एक मिनट में पड़ सकता है ब्रेन स्ट्रोक का झटका! ‘BE FAST’ फॉर्मूला बचा सकता है जिंदगी, डॉक्टर ने क्या बताया


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Kanpur News: जिस तरह हार्ट अटैक में दिल की नसों में खून का थक्का जम जाता है, उसी तरह ब्रेन स्ट्रोक में दिमाग की नसों में ब्लॉकेज हो जाता है और इस समय युवा इस बीामारी का तेजी से शिकार हो रहे हैं. इस बीमारी में मस्तिष्क के कुछ हिस्सों तक खून पहुंचना बंद हो जाता है और मरीज को अचानक बोलने, चलने या शरीर के अंगों को नियंत्रित करने में दिक्कत आने लगती है.

कानपुर: ब्रेन स्ट्रोक ऐसा अटैक है जो केवल एक मिनट में इंसान की जिंदगी बदल सकता है, इसलिए इसके लक्षणों को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह कहना है देश के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डा. वीपी सिंह का. लोकल 18 से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि जिस तरह हार्ट अटैक में दिल की नसों में खून का थक्का जम जाता है, उसी तरह ब्रेन स्ट्रोक में दिमाग की नसों में ब्लॉकेज हो जाता है.

इस बीमारी में मस्तिष्क के कुछ हिस्सों तक खून पहुंचना बंद हो जाता है और मरीज को अचानक बोलने, चलने या शरीर के अंगों को नियंत्रित करने में दिक्कत आने लगती है. डॉ. सिंह ने कहा कि सबसे जरूरी चीज समय है. अगर शुरुआती लक्षण समझ में आ जाएं और मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है.

BE FAST फॉर्मूला याद रखें
ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण पहचानने के लिए डा. वीपी सिंह ने “BE FAST” फॉर्मूला बताया. उनके मुताबिक,
B-Balance: अचानक संतुलन बिगड़ना
E-Eyes: आंखों से धुंधला दिखना
F-Face: चेहरे का टेढ़ा होना
A-Arms: दोनों हाथ उठाने पर एक हाथ कमजोर पड़ना
S-Speech: बोलने में परेशानी होना
T-Time: तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचना

उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति में ये लक्षण नजर आए तो देरी करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि ब्रेन स्ट्रोक में हर मिनट बेहद अहम होता है.

खराब लाइफस्टाइल बन रही बड़ी वजह
डॉ. सिंह ने बताया कि आजकल गलत खानपान और खराब दिनचर्या के कारण ब्रेन स्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ज्यादा कोलेस्ट्रॉल वाला खाना, धूम्रपान, शराब, अनियंत्रित ब्लड प्रेशर और शुगर इसके प्रमुख कारण हैं. उन्होंने लोगों को नियमित हेल्थ चेकअप कराने और संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी.

चार घंटे में इलाज शुरू होना बेहद जरूरी
उन्होंने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक के शक होने पर सबसे पहले सीटी स्कैन और सीटी एंजियोग्राम किया जाता है. इससे पता चलता है कि दिमाग की कौन-सी नस ब्लॉक हुई है. अगर मरीज समय पर अस्पताल पहुंच जाए तो दवाओं से खून के थक्के को घोला जा सकता है. इसके अलावा अब “मैकेनिकल थ्रॉम्बेक्टॉमी” जैसी आधुनिक तकनीक भी उपलब्ध है. इसमें डॉक्टर नसों के जरिए दिमाग तक पहुंचकर क्लॉट को बाहर निकाल देते हैं. यह तकनीक कई मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित हो रही है.

अब बिना बेहोश किए भी हो रहा ब्रेन ट्यूमर का इलाज
डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि मेडिकल साइंस लगातार आगे बढ़ रही है. अब कई मामलों में ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन मरीज को पूरी तरह बेहोश किए बिना भी किया जा रहा है. इससे इलाज ज्यादा सुरक्षित और आसान हो गया है. उन्होंने आखिर में कहा कि ब्रेन स्ट्रोक से डरने की नहीं, बल्कि जागरूक रहने की जरूरत है. सही समय पर इलाज ही सबसे बड़ा बचाव है.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



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