अमेरिका हर दिन कर रहा बमबारी, फिर भी नहीं मिली कामयाबी, क्या होर्मुज खोलना ट्रंप के बस की बात नहीं?


होमदुनियाअमेरिका

अमेरिका हर बमबारी के बाद नहीं मिली कामयाबी, ट्रंप के बस का नहीं होर्मुज खोलना?

Last Updated:

ईरान पर लगातार हवाई हमले करने के बावजूद अमेरिका अब तक होर्मुज को पूरी तरह सुरक्षित नहीं बना पाया है. सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ बमबारी से यह मिशन पूरा नहीं होगा. अगर अमेरिका वास्तव में इस अहम समुद्री रास्ते को दोबारा पूरी तरह खोलना चाहता है, तो उसे कहीं ज्यादा बड़े सैन्य अभियान की जरूरत पड़ेगी.

Zoom

अमेर‍िकी राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप.

अमेरिका रोजाना ईरान पर भीषण हवाई हमले कर रहा है. लेकिन इसके बावजूद वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अहम समुद्री रास्ते को खोलने में नाकाम साबित हो रहा है. आखिर अमेरिका क्यों इसमें कामयाब नहीं हो रहा. ऐसा क्या कारण है कि ट्रंप खोल नहीं पा रहे हैं. इसे खोलने के लिए क्या करना होगा.

बमबारी से नहीं खुलेगा रास्ता

युद्ध रणनीति के विशेषज्ञों का मानना है कि केवल रोजाना बमबारी करने से यह रास्ता नहीं खुलेगा. इसे फिर से सुरक्षित बनाने के लिए अमेरिका को फारस की खाड़ी में कई और युद्धपोत भेजने होंगे. जमीन पर उतरकर हजारों सैनिकों के साथ बड़ा सैन्य अभियान चलाना पड़ेगा.

शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना और उसकी सैन्य ताकत को पूरी तरह ध्वस्त करना था. लेकिन अब पूरी लड़ाई सिर्फ इस बात पर टिक गई है कि कैसे भी करके स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को व्यापार के लिए दोबारा चालू कराया जाए. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के पास फिलहाल इस इलाके में करीब 20 युद्धपोत तैनात हैं, जो जानकारों के मुताबिक इस मिशन के लिए बहुत कम हैं.

बमबारी से कमोजर करना नामुमकिन

पूर्व पेंटागन अधिकारी जेसन कैंपबेल का कहना है कि सिर्फ कुछ दिन और बमबारी करके ईरान को खत्म कर देने की बात एक बहुत बड़ा भ्रम है. जब तक शिपिंग और इंश्योरेंस कंपनियों को यह भरोसा नहीं हो जाता कि रास्ता पूरी तरह सुरक्षित है, तब तक कोई भी जहाज वहां से नहीं गुजरेगा.

ईरान की 370 मील लंबी समुद्री सीमा से आने वाली मिसाइलों और ड्रोन खतरों को बेअसर करने के लिए अमेरिकी सेना को ईरान की जमीन पर कब्जा करना पड़ेगा. इसमें भारी वित्तीय नुकसान और अमेरिकी सैनिकों की जान जाने का बड़ा जोखिम है.

ट्रंप के पास क्या हैं रास्ते?

रक्षा जानकारों का मानना है कि ट्रंप फिलहाल न तो भारी तादाद में सैनिक भेजने के मूड में हैं और न ही अमेरिका बड़े पैमाने पर नुकसान उठाने का खतरा मोल लेना चाहता है. अब ट्रंप के सामने सिर्फ दो ही रास्ते बचते हैं या तो वे बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझाएं. फिर हजारों सैनिकों को युद्ध के मैदान में उतारकर बड़ा सैन्य अभियान शुरू करें.

About the Author

authorimg

सज्जन कुमार दड़बीSenior Sub Editor

मैं इस समय News18 App टीम का हिस्सा हूं. News18 App पर आप आसानी से अपनी मनपसंद खबरें पढ़ सकते हैं. मुझे खबरें लिखने का 4 साल से अधिक का अनुभव है और फिलहाल अभी सीनियर सब एडिटर के पद पर हूं. इससे पहले इनशॉर्ट्स औ…और पढ़ें



Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

spot_imgspot_img