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Ayurvedic Shirotalam Therapy In Bikaner: राजस्थान में बढ़ती गर्मी और हीटस्ट्रोक के मामलों के बीच बीकानेर के राजकीय आयुर्वेद औषधालय में किया जा रहा “शिरोतलम” उपचार चर्चा में है. आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार यह पंचकर्म आधारित प्रक्रिया शरीर और मस्तिष्क को शीतलता पहुंचाने के उद्देश्य से की जाती है. गर्मी, सिरदर्द, बेचैनी और तनाव जैसी समस्याओं से राहत पाने के लिए लोग इसमें रुचि दिखा रहे हैं. विशेषज्ञों ने पर्याप्त पानी, हल्का भोजन और धूप से बचाव की सलाह भी दी है.
बीकानेर: राजस्थान में इस बार गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. कई जिलों में तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है और लू का असर जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है. तेज धूप, गर्म हवाओं और बढ़ती उमस के कारण लोगों में सिरदर्द, बेचैनी, अनिद्रा, चक्कर और हीटस्ट्रोक जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. ऐसे समय में लोग राहत पाने के लिए पारंपरिक और वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों की ओर भी रुख कर रहे हैं. बीकानेर के राजकीय आयुर्वेद औषधालय में इन दिनों एक खास आयुर्वेदिक उपचार “शिरोतलम” चर्चा का विषय बना हुआ है. गर्मी और उससे जुड़ी परेशानियों से राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में मरीज यहां पहुंच रहे हैं. आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार यह उपचार शरीर और मस्तिष्क को ठंडक पहुंचाने में मदद करने के उद्देश्य से किया जाता है.
राजकीय आयुर्वेद औषधालय की डॉक्टर दीपिका सारस्वत के अनुसार “शिरोतलम” पंचकर्म चिकित्सा की एक विशेष प्रक्रिया है. इस प्रक्रिया का उद्देश्य शरीर को शीतलता और मानसिक आराम देना माना जाता है. उपचार में आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से एक विशेष लेप तैयार किया जाता है. इसमें आंवला, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, चंदन और जटामासी जैसी औषधियों को छाछ के साथ तैयार किया जाता है. तैयार लेप को मरीज के सिर पर लगाया जाता है और निर्धारित समय तक रखा जाता है.
गर्मी और हीटस्ट्रोक के मरीजों में बढ़ी मांग
अत्यधिक गर्मी के कारण अस्पतालों में सिर भारी होना, थकान, चक्कर और गर्मी से जुड़ी शिकायतों वाले मरीज बढ़ रहे हैं. डॉक्टरों के अनुसार कई लोग इस उपचार को गर्मी के दौरान अतिरिक्त राहत के तौर पर अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि उपचार के साथ मरीजों को पर्याप्त पानी पीने, छाछ लेने, हल्का भोजन करने और तेज धूप से बचने की सलाह दी जाती है.
कितने दिन तक दिया जाता है उपचार
डॉक्टरों के अनुसार मरीज की स्थिति के आधार पर यह प्रक्रिया कई दिनों तक दी जा सकती है. सामान्य तौर पर कुछ लोगों को लगातार कुछ दिन तक यह चिकित्सा दी जाती है, जबकि जरूरत के अनुसार अवधि बढ़ाई भी जा सकती है. हालांकि किसी भी चिकित्सा प्रक्रिया को अपनाने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी माना जाता है.
विशेषज्ञों ने दी सावधानी बरतने की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि दोपहर में अनावश्यक बाहर निकलने से बचें, शरीर में पानी की कमी न होने दें और तेज धूप में लंबे समय तक न रहें. गर्मी के इस मौसम में आयुर्वेदिक और आधुनिक चिकित्सा दोनों के संतुलित उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें





