमिकता दें.

बारिश के मौसम में पहाड़ी क्षेत्रों में रात के समय सफर करना जोखिम भरा हो सकता है. अंधेरे में सड़क पर गिरे पत्थर, भूस्खलन, पानी का बहाव या खराब सड़क आसानी से दिखाई नहीं देती है. कई जगह मोबाइल नेटवर्क भी नहीं मिलता, जिससे आपातकाल में मदद मिलने में परेशानी हो सकती है. यदि किसी कारण से रास्ता बंद हो जाए तो रात में राहत कार्य भी प्रभावित होता है. इसलिए कोशिश करें कि सुबह या दिन के समय ही यात्रा करें, शाम होने से पहले अपने गंतव्य तक पहुंच जाएं. दिन में यात्रा करना अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक माना जाता है.

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मानसून के दौरान पहाड़ों में कई स्थान भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील होते हैं. ऐसे इलाकों में चट्टानें और पत्थर अचानक गिर सकते हैं. यदि रास्ते में लैंडस्लाइड जोन का बोर्ड लगा हो, तो वहां अनावश्यक रूप से वाहन रोककर फोटो या वीडियो बनाने से बचें. कई हादसे केवल लापरवाही के कारण होते हैं. यदि सड़क पर मलबा गिर रहा हो, तो तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं और प्रशासन की सलाह का इंतजार करें. अपनी सुरक्षा के साथ अन्य यात्रियों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें. कुछ मिनटों की सावधानी आपकी जान बचा सकती है.

बारिश के दौरान पहाड़ों में छोटे-छोटे नाले भी अचानक तेज बहाव में बदल जाते हैं. कई बार पानी का स्तर कुछ ही मिनटों में कई गुना बढ़ जाता है. ऐसे में किसी भी नदी या नाले को पार करने की कोशिश बिल्कुल न करें, चाहे पानी कम ही क्यों न दिखाई दे. तेज बहाव वाहन और लोगों दोनों को बहा सकता है. यदि रास्ते में पानी अधिक हो तो सुरक्षित स्थान पर रुकें और जलस्तर कम होने या प्रशासन की अनुमति मिलने का इंतजार करें. रोमांच दिखाने के लिए जोखिम उठाना जानलेवा साबित हो सकता है. हमेशा सुरक्षा को प्राथमिकता दें.

मानसून में पहाड़ी सड़कों पर सुरक्षित सफर के लिए वाहन का फिट होना बेहद जरूरी है. यात्रा से पहले ब्रेक, टायर, हेडलाइट, वाइपर, बैटरी और इंजन की अच्छी तरह जांच करा लें. टायरों की पकड़ मजबूत होनी चाहिए, क्योंकि गीली सड़क पर फिसलने का खतरा अधिक रहता है. ईधन भी पर्याप्त मात्रा में रखें, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में हर जगह पेट्रोल पंप उपलब्ध नहीं होते है. वाहन में स्टेपनी और जरूरी उपकरण भी रखें. यदि वाहन में कोई तकनीकी खराबी है, तो पहले उसे ठीक कराएं. अच्छी स्थिति वाला वाहन दुर्घटना की संभावना काफी हद तक कम कर देता है.

मानसून में यात्रा के दौरान अचानक मौसम खराब हो सकता है, रास्ता बंद होने के कारण कुछ समय के लिए रुकना पड़ सकता है. इसलिए अपने बैग में फर्स्ट एड किट, जरूरी दवाइयां, टॉर्च, पावर बैंक, रेनकोट, छाता, पीने का पानी और हल्का सूखा भोजन जरूर रखें. मोबाइल फोन पूरी तरह चार्ज रखें और यदि संभव हो तो अतिरिक्त चार्जिंग की व्यवस्था भी साथ रखें. पहाड़ों में कई जगह बिजली और नेटवर्क की समस्या हो सकती है. पहले से तैयारी होने पर किसी भी आपात स्थिति का सामना आसानी से किया जा सकता है, यात्रा सुरक्षित बनी रहती है.

यदि प्रशासन या पुलिस किसी सड़क को बंद कर बैरिकेडिंग लगा दे, तो उसे पार करने की गलती बिल्कुल न करें. कई बार लोग जल्दी पहुंचने के लिए बंद रास्तों से निकलने की कोशिश करते हैं, जिससे गंभीर हादसे हो जाते हैं. प्रशासन सड़क तभी बंद करता है, जब वहां खतरा होता है. इसके अलावा यात्रा के दौरान अपने परिवार या दोस्तों को समय-समय पर अपनी लोकेशन और यात्रा की जानकारी देते रहें. मोबाइल में जरूरी आपातकालीन नंबर भी सेव रखें. किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन, पुलिस या आपदा प्रबंधन टीम से संपर्क करें. थोड़ी सी सावधानी आपकी पूरी यात्रा को सुरक्षित और सुखद बना सकती है.

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