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Bagh Caves In Dhar: अगर आप वीकेंड पर परिवार या दोस्तों के साथ किसी शांत, ऐतिहासिक और प्राकृतिक जगह पर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो मध्य प्रदेश की बाघ गुफाएं आपके लिए शानदार विकल्प हो सकती हैं. महाराष्ट्र की अजंता-एलोरा गुफाओं जैसी दिखने वाली ये प्राचीन गुफाएं कम बजट और कम समय में बेहतरीन ट्रिप का अनुभव देती हैं.
धार जिले के बाघ कस्बे में स्थित बाघ गुफाएं विंध्य पर्वतमाला की दक्षिणी ढलानों पर बनी हुई हैं. यहां कुल 9 बौद्ध गुफाएं हैं, जिनमें से अभी 5 गुफाएं अच्छी स्थिति में मौजूद हैं. माना जाता है कि इनका निर्माण गुप्त काल में करीब 5वीं से 7वीं शताब्दी के दौरान हुआ था. चट्टानों को काटकर बनाई गई ये गुफाएं अपनी खास बनावट और प्राचीन चित्रकारी के लिए दुनियाभर में पहचानी जाती हैं.

यहां पहुंचते ही पहाड़ों के बीच बना शांत वातावरण हर किसी को आकर्षित करता है. बारिश के मौसम में इस जगह की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है. परिवार के साथ घूमने आने वाले लोग यहां घंटों तक गुफाओं की नक्काशी और पुरानी कला को देखते रहते हैं.

बाघ गुफाओं का संबंध बौद्ध धर्म से है. यहां बौद्ध भिक्षुओं के रहने के लिए कमरे, बड़े बरामदे और प्रार्थना स्थल बनाए गए थे. गुफाओं के अंदर बने स्तूप और पत्थरों पर उकेरी गई आकृतियां आज भी उस दौर की कहानी बयां करती हैं. कई जगह भगवान बुद्ध और बोधिसत्व के चित्रों के निशान देखने को मिलते हैं.
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गुफा नंबर 4 को रंगमहल कहा जाता है और यह यहां की सबसे बड़ी और सबसे प्रसिद्ध गुफा है. इस गुफा में बनी प्राचीन चित्रकारी लोगों को हैरान कर देती है. यहां नृत्य करती युवतियां, संगीत बजाते कलाकार और राजदरबार के दृश्य बनाए गए हैं. इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए यह गुफा सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहती है.

गुफा नंबर 2 को पांडव गुफा कहा जाता है, जबकि गुफा नंबर 3 हाथीखाना नाम से जानी जाती है. गुफा नंबर 5 को पाठशाला कहा जाता है. इन गुफाओं की बनावट अजंता गुफाओं से काफी मिलती-जुलती है. कहा जाता है कि यहां बने चित्रों में फूल, पक्षी, पशु और राजसी जीवन को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया था.

इतिहासकारों के मुताबिक इन गुफाओं की खोज आधुनिक समय में पहली बार वर्ष 1818 में डेंजर फील्ड ने की थी. लंबे समय तक यह जगह जंगलों के बीच छिपी रही. मान्यता है कि बौद्ध धर्म के पतन के बाद यहां इंसानों का आना कम हो गया था और आसपास के इलाके में बाघ रहने लगे थे. इसी वजह से इस क्षेत्र का नाम बाघ पड़ा.

वीकेंड ट्रिप के लिहाज से यह जगह काफी शानदार मानी जाती है. यहां परिवार या दोस्तों के साथ पूरा दिन आराम से बिताया जा सकता है. पहाड़ियों के बीच घूमना, पुराने इतिहास को करीब से देखना और प्राकृतिक नजारों का आनंद लेना लोगों को अलग अनुभव देता है.

अगर खर्चे की बात करें तो बाघ गुफाएं घूमना ज्यादा महंगा नहीं पड़ता. भारतीय पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क करीब 25 रुपए प्रति व्यक्ति है. वहीं, खाने-पीने और यात्रा मिलाकर एक व्यक्ति का एक दिन का खर्च लगभग 1000 से 1500 रुपए तक आसानी से आ सकता है. अगर परिवार या दोस्तों के साथ निजी वाहन से जाएं तो खर्च और भी कम हो सकता है.

बाघ गुफाओं तक पहुंचना भी काफी आसान है. यह जगह इंदौर से करीब 160 किलोमीटर और खरगोन से लगभग 140 किलोमीटर दूर स्थित है. सड़क मार्ग से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है. सबसे नजदीकी बड़ा शहर कुक्षी है, जहां से टैक्सी और निजी वाहन आसानी से मिल जाते हैं. इंदौर से बस और कार के जरिए भी यहां पहुंचा जा सकता है.




